जिस पंचायत ने नवविवाहित दंपती को गांव से निकालने का सुनाया था फरमान, अब खुद भुगतेंगे ये सजा
- पुलिस ने पंचायत में शामिल जिला पंचायत सदस्य, बीडीसी सहित छह लोगों को पाबंद किया
- गुलरिहा इलाके में नवविवाहित की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस ने ली
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अंतरजातीय विवाह करने पर युवक-युवती को गांव छोड़ने का फरमान सुनाने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला पंयायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) सहित पंचायत में शामिल छह लोगों को पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 107/ 116 के तहत पाबंद किया है।
इन्हें बड़ी रकम का मुचलका भी भरना होगा। अंतरजातीय विवाह करने वाले दंपती ने अपने घर में रहना शुरू कर दिया है। हल्का सिपाहियों को उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है।
जानकारी के मुताबिक, गुलरिहा इलाके के चक्खान मोहम्मद गांव की पूजा और गोविंद एक-दूसरे से प्रेम करते थे। दोनों अलग-अलग जाति के हैं। सात माह पहले दोनों घर से भाग गए थे और फिर भटहट चौकी में पुलिस ने दोनों की शादी करा दी थी।
पुलिस से मांगी से थी मदद
बताते हैं कि गोविंद और पूजा की शादी से गांव के लोग खुश नहीं थे। खासकर पूजा की बिरादरी के लोग इसे अपनी बेइज्जती मान रहे थे। इसको लेकर गोविंद के परिवार वालों से उनका बार-बार विवाद होने लगा। बाद में इसको लेकर चार जून को गांव में पंचायत बुलाई गई।
पंचायत ने दंपती को गांव छोड़ने का फरमान सुना दिया। इतना नहीं पंचायत ने इसके लिए बाकायदा लिखित आदेश जारी किया। इससे परेशान पति-पत्नी ने भटहट पुलिस चौकी पर पहुंचकर सुरक्षा की गुहार लगाई थी।
मामला संज्ञान में आने के बाद एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने कार्रवाई की और गांव छोड़ने का फरमान सुनने वाले जिला पंचायत सदस्य जयकरन यादव और बीडीसी सदस्य मिथुन निषाद सहित छह को पाबंद कर दिया।
पाबंद किए गए लोगों को मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर बड़ी राशि का मुचलका भरना होगा। इसके बाद कम से कम छह माह तक निर्धारित तिथि पर मजिस्ट्रेट के सामने उपस्थित होकर हाजिरी लगानी होगी। साथ ही पुलिस भी नियमित नजर रखेगी।