Crime News: दुष्कर्म का केस दर्ज करा उगाही करने वाले गिरोह पर होगा केस, एसएसपी बोले- सभी पर होगी कार्रवाई
एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले का फर्जी केस दर्ज कराना गंभीर है। पूरे मामले की जांच सीओ कैंट और बांसगांव को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट आ गई है। अवलोकन के बाद इसमें केस दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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गोरखपुर जिले में दुष्कर्म का केस दर्ज कराकर पीड़ितों से रुपये ऐंठने वाली महिलाओं के गिरोह पर एफआईआर दर्ज होगी। सीओ कैंट के बाद सीओ बांसगांव ने भी जांच में गिरोह के पेशेवर होने की पुष्टि करते हुए मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति कर दी है।
इतना ही नहीं, महिलाओं के गिरोह की मुखिया ने अपनी जिस बहन से केस दर्ज कराया है, उसने तीन मुकदमों में अलग-अलग पते दिए हैं। जांच रिपोर्ट एसएसपी डॉ. विपिन ताडा के पास पहुंच गई है। उन्होंने सभी जांच रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कड़ी कार्रवाई की बात कही है। उधर, सीओ बांसगांव ने भी एक अधिवक्ता को सरगना बताया है।
जानकारी के मुताबिक, दुष्कर्म के आरोप में जेल जाने और मामले से बाइज्जत बरी होने वाले कैंपियरगंज के खालिद ने मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर सक्रिय गिरोह की जानकारी दी थी। साथ ही जांच करके आरोपी महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी थी। इस मामले की जानकारी एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा को मिली।
अलग-अलग क्षेत्र के थानों में केस दर्ज होने की वजह से एसएसपी ने पूरे मामले की जांच सीओ कैंट और सीओ बांसगांव को सौंपी थी। सीओ बांसगांव ने भी गहनता से जांच की और रिपोर्ट एसएसपी को दे दी है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 11 आपराधिक केस में चार महिलाएं शामिल हैं। इन मामलों में अलग-अलग आरोपी दिखाए गए हैं, जबकि वादिनी मात्र चार ही हैं। जिन मामलों में न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज हुए हैं, उसमें एक ही अधिवक्ता की भूमिका सामने आई है।
आरोप है कि सभी महिलाएं एक ही गिरोह की हैं और इस तरह के आपराधिक मुकदमों में फंसाने के लिए न्यायालय का सहारा लेकर लोगों के खिलाफ केस दर्ज करा रही हैं। सीओ ने रिपोर्ट में अधिवक्ता का नाम लिखा है। जांच में रिपोर्ट में कहा गया है कि हर मामले में अधिवक्ता की मुख्य भूमिका मिली है।
एफआर लगाने वाले दरोगा ने दिया शपथ पत्र
महिला ने 2016 के दौरान ही कैंपियरगंज थाने में तीन लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। मामले में आरोपी पहले जेल भेजे गए, फिर पुलिस ने मामले की गहनता से जांच की। अफसरों के आदेश पर हुई जांच में पुलिस ने पाया कि मामला पूरी तरह से फर्जी है। विवेचक ने मामले में फाइल रिपोर्ट लगा दी।
महिला को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, उसने फिर विवेचक रहे दरोगा पर ही लूट, बलवा, धमकी देने का केस दर्ज करा दिया। इस बार उसका आरोप था कि केस के जांच के दौरान दरोगा ने उससे रुपये छीन लिए और धमकी दी। दरोगा ने सीओ बांसगांव को दिए शपथ पत्र में महिला को पेशेवर और अधिवक्ता को संरक्षक बताया है।
फर्जी केस कर ली चार लाख का सरकारी मदद
सीओ बांसगांव की जांच में सामने आया है कि एक मामले में न्यायालय के आदेश पर दर्ज केस में सरकारी मदद के चार लाख रुपये महिला ने ले लिए। इस मुकदमे में भी अधिवक्ता वही है। जबकि, इस केस की जांच कर विवेचक ने एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी।
एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले का फर्जी केस दर्ज कराना गंभीर है। पूरे मामले की जांच सीओ कैंट और बांसगांव को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट आ गई है। अवलोकन के बाद इसमें केस दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।