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माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की नियमावली 100 साल से अधिक पुरानी, यहां पाकिस्तान की डिग्री पर मिल जा रही नौकरी
Thu, 12 Nov 2020 11:18 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 12 Nov 2020 11:18 AM IST
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग से शोधरत छात्रों ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का आरोप है कि पाकिस्तान के लाहौर स्थित मेयो स्कूल ऑफ आर्ट की डिग्री के आधार पर माध्यमिक स्कूलों में आज भी नौकरी मिल सकती है, जबकि मौजूदा समय में इसका कोई अस्तित्व ही नहीं है। उन्होंने नियमावली बदलने की मांग की है।
शोध कर रहे छात्र शेखर त्रिपाठी, अजय कुमार, चंदन सिंह, सुरेंद्र प्रजापति, सुनील कुमार और राम उजागीर ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की नियमावली 100 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है। इसमें कला विषय में योग्यता को मान्यता दी गई है।
बोर्ड आज भी वर्ष 1921 में जारी की गई नियमावली के आधार पर नियुक्तियां करता है। इसकी वजह से योग्य छात्रों को नियुक्तियां नहीं मिल पाती हैं। केवल एक वर्षीय प्राविधिक कला करने वाला छात्र इस परीक्षा में चयनित हो सकते हैं। यह न्याय संगत नहीं है। अब कला के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आ चुका है। कला क्षेत्र में स्नातक व परास्नातक के साथ ही डिप्लोमा कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं।
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शोध कर रहे छात्र शेखर त्रिपाठी, अजय कुमार, चंदन सिंह, सुरेंद्र प्रजापति, सुनील कुमार और राम उजागीर ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की नियमावली 100 साल से अधिक पुरानी हो चुकी है। इसमें कला विषय में योग्यता को मान्यता दी गई है।
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बोर्ड आज भी वर्ष 1921 में जारी की गई नियमावली के आधार पर नियुक्तियां करता है। इसकी वजह से योग्य छात्रों को नियुक्तियां नहीं मिल पाती हैं। केवल एक वर्षीय प्राविधिक कला करने वाला छात्र इस परीक्षा में चयनित हो सकते हैं। यह न्याय संगत नहीं है। अब कला के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आ चुका है। कला क्षेत्र में स्नातक व परास्नातक के साथ ही डिप्लोमा कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं।
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