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गोरखपुर: बैंक के अंदर मदद लेना पड़ सकता है भारी, यहां कागज की गड्डी थमाकर 49 हजार लेकर फरार हुआ जालसाज
Tue, 29 Jun 2021 02:38 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 29 Jun 2021 02:38 PM IST
सार
पिपराइच इलाके में बैंक से रुपये निकालकर जा रही महिला हुई जालसाजी का शिकार, केस दर्ज
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
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विस्तार
गोरखपुर जिले के पिपराइच पंजाब नेशनल बैंक से सोमवार को 49 हजार रुपये निकालकर जा रही एक महिला और उसका भाई जालसाजी का शिकार हो गए। दरअसल, जालसाज ने महिला को दो हजार के नोटों की गड्डी थैले में रखने का झांसा देकर, उनके रुपए उड़ा लिए। यही नहीं उसने महिला के भाई के मोबाइल फोन पर भी हाथ साफ कर दिया। घटना की सूचना पर एसपी नार्थ मनोज अवस्थी भी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने जालसाजी का केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है।
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जानकारी के मुताबिक, भटगांवा निवासी सिरजावती अपने भाई के साथ पीएनबी से रुपये निकालने गई थी। बैक में मौजूद एक युवक ने महिला का निकासी फार्म भरा। रुपये निकाल कर महिला अपने घर जाने के लिए ऑटो पकड़ने जा रही थी। बैंक से करीब 200 मीटर दूर विजय चौक पहुंचने पर बैंक में फॉर्म भरने में मदद करने वाले युवक ने महिला के झोले में अपनी दो लाख रुपये की गड्डी रखने का अनुरोध किया।
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युवक ने महिला की मदद की थी, इस वजह से वह उसे मना नहीं कर सकी और दो हजार के नोटों की गड्डी अपने झोले में रख ली। इस बीच युवक ने महिला के भाई से मोबाइल मांगा और किसी से बात करने लगा। इस दौरान, उस युवक ने वहां कुछ ऐसा जाल फैलाया कि महिला और उसका भाई कुछ समझ ही नहीं पाए। जब तक वे कुछ भांप पाते, वह उनकी नजरों से ओझल हो गया।
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वे आश्वस्त थे कि युवक दो लाख रुपए की गड्डी लेने आएगा। करीब आधे घंटे तक युवक का इंतजार करने के बाद उन्होंने थैले में देखा तो 49 हजार रुपए की गड्डी नहीं थी। अलबत्ता, दो हजार के नोटों की गड्डी रखी थी। उन्होंने उसे निकाल कर देखा तो सादे कागजों की गड्डी पर केवल आगे पीछे दो हजार रुपए के नोट चस्पा मिले। तब उन्हें समझ में आया कि वह जालसाजी का शिकार हो चुके हैं।
किसी अपरिचित पर किसी भी हाल में न करें भरोसा
ठगी से बचना है तो एक ही सूत्र है, बैंक के अंदर या बाहर किसी अपरिचित पर किसी भी हाल में भरोसा न करें। बस यही सावधानी हटी तो तय है कि दुर्घटना घटेगी। बैंकों के आसपास ऐसे जालसाज हमेशा शिकार की तलाश में नजर गड़ाए बैठे रहते हैं। बैकों के अंदर ग्राहक बनकर भी ये घात लगाते हैं। जैसे ही उन्हें कम पढ़े लिखे या बुजुर्ग लोग, जो आसानी से अपना फॉर्म आदि नहीं भर पाते, नजर आते हैं, वे अपना जाल बिछा देते हैं।
भरोसे में लेकर वे बैंक के अंदर उनका काम करवाते हैं और जैसे ही बैंक के अंदर या बाहर मौका मिलता है, विभिन्न तरीकों से उन्हें भ्रमित करके उनके रुपयों पर हाथ साफ कर देते हैं। शिकार को भ्रम में डालने के उनके तमाम तरीके हैं। मसलन, इस मामले में जालसाजों ने कागज की गड्डी पर दोनों ओर दो हजार रुपए के नोट लगाकर जिस तरह से खेल किया। कभी जमीन पर पड़े रुपये उनके तो नहीं, इस सवाल से लोगों का ध्यान बंटाकर अपना शिकार बना लेते हैं। ऐसे तरीकों की लंबी फेहस्ति है।
बैंकों को भी हेल्प डेस्क बनानी चाहिए
बुजुर्ग और कम पढ़ें लिखे, ऐसे ग्राहक जो अपना फार्म वगैरह नहीं भर पाते उनके लिए बैंकों को भी हेल्पडेस्क बनानी चाहिए, ताकि इस तरह के ग्राहक जालसाजों के शिकार न बन सकें। बैंककर्मी, बैंक के अंदर आए लोगों से औचक सवाल-जवाब करके ऐसे लोगों को अपना जाल बिछाने से रोक सकते हैं।
भरोसे में लेकर वे बैंक के अंदर उनका काम करवाते हैं और जैसे ही बैंक के अंदर या बाहर मौका मिलता है, विभिन्न तरीकों से उन्हें भ्रमित करके उनके रुपयों पर हाथ साफ कर देते हैं। शिकार को भ्रम में डालने के उनके तमाम तरीके हैं। मसलन, इस मामले में जालसाजों ने कागज की गड्डी पर दोनों ओर दो हजार रुपए के नोट लगाकर जिस तरह से खेल किया। कभी जमीन पर पड़े रुपये उनके तो नहीं, इस सवाल से लोगों का ध्यान बंटाकर अपना शिकार बना लेते हैं। ऐसे तरीकों की लंबी फेहस्ति है।
बैंकों को भी हेल्प डेस्क बनानी चाहिए
बुजुर्ग और कम पढ़ें लिखे, ऐसे ग्राहक जो अपना फार्म वगैरह नहीं भर पाते उनके लिए बैंकों को भी हेल्पडेस्क बनानी चाहिए, ताकि इस तरह के ग्राहक जालसाजों के शिकार न बन सकें। बैंककर्मी, बैंक के अंदर आए लोगों से औचक सवाल-जवाब करके ऐसे लोगों को अपना जाल बिछाने से रोक सकते हैं।