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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड: मुआवजे को लेकर भड़के किसान, निपटारे तक निर्माण नहीं

Fri, 02 Jun 2023 02:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 02 Jun 2023 02:25 PM IST
सार

मुख्यमंत्री की पहल पर शहर के चारों तरफ रिंग रोड तैयार कराई जा रही है। तीन हिस्से में काम हो गया है। अब सिर्फ 26 किलोमीटर का एक पैच जंगल कौड़िया से जगदीशपुर तक ही अधूरा है। इसे एनएचएआई बनाने जा रहा है।

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increase compensation for land for Jungle Kauria Jagdishpur Ring Road
उचित मुआवजे की मांग को लेकर जिला मुख्यालय पर विरोध प्रदर्शन करते किसान आंदोलन संघर्ष समिति के लोग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के लिए एनएचएआई द्वारा अधिगृहित कराई जा रही जमीन के विरोध में क्षेत्र के करीब 200 किसान बृहस्पतिवार की दोपहर चिलचिलाती धूप में तीन घंटे से अधिक समय तक कलेक्ट्रेट में डटे रहे। उनका कहना था कि विभाग सात साल पुराने सर्किल रेट के मुताबिक मुआवजा दे रहा है, जबकि वर्तमान बाजार दर कई गुना अधिक है।

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डीएम की अनुपस्थिति में मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) सुशील कुमार गोंड से उनकी वार्ता हुई। सीआरओ की तरफ से एक कमेटी बनाकर मुआवजे की दर को लेकर फिर से एक बार स्थलीय जांच कराने के आश्वासन पर किसान शांत हुए और लौट गए। किसानों का कहना है कि कमेटी को सात दिन में रिपोर्ट देनी है। तब तक किसी तरह का विरोध-प्रदर्शन नहीं करेंगे। लेकिन, मुआवजे की दर सही नहीं की गई तो वे मुख्यमंत्री से मिलने के साथ ही कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएंगे।
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मुख्यमंत्री की पहल पर शहर के चारों तरफ रिंग रोड तैयार कराई जा रही है। तीन हिस्से में काम हो गया है। अब सिर्फ 26 किलोमीटर का एक पैच जंगल कौड़िया से जगदीशपुर तक ही अधूरा है। इसे एनएचएआई बनाने जा रहा है। इसके लिए जमीन अधिगृहित करने के लिए प्रभावित गांवों की जमीनों को चिह्नित कर नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है।
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मगर क्षेत्र के काश्तकारों, किसानों का कहना है कि एनएचएआई सात साल पुराने सर्किल रेट का जो चार गुना अधिक देने का दावा कर रही है, वह दर भी वर्तमान बाजार दर से काफी कम है। मसलन जिन गांवों की जमीन का आज के समय बाजार दर 1500 से 2000 वर्ग फुट चल रहा है, उसका मुआवजा चार गुना करने के बाद भी 200 से 300 रुपये प्रति वर्ग फुट है।

किसान इसपर लगातार आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि कोई सुनवाई नहीं होने पर उन्हें मजबूर होकर कलेक्ट्रेट में डीएम के पास आना पड़ा। उन्होंने मांगों के संबंध में सीआरओ से वार्ता की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक किसानों का सुबह 10 बजे से ही कलेक्ट्रेट पर जुटना शुरू हो गया था। एक बजे तक किसानों की संख्या काफी अधिक हो गई थी।
 

कमेटी करेगी फिर से स्थलीय सत्यापन, सात दिन में रिपोर्ट देगी

किसानों, काश्तकारों की सीआरओ से हुई बातचीत के बाद तय हुआ कि निबंधन कार्यालय के सब रजिस्ट्रार, एनएचएआई और तहसील के अधिकारियों की एक कमेटी बनाई जाए जो प्रभावित गांवों में जमीन की वर्तमान दर और मुआवजे का स्थलीय सत्यापन कर अध्ययन करेगी और सात दिन में अपनी रिपोर्ट देगी।

किसानों का कहना था कि मुआवजे के मद्देनजर 2013 के अधिनियम का भी उल्लंघन किया गया है जो सर्किल रेट का चार गुना या वर्तमान में प्रचलित दर के बराबर होना चाहिए। सीआरओ ने बताया कि कमेटी यह भी अध्ययन करेगी कि मुआवजा निर्धारण में इस अधिनियम के तहत जारी निर्देशों का उल्लंघन तो नहीं हुआ है।

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26 गांवों की 120 हेक्टेयर जमीन की जानी है अधिगृहित
जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के लिए 26 गांवों की करीब 120 हेक्टेयर जमीन अधिगृहित की जानी है। इन गांवों में मानीराम, ताल जहदा, रहमत नगर, बालापार, बैजनाथपुर, नारायणपुर, बनगाई, सराय गुलरिहा, परसिया, रसूलपुर, सोनराइच, बूढ़ाडीह, बनकटी उर्फ इटहिया, मौलाखोर, बेलवा रायपुर, जंगल औराही, जंगल अहमद अली शाह, महमूदाबाद, बनकटिया खुर्द, कैथवलिया, करमहा, नैयापार खुर्द, रमवापुर, मठिया, सिहोरिया, कोनी शामिल हैं।

बोले प्रभावित किसान व काश्तकार

दर सुधारी नहीं गई तो आंदोलन करेंगे
त्रियंबक उपाध्याय ने कहा कि एनएचएआई और भूमि अघ्याप्ति विभाग ने बिना स्थलीय निरीक्षण, सत्यापन के मुआवजे का निर्धारण कर दिया। वर्तमान बाजार दर से मुआवजे की राशि कई गुना कम है। हम इस दर पर जमीन देने के लिए राजी नहीं होंगे। कमेटी ने भी सही से रिपोर्ट नहीं दी और दर सुधारी नहीं गई तो किसान आंदोलन करेंगे, जरूरत पड़ने मुख्यमंत्री से मिलने के साथ ही कोर्ट भी जाएंगे।

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औने-पौने दाम पर जमीन छीन लेना चाहता है प्रशासन
गुलाब चंद ने कहा कि क्षेत्र के तमाम किसानों के पास आय का एकमात्र जरिया उनकी जमीन ही है। यहीं पर खेती या फिर सब्जी उगाकर उनके परिवार का पालन पोषण होता है। इसे भी एनएचएआई और प्रशासन उनसे औने-पौने दाम पर छीन लेना चाहता है। हम जमीन नहीं देंगे।

वर्तमान बाजार दर काफी अधिक है

हर्षित श्रीवास्तव ने कहा कि क्षेत्र के लोग विकास के खिलाफ नहीं है। हम भी चाहते हैं कि सड़क, पुल और रेल लाइन बिछे लेकिन किस शर्त पर यह भी तो गौर करना जरूरी है। जिम्मेदार मनमाने तरीके से सात साल पुराने सर्किल रेट के मुताबिक जमीन का मुआवजा देना चाहता है जबकि वर्तमान बाजार दर काफी अधिक है।

किसानों और काश्तकारों को बरगला रहे
सुमित कुमार साहनी ने कहा कि सात साल से पुराना सर्किल रेट ही चला आ रहा है जबकि अगल-बगल के सभी जिलों में सर्किल रेट बढ़ा है। इसी पुरानी दर का चार गुना अधिक मुआवजा देने की बात कह जिम्मेदार किसानों और काश्तकारों को बरगलाना चाहते हैं जबकि चार गुना राशि भी वर्तमान बाजार दर से कई गुना अधिक कम है। -

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किसानों को बर्बाद करना चाहता है प्रशासन
विकास पांडेय ने कहा कि मुआवजे की इस दर पर हम किसी भी हाल में जमीन नहीं देंगे भले इसके लिए कितना ही संघर्ष क्यों न करना पड़े। एनएचएआई और एसएलओ कार्यालय मिलकर क्षेत्र के किसानों को बर्बाद करना चाहते हैं। वर्तमान में जिन गांवों की जमीन का दर 1500 से दो हजार रुपये वर्ग फुट चल रहा है, उनका मुआवजा 200 से 300 रुपये वर्ग फुट दिया जा रहा है।

सीआरओ सुशील कुमार गोंड ने कहा कि नियमों के मुताबिक ही मुआवजे की दर निर्धारित की गई है। मगर किसान इसे कम बता रहे हैं। उनका आरोप है कि मुआवजे को लेकर 2013 के अधिनियम को भी नजरअंदाज किया गया है। किसानों की मांग पर कमेटी बनाई जाएगी जिसमें निबंधन, एनएचएआई और तहसील के अधिकारी शामिल रहेंगे। कमेटी स्थलीय निरीक्षण करने के साथ ही पिछले छह महीने में हुए बैनामों के दरों का अध्ययन करेगी और फिर रिपोर्ट देगी। इसके बाद आगे का निर्णय होगा। फिलहाल कमेटी बनाने की संस्तुति डीएम को भेजी जा रही है। शुक्रवार तक कमेटी का गठन हो जाएगा।




 
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