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गोरखपुर: हैंडपंप, सुअरबाड़े और जानवर से फैला रहा है इंसेफेलाइटिस, सीआईएफ ने जारी की रिपोर्ट

Tue, 02 Nov 2021 06:48 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 02 Nov 2021 06:48 PM IST
सार

इंसेफेलाइटिस से बचना है तो न करें उथले हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल, सीआईएफ के आधार पर स्वास्थ्य विभाग के सामने आई जानकारी, 84 फीसदी मरीज उथले हैंडपंप व जलस्रोतों का इस्तेमाल करते पाए गए।

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Encephalitis spreading through hand pumps pig farms and animals in Gorakhpur
इंसेफेलाइटिस। (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

गोरखपुर जिले के स्वास्थ्य विभाग प्रत्येक इंसेफेलाइटिस मरीज का केस इन्वेस्टीगेशन फार्म (सीआईएफ) भरवाता है। इस फार्म के विश्लेषण से यह बात सामने आई है कि इंसेफेलाइटिस के सबसे बड़े कारक उथले हैंडपंप, सुअरबाड़े, चूहे और छछूंदर जैसे जानवर हैं। यह पाया गया है कि 84 फीसदी दिमागी बुखार यानि इंसेफेलाइटिस के मरीज उथले हैंडपंप और जलस्रोतों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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सीएमओ डॉ सुधाकर पांडेय ने बताया कि चूहा, मच्छर, छछूंदर और दूषित पानी का सेवन दिमागी बुखार के सबसे बड़े कारक रहे हैं। दिमागी बुखार के जो भी मरीज पाए जाते हैं उनका सीआईएफ करवाया जाता है। सीआईएफ के आधार पर राज्य स्तर पर जो निष्कर्ष सामने आए हैं उनके मुताबिक दिमागी बुखार के 55 फीसदी मरीज कृषि कार्यों में संलग्न मजदूरों के परिवारों से आते हैं। कुल 63 फीसदी दिमागी बुखार के मरीज ऐसे मिले हैं जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों से जुड़े हैं।
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मरीजों के परिवार का शैक्षिक स्तर भी अच्छा नहीं पाया गया है। सीआईएफ के मुताबिक मरीजों में 31 फीसदी के पिता और 64 फीसदी की माताओं को प्राथमिक शिक्षा मिली हुई है। कुल 85 फीसदी मरीजों के घरों के 100 मीटर के दायरे में जानवर और 10 फीसदी मरीजों के आसपास सुअरबाड़े पाए गए। 50 फीसदी मरीज पक्के मकानों में, 32 फीसदी आधे कच्चे और 17 फीसदी मरीज कच्चे मकानों में पाए गए।
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हाथ धोने में भी हो रही लापरवाही

सीएमओ का कहना है कि सीआईएफ के मुताबिक मरीजों के परिवारों में हैंडवॉश का साधन भी अच्छा नहीं पाया गया है। 53 फीसदी मरीजों के परिवार में हाथ धोने के लिए मिट्टी और 13 फीसदी मरीजों के परिवार में राख का इस्तेमाल किया जाता है।

दिमागी बुखार के लक्षण
अचानक तेज बुखार आना, झटके आना, बेहोशी होना, उल्टी होना।
 

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