Whatsapp Clone: गोरखपुर डीएम के नाम पर जालसाज ने अधिकारियों से मांगे रुपये, जांच में जुटा साइबर सेल
डीएम ने लोगों से अपील की है कि साइबर अपराधियों के चंगुल में ना फंसें। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर किसी भी व्यक्ति द्वारा रुपये की मांग करने पर तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दें।
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गोरखपुर में जालसाजों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि साइबर ठगी में आला अफसरों के नाम का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचक रहे। ऐसा ही वाकया डीएम कृष्णा करुणेश के साथ भी हुआ। जालसाजों ने उनके व्हाट्सएप का क्लोन बनाकर मंगलवार सुबह एडीएम और एसडीएम रैंक के अधिकारियों से रुपये की मांग कर डाली।
जालसाज ने अपनी चैटिंग में जरूरी बैठक में होने का हवाला देते हुए कॉल नहीं कर पाने की बात कही। डीएम ठीक उसी समय एयरफोर्स की बैठक में मौजूद भी थे। हालांकि, चैटिंग के मजमून से अफसरों ने जालसाजी को भांप लिया। कुछ अफसरों ने प्रारंभिक चैटिंग के बाद जवाब देना बंद कर दिया तो कुछ ने सीधे डीएम के सीयूजी नंबर पर फोन कर बात कर ली, जिसके बाद उन्हें असलियत की जानकारी हुई।
वहीं सूचना मिलते ही डीएम ने इसकी जानकारी एसएसपी डॉ. विपिन ताडा को दी जिसके बाद साइबर सेल जांच में जुट गया। सेल ने तत्काल फर्जी व्हाट्सएप आईडी को बंद कर दिया। एसएसपी का कहना है कि जल्द ही जालसाज पकड़ में आ जाएगा।
जालसाज ने डीएम की फोटो समेत व्हाट्सएप का क्लोन बनाकर मंगलवार सुबह 8:57 बजे अधिकारियों से चैटिंग शुरू की। डीएम बनकर उसने बताया कि वह बैठक में हैं और ज्यादा कॉल नहीं कर पाएंगे इसलिए मैसेज चैटिंग से बात कर रहा हूं। फिर जालसाज 9:16 बजे रुपये मांगने लगा। कहा कि अमेजान पे पर गिफ्ट पैकेट आया है। उसी को लेने के लिए रुपये देने होंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि चैटिंग करने वाले व्यक्ति ने बताया कि सीमित कॉल के साथ बैठक में हूं। अब इसे संयोग कह सकते हैं या फिर जालसाज को डीएम के रुटीन की सटीक जानकारी थी। चैटिंग के समय डीएम, एयरफोर्स के अधिकारियों के साथ बैठक कर रहे थे। ऐसे में पहले तो अधिकारियों को लगा कि वास्तव में चैटिंग डीएम ही कर रहे हैं। मगर जैसे ही उन्होंने आगे का मजमून पढ़ा उन्हें संदेह हो गया।
ये है चैटिंग के अंश
सुबह 8:57 बजे। हैलो! आप कैसे हैं, इस समय आप कहां हैं? इसके बाद अधिकारियों ने समझा कि ये हमारे डीएम साहब हैं। अधिकारियों ने लिखा सुप्रभात सर, आवास पर हैं। जालसाज ने लिखा...एक ऐसी चीज है जो आपको मेरे लिए तत्काल करने की आवश्यकता है। क्योंकि मैं वर्तमान में सीमित फोन कॉल के साथ एक बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक में भाग ले रहा हूं। अधिकारियों ने 9:16 बजे लिखा कि सर क्या आवश्यक है? जालसाज ने कहा कि क्या आप किसी अमेजन पे गिफ्ट कार्ड से परिचित हैं? अधिकारी...हां बहुत अच्छी तरह से। इसके बाद रुपये की डिमांड करते हुए जालसाज ने लिखा कि कुछ सूचीबद्ध संभावनाएं हैं, मैं उन्हें आज प्रस्तुत कर रहा हूं, मैं इसे पूरा नहीं कर सकता हूं।
डीएम ने की सतर्क रहने की अपील
डीएम ने लोगों से अपील की है कि साइबर अपराधियों के चंगुल में ना फंसें। फेसबुक, व्हाट्सएप, ट्विटर, इंस्टाग्राम आदि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर किसी भी व्यक्ति द्वारा रुपये की मांग करने पर तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दें। एसएसपी ने बताया कि डीएम की फर्जी व्हाट्सएप आईडी को सोशल मीडिया साइट्स से बात कर बंद करवा दिया गया है। पूरा विवरण मांगा गया है। जानकारी मिलते ही आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
एडीजी और एसएसपी के नाम भी मांग चुके हैं रुपये
जालसाज इससे पहले गोरखपुर में एडीजी रहे दावा शेरपा और एसएसपी रहे दिनेश प्रभु का व्हाट्सएप और फेसबुक एकाउंट का क्लोन बनाकर रुपये मांग चुके हैं। वहीं यूनिवर्सिटी के कुलसचिव और कुलपति के अलावा तमाम नेताओं, दरोगा, आमजन के भी सोशल मीडिया एकाउंट को हैक कर रुपये मांगे जा चुके हैं।