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डॉ सलीम ने सिद्धार्थनगर में दान दी मंदिर के लिए जमीन

Thu, 11 Aug 2022 11:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 11:12 PM IST
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Dr. Salim donated land for the temple in Siddharthnagar
सलीम अहमद। - फोटो : BASTI
डॉ सलीम ने सिद्धार्थनगर में दान दी मंदिर के लिए जमीन
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बस्ती के गनेशपुर स्टेट खान बहादुर गुलाम हुसैन पिंडारी के पौत्र हैं डॉ. सलीम
डॉ. सलीम कहते हैं कि मेरा धर्म इस्लाम है, मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं
अपने अस्पताल में करते हैं गरीबों का निशुल्क इलाज, 24 घंटे रहता है खुला
बस्ती। जिले के गनेशपुर के स्टेट रहे खान बहादुर गुलाम हुसैन पिंडारी के पौत्र डॉ. सलीम अहमद ने सिद्धार्थनगर जिले के देवभरिया ग्राम में स्थित अपनी पैतृक जमीन से चार बिस्वा भूमि मंदिर के लिए दान दी है। वह अपने अस्पताल में गरीबों का निशुल्क इलाज भी करते हैं। डॉ. सलीम कहते हैं कि मेरा धर्म इस्लाम है, लेकिन मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं।
जानकारी के अनुसार, डॉ. सलीम के पिता सैदा हुसैन पिंडारी व बाबा खान बहादुर गुलाम हुसैन पिंडारी ने भी बस्ती शहर के कटरा मोहल्ले के मुख्य मार्ग पर स्थित मंदिर के लिए करीब चार बिस्वा जमीन वर्ष 1948 में दान दी थी।
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डॉ. सलीम अहमद जिले के प्रसिद्ध सर्जन हैं। वह बताते हैं कि जब वह देवभरिया गांव में गए थे तो अपनी जमीन पर मंदिर का निर्माण देखा। पूछने पर पता चला कि जमीन के निकट रामचरन का मकान था। उन्होंने अपनी जमीन समझ कर उस पर मंदिर बनवा लिया। जब उन्हें पता चला कि जमीन मेरी है, तो उन्हें लगा कि अब जमीन ले ली जाएगी। ऐसे में मंदिर का क्या होगा? इसी समय मेरे मन में मंदिर के लिए जमीन को दान करने का विचार आ गया। उस समय रामचरन को आश्वासन दे दिया। साल 2019 में जमीन रामचरन को बैनामा कर दी, ताकि उस पर मंदिर बना रहे।
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डॉ. सलीम बताते हैं कि उनके पिता सैदा हुसैन ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) में निदेशक थे। उनकी तैनाती देहरादून में थी इसलिए मेरी शिक्षा दीक्षा देहरादून में ही हुई। जुलाई 1953 में जन्मे 69 वर्षीय चिकित्सक सलीम ने मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद में वर्ष 1973 में एमबीबीएस में प्रवेश लिया। यहीं से 1985 में एमएस की डिग्री हासिल की। यहीं से सर्जरी की डिग्री लेने के बाद 1986 में बस्ती आ गए। इसी साल बतौर वरिष्ठ परामर्शदाता जिला चिकित्सालय में नौकरी कर ली।
वर्ष 1989 में अपने पैतृक आवास में चिकित्सालय खोलकर गरीबों का निशुल्क इलाज करने लगे, जोकि अब भी जारी है। गरीबों के लिए अस्पताल 24 घंटे खुला रहता है। डॉ. सलीम को फेलो एसोसिएशन आफ इंडियन सर्जन व विशिष्ट सर्जन एशिया पैसिफिक सम्मान मिल चुका है।

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पिंडारी का इतिहास
पिंडारी स्टेट की स्थापना गनेशपुर में वर्ष 1800 में कादिर बक्स ने की थी। वर्तमान में डॉ. सलीम उनकी छठवीं पीढ़ी हैं। डॉ. सलीम के बाबा खान बहादुर गुलाम हुसैन पिंडारी नवाब के रूप में जाने गए। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान किंग जार्ज पंचम ने चार जून 1928 को गुलाम हुसैन को खान बहादुर के खिताब से नवाजा था।
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