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डीएम और जीडीए के वीसी तय करेंगे, 72 परिवारों को कहां शिफ्ट किया जाए?
Thu, 23 Jan 2020 10:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jan 2020 10:12 AM IST
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जीडीए सभागार में आयोजित जीडीए बोर्ड की बैठक में उपस्थित अधिकारी।
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नियम कानून ताक पर रखकर आवास विकास कॉलोनी शाहपुर गीता वाटिका की जमीन के बंदरबांट का मामला भी जीडीए बोर्ड के समक्ष रखा गया। तय हुआ कि शाहपुर आवास विकास कॉलोनी में आवास विकास विभाग की जमीन पर नियम विरुद्ध तरीके से बसाए गए 72 परिवारों को कहां शिफ्ट किया जाए, इसका निर्णय डीएम और जीडीए वीसी करेंगे। दोनों अफसर आवास विकास आयुक्त के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के साथ ही हाईकोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में दोषियों पर कार्रवाई भी करेंगे।
आपको बताएं कि कॉलोनी में आवास विकास की जमीन पर प्रशासन ने 24 लाभार्थियों को पट्टा कर दिया था। पार्क, सड़क की जमीन तक का पट्टा कर दिया गया। मामला कोर्ट तक गया और अब जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई चल रही है। इसी बीच डूडा की तरफ से कॉलोनी की बाकी बची जमीन पर भी 48 ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए 2 से 2.50 लाख रुपये दे दिए गए, जिनके पास अपनी या फिर सरकारी भूमि नहीं थी। ये दोनों फर्जीवाड़ा अब डूडा, जिला प्रशासन और जीडीए के अफसरों के लिए गले की फांस बन गया है।
मल्टीलेवल पार्किंग में बदलाव को भी मंजूरी
गोलघर स्थित मल्टीलेवल पार्किंग के ले-आउट में बदलाव को भी जीडीए बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। वहां अब दो तल पर व्यावसायिक दुकानें भी खोली जाएंगी। इसके लिए अतिरिक्त धन की डिमांड करने को प्राधिकरण, शासन को प्रस्ताव भेजेगा। वहीं रामगढ़ताल स्थित नया सवेरा के पास पार्किंग के लिए नए सिरे से टेंडर निकलेगा। वर्तमान में जीडीए वहां पार्किंग संचालित कर रहा है। प्राधिकरण के कर्मचारी ही वसूली कर रहे हैं।
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आपको बताएं कि कॉलोनी में आवास विकास की जमीन पर प्रशासन ने 24 लाभार्थियों को पट्टा कर दिया था। पार्क, सड़क की जमीन तक का पट्टा कर दिया गया। मामला कोर्ट तक गया और अब जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई चल रही है। इसी बीच डूडा की तरफ से कॉलोनी की बाकी बची जमीन पर भी 48 ऐसे लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने के लिए 2 से 2.50 लाख रुपये दे दिए गए, जिनके पास अपनी या फिर सरकारी भूमि नहीं थी। ये दोनों फर्जीवाड़ा अब डूडा, जिला प्रशासन और जीडीए के अफसरों के लिए गले की फांस बन गया है।
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मल्टीलेवल पार्किंग में बदलाव को भी मंजूरी
गोलघर स्थित मल्टीलेवल पार्किंग के ले-आउट में बदलाव को भी जीडीए बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। वहां अब दो तल पर व्यावसायिक दुकानें भी खोली जाएंगी। इसके लिए अतिरिक्त धन की डिमांड करने को प्राधिकरण, शासन को प्रस्ताव भेजेगा। वहीं रामगढ़ताल स्थित नया सवेरा के पास पार्किंग के लिए नए सिरे से टेंडर निकलेगा। वर्तमान में जीडीए वहां पार्किंग संचालित कर रहा है। प्राधिकरण के कर्मचारी ही वसूली कर रहे हैं।
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सड़क किनारे गिट्टी-बालू रखा तो लगेगा 10 हजार रुपये जुर्माना
अब अगर बिल्डिंग मैटेरियल के दुकानदार सड़कों पर गिट्टी, बालू और ईंट रखेंगे तो उन्हेें 10 हजार रुपये तक का जुर्माना तो भरना ही होगा, सामान भी जब्त हो जाएगा। जीडीए बोर्ड बैठक में इस कार्रवाई को लेकर भी निर्णय हुआ है। शहर के देवरिया बाईपास, रूस्तमपुर बगहा बाबा रोड, फातिमा रोड, इंजीनियरिंग कॉलेज रोड, मेडिकल कॉलेज, टीपीनगर रोड समेत कई प्रमुख सड़कों पर बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान वाले सड़क पर गिट्टी, बालू और ईट रखकर बेचते हैं जिससे रास्ता तो जाम होता ही है, दुर्घटनाएं भी होती हैं।
पिछली बोर्ड बैठक में भी रखा गया था एयरफोर्स का मामला
गोरखपुर। 30 जुलाई को हुई पिछली बोर्ड बैठक में तय हुआ था कि जीडीए अपनी महायोजना 2021 के मानचित्र में नो कंस्ट्रक्शन जोन में कौन-कौन से इलाके 900 मीटर और कौन से 100 मीटर में आएंगे, उसे स्पष्ट तौर पर चिह्नित कर एयरफ ोर्स को भेजे। वहां से रजामंदी मिलने पर फिर अगली बैठक में मामला रखा जाए।
900 मीटर के प्रतिबंध के दायरे को लेकर शुरू से विवाद चल रहा था। इसपर जीडीए के अफ सरों ने एयरफ ोर्स को पत्र लिख पूछा था कि वे कहां तक नो कंस्ट्रक्शन जोन चाहते हैं। एयरफ ोर्स ने जवाब में जो अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजी थी, उसमें कुछ ही इलाकों में उन्होंने 900 मीटर के प्रतिबंध की जरूरत बताई थी।
उन्होंने यह दायरा मानचित्र पर इंगित कर भेजा था। ऐसे में कोई गड़बड़ी न हो, इसलिए इसे इलाकेवार स्पष्ट करने के लिए बोर्ड ने महायोजना के मानचित्र पर कलर कर उसे दोबारा एयरफ ोर्स को भेजा। प्राधिकरण के मुताबिक, एयरफोर्स ने दूसरी बार भी अपनी मंजूरी दे दी, जिसके बाद मामला जीडीए बोर्ड में रखा गया।
पिछली बोर्ड बैठक में भी रखा गया था एयरफोर्स का मामला
गोरखपुर। 30 जुलाई को हुई पिछली बोर्ड बैठक में तय हुआ था कि जीडीए अपनी महायोजना 2021 के मानचित्र में नो कंस्ट्रक्शन जोन में कौन-कौन से इलाके 900 मीटर और कौन से 100 मीटर में आएंगे, उसे स्पष्ट तौर पर चिह्नित कर एयरफ ोर्स को भेजे। वहां से रजामंदी मिलने पर फिर अगली बैठक में मामला रखा जाए।
900 मीटर के प्रतिबंध के दायरे को लेकर शुरू से विवाद चल रहा था। इसपर जीडीए के अफ सरों ने एयरफ ोर्स को पत्र लिख पूछा था कि वे कहां तक नो कंस्ट्रक्शन जोन चाहते हैं। एयरफ ोर्स ने जवाब में जो अपनी रिपोर्ट प्राधिकरण को भेजी थी, उसमें कुछ ही इलाकों में उन्होंने 900 मीटर के प्रतिबंध की जरूरत बताई थी।
उन्होंने यह दायरा मानचित्र पर इंगित कर भेजा था। ऐसे में कोई गड़बड़ी न हो, इसलिए इसे इलाकेवार स्पष्ट करने के लिए बोर्ड ने महायोजना के मानचित्र पर कलर कर उसे दोबारा एयरफ ोर्स को भेजा। प्राधिकरण के मुताबिक, एयरफोर्स ने दूसरी बार भी अपनी मंजूरी दे दी, जिसके बाद मामला जीडीए बोर्ड में रखा गया।