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यूपी: कलाई में 3 रॉड फिर भी हौसला फौलाद, गोरखपुर की सोनाली ने चीन में एशिया कप में की अंपायरिंग, रचा इतिहास
Tue, 15 Sep 2026 01:14 PM IST
Rohit Singh
दिव्यात्मा राय, संवाद न्यूज एजेंसी/गोरखपुर
दिव्यात्मा राय, संवाद न्यूज एजेंसी/गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Tue, 15 Sep 2026 01:14 PM IST
सार
सोनाली सिंह अभी चीन में ही हैं। उन्होंने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि हॉकी खेलते समय उनके हाथ में गंभीर चोट लग गई। चोट इतनी गहरी थी कि हाथ में तीन रॉड डालनी पड़ीं। इसके बाद पहले की तरह हॉकी खेलना मुश्किल हो गया। चोट लगने के बाद उन्होंने फिर मैदान में उतरने की उम्मीद छोड़ दी थी। मेरे कोच ने सलाह दी कि अंपायरिंग करो और फिर उन्होंने मार्गदर्शन किया।
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हॉकी वाली खबर में सोनाली सिंह
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मैदान पर हॉकी स्टिक थामकर देश के लिए खेलने का सपना देखने वाली सोनाली सिंह ने कलाई में गंभीर चोट के बाद भी मैदान से नाता नहीं टूटने दिया। जूनियर स्तर पर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में खेलने वाली सोनाली चोट के चलते मैदान पर जलवा नहीं दिखा सकीं पर हॉकी के प्रति उनका जुनून ऐसा था कि खिलाड़ी से अंपायर बन गईं।
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अब उन्होंने चीन के मोकी शहर में आयोजित विमेंस हॉकी जूनियर एशिया कप-2026 में अंपायर की भूमिका निभाई है। वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज की पूर्व छात्रा सोनाली सिंह ने करीब सात साल तक वीर बहादुर सिंह स्पोर्ट्स कॉलेज में पढ़ाई के साथ हॉकी का प्रशिक्षण लिया। इस दौरान वह कॉलेज की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहीं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
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सोनाली सिंह अभी चीन में ही हैं। उन्होंने फोन पर हुई बातचीत में बताया कि हॉकी खेलते समय उनके हाथ में गंभीर चोट लग गई। चोट इतनी गहरी थी कि हाथ में तीन रॉड डालनी पड़ीं। इसके बाद पहले की तरह हॉकी खेलना मुश्किल हो गया। चोट लगने के बाद उन्होंने फिर मैदान में उतरने की उम्मीद छोड़ दी थी। मेरे कोच ने सलाह दी कि अंपायरिंग करो और फिर उन्होंने मार्गदर्शन किया।
स्टिक छूटी तो सीटी थाम ली
चोट के बाद सोनाली के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि अब हॉकी से उनका रिश्ता कैसे बना रहेगा। उन्होंने हार मानने के बजाय खेल को दूसरे नजरिये से समझने का फैसला किया। खिलाड़ी के तौर पर मैदान में उतरने की जगह उन्होंने अंपायरिंग को अपना कॅरिअर बना लिया। इसमें उनकी कोच शशि नैवत का मार्गदर्शन मिला।
चोट के बाद सोनाली के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि अब हॉकी से उनका रिश्ता कैसे बना रहेगा। उन्होंने हार मानने के बजाय खेल को दूसरे नजरिये से समझने का फैसला किया। खिलाड़ी के तौर पर मैदान में उतरने की जगह उन्होंने अंपायरिंग को अपना कॅरिअर बना लिया। इसमें उनकी कोच शशि नैवत का मार्गदर्शन मिला।
उन्होंने सोनाली को अंपायरिंग की बारीकियां बताईं। फिर उन्होंने एक्सपर्ट से ट्रेनिंग ली। लखनऊ, बरेली, कानपुर सहित कई राज्यों में उन्होंने खेल के दौरान अंपारिंग की। खिलाड़ी के रूप में मैदान पर बिताए वर्षों का अनुभव उनके लिए अंपायरिंग में काफी मददगार साबित हुआ।
सोनाली का चयन अंपायरिंग के लिए विमेंस हॉकी जूनियर एशिया कप-2026 के लिए भारत की ओर से हुआ। चीन के मोकी शहर में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उन्होंने अंपायर के रूप में जिम्मेदारी निभाई और वापस आने वाली हैं।