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Gorakhpur News: मानचित्र स्वीकृति के बाद ही अब मिलेगा होम लोन
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गोरखपुर। भवन निर्माण के लिए अगर होम लोन की जरूरत है तो मानचित्र की स्वीकृति अथवा इसके लिए आवेदन करना होगा। बिना इसके बैंक होम लोन की प्रक्रिया शुरू नहीं करेगा। इससे बिना मानचित्र स्वीकृति भवन निर्माण के लिए ऋण देने की संभावना पर रोक लगेगी।
एनेक्सी भवन में सोमवार को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल की अध्यक्षता में बैंकों के अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें होम लोन की प्रक्रिया को सरल बनाने और दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय हुआ कि जीडीए की ओर से अपने एलटीपी (लाइसेंस्ड टाउन प्लानर) का पूरा डाटा संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराया जाएगा। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि जनसामान्य की सुविधा और जागरूकता के लिए इस डाटा के साथ संबंधित मोबाइल नंबर अपनी शाखाओं में प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इससे भवन मानचित्र से जुड़ी जानकारी लेने वाले आवेदकों को सही संपर्क उपलब्ध हो सकेगा और प्रक्रिया में अनावश्यक भ्रम कम होगा।
बैंक अधिकारियों ने बताया कि गृह ऋण केवल पारंपरिक बैंकों के माध्यम से ही नहीं बल्कि एनबीएफसी के जरिये भी दिया जाता है। एसबीआई और पीएनबी के शाखा प्रबंधकों ने प्रक्रिया में लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) को भी शामिल करने का सुझाव दिया।
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जीडीए उपाध्यक्ष ने इस पर सहमति जताते हुए एनबीएफसी और एलडीएम के साथ शीघ्र अलग बैठक करने की बात कही। इसका उद्देश्य मानचित्रों की स्वीकृति में तेजी लाने के साथ महायोजना के मानकों के अनुरूप बुनियादी ढांचा सुविधाओं के विकास को गति देना है। बैठक में विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक, क्षेत्रीय प्रबंधक, क्लस्टर व सर्किल हेड मौजूद रहे।
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ऋण आवेदनों की जानकारी भी बैंक देगा जीडीए को
बैठक में यह भी तय किया गया कि बैंक होम लोन से संबंधित प्राप्त आवेदनों का आवश्यक डेटा नियमित रूप से जीडीए को उपलब्ध कराएगा। इससे प्राधिकरण को यह जानकारी मिल सकेगी कि किन क्षेत्रों और भवनों के लिए गृह ऋण के आवेदन किए जा रहे हैं।
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एनेक्सी भवन में सोमवार को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल की अध्यक्षता में बैंकों के अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें होम लोन की प्रक्रिया को सरल बनाने और दोनों संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। तय हुआ कि जीडीए की ओर से अपने एलटीपी (लाइसेंस्ड टाउन प्लानर) का पूरा डाटा संबंधित बैंकों को उपलब्ध कराया जाएगा। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि जनसामान्य की सुविधा और जागरूकता के लिए इस डाटा के साथ संबंधित मोबाइल नंबर अपनी शाखाओं में प्रमुखता से प्रदर्शित करें। इससे भवन मानचित्र से जुड़ी जानकारी लेने वाले आवेदकों को सही संपर्क उपलब्ध हो सकेगा और प्रक्रिया में अनावश्यक भ्रम कम होगा।
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बैंक अधिकारियों ने बताया कि गृह ऋण केवल पारंपरिक बैंकों के माध्यम से ही नहीं बल्कि एनबीएफसी के जरिये भी दिया जाता है। एसबीआई और पीएनबी के शाखा प्रबंधकों ने प्रक्रिया में लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) को भी शामिल करने का सुझाव दिया।
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जीडीए उपाध्यक्ष ने इस पर सहमति जताते हुए एनबीएफसी और एलडीएम के साथ शीघ्र अलग बैठक करने की बात कही। इसका उद्देश्य मानचित्रों की स्वीकृति में तेजी लाने के साथ महायोजना के मानकों के अनुरूप बुनियादी ढांचा सुविधाओं के विकास को गति देना है। बैठक में विभिन्न बैंकों के शाखा प्रबंधक, क्षेत्रीय प्रबंधक, क्लस्टर व सर्किल हेड मौजूद रहे।
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ऋण आवेदनों की जानकारी भी बैंक देगा जीडीए को
बैठक में यह भी तय किया गया कि बैंक होम लोन से संबंधित प्राप्त आवेदनों का आवश्यक डेटा नियमित रूप से जीडीए को उपलब्ध कराएगा। इससे प्राधिकरण को यह जानकारी मिल सकेगी कि किन क्षेत्रों और भवनों के लिए गृह ऋण के आवेदन किए जा रहे हैं।