Exclusive: अनजानी फ्रेंड रिक्वेस्ट का जाल आपको कर सकता है 'हलाल', ऐसे हो रहे हैं लोग शिकार
गोरखपुर मंडल में ब्लैकमेलिंग के अभी तक आ चुके हैं 110 मामले, शहर के वकील, व्यापारी, पुलिसकर्मी, इंजीनियर, विश्वविद्यालय के बड़े छात्र नेता सहित अन्य लोगों को बनाया है शिकार।
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सोशल मीडिया पर किसी अनजाने से दोस्ती, संवाद और फिर ‘कुछ भी बातचीत’। ऐसी बातचीत आपको किसी बड़ी मुसीबत में फंसा सकती है। गोरखपुर मंडल में पिछले कुछ महीनों के अंदर 110 लोग ऐसी ही ‘बातचीत’ का शिकार बने हैं। इनमें शहर के वकील, व्यापारी, पुलिसकर्मी, इंजीनियर, विश्वविद्यालय के बड़े छात्र नेता तक शामिल हैं। ये लोग ‘कुछ भी बातचीत’ को आम न करने के लिए साइबर ब्लैकमेलर्स को लाखों रुपये दे चुके हैं और अब उनसे निजात पाने के लिए साइबर सेल की शरण में हैं।
साइबर ब्लैकमेलर्स के अपराध करने के तरीके की जानकारी साइबर सेल को मिली है, उसके मुताबिक गैंग के सदस्यों की ओर से लोगों को इंस्टाग्राम या फेसबुक जैसी सोशल मीडिया पर पहले फेक आईडी से फ्रेंड रिक्वेस्ट (दोस्ती अनुरोध) भेजी जाती है। इसे स्वीकार करने के बाद उनसे व्हाट्सएप नंबर मांगा जाता है। नंबर देने के साथ ही पहले सामान्य चैट से संवाद शुरू होता है और फिर बाद में पोर्न क्लिपिंग के माध्यम से वीडियो चैट होती है।
इन दिनों साइबर अपराध थाने का प्रभार देख रहे एसआई उपेंद्र सिंह ने बताया कि साइबर ब्लैकमेलर वीडियो कॉलिंग के दौरान एक दूसरे मोबाइल में 25 से 30 सेकेंड का पोर्न वीडियो चलाकर चैट करने वाले के मोबाइल के सामने रख देते और फिर इसे रिकॉर्ड कर लेते हैं। मोबाइल में रिकॉर्ड वीडियो में ऐसा लगता कि जैसे दूसरी ओर से वीडियो चैट कर रहा शख्स किसी लड़की के साथ आपत्तिजनक स्थिति में है।
लिहाजा इधर से बातचीत कर रहा व्यक्ति भी भावावेश में आपत्तिजनक बातचीत करने लगता है। बातचीत के इस वीडियो को ब्लैकमेलर रिकार्ड कर लेते हैं। इसके बाद ये ब्लैकमेलर अश्लील वीडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड कर बदनाम करने की धमकी देकर उगाही करते हैं।
इससे बचने के लिए पीड़ित रकम देने के लिए तैयार हो जाते हैं। जब पानी सिर से गुजर जाता है तब वे साइबर सेल की शरण में जाते हैं। वे कहते हैं कि सभी चैट डार्क वेबसाइट से होते हैं। ऐसे में उन्हें ट्रेस कर पाना भी आसान नहीं है। साइबर सेल के पास आए मामलों की जांच चल रही।
एक हजार रुपये से करते हैं शुरुआत
ऐसे मामलों की जांच रिकॉर्ड के मुताबिक यह गिरोह बेहद व्यवस्थित तरीके से अपराध को अंजाम देता है। शुरू में एक हजार रुपये मांगते हैं, नहीं देने पर रिकॉर्ड अश्लील चैट वायरल करने की धमकी देते हैं। अगर रकम मिल गई तो इसके बाद फिर सीधे 10 हजार रुपये की मांग करते हैं। रकम के लिए वे सिलसिलेवार अभियान चलाते हैं। इतना ही नहीं कुछ दिन बाद खुद को साइबर सेल का अधिकारी बताकर लड़की की तरफ से शिकायत दर्ज कराने का भय दिखाते हैं। इस सिलसिले को खत्म करने के नाम पर वे मोटी रकम की डिमांड करते हैं।
लॉकडाउन में बनाया शिकार
कोरोना के बीच लॉकडाउन में लोगों ने खुद को आइसोलेट होने, अकेलेपन की तकलीफ बताने वाले जुमलों के स्टेटस फेसबुक या इंस्टाग्राम पर डाल दिए थे। गैंग के लोगों ने खासतौर पर ऐसे लोगों को ही निशाना बनाया है। किससे कितनी वसूली करनी है, साइबर ब्लैकमेलर इसको लेकर भी सोशल मीडिया पर आपके पेज को देखकर अंदाजा लगाते हैं।
साइबर सेल की सलाह
एसपी साइबर क्राइम त्रिवेणी सिंह बताते हैं कि ब्लैकमेलिंग का यह नया ट्रेंड सामने आया है। प्रदेश में ऐसी कई शिकायतों की जांच चल रही है। 50 से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इस तरह की ब्लैकमेलिंग से बचने के लिए किसी भी अंजान आईडी से आने वाले फ्रेंड रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें। इसके अलावा अंजान युवक या युवती से किसी प्रकार की आपत्तिजनक चैट या वीडियो कॉल न करें। अगर कोई इस ट्रैप(जाल) में फंस जाए तो धैर्य रखें। हड़बड़ी या जल्दबाजी में कोई गलती न करें। उन्हें अपना व्हाट्सएप नंबर तत्काल बंद कर देना चाहिए। इसके अलावा संभव हो तो अपना फोन भी बंद कर दें। फेसबुक और इंस्टाग्राम की आईडी को भी लॉगआउट कर दें। चूंकि, ऐसे ब्लैकमेलर डार्क नेट की वेबसाइट पर काम करते हैं। किसी भी खाताधारक से उनकी निजी दुश्मनी नहीं होती। आईडी बंद होने के बाद तत्काल डार्क नेट दूसरे शिकार की तलाश शुरू कर देते हैं। अगर इन सब सावधानियों के बाद भी ट्रैप हो जाते हैं तो बिना संकोच तत्काल इसकी शिकायत साइबर अपराध थाने में करें।
यहां मौजूद है उदाहरण
केस 1
गीता प्रेस इलाके के एक बड़े दवा व्यापारी के पास कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक अनजान की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। उसे स्वीकार करने के बाद दूसरी तरफ से मैसेंजर पर उनका व्हाट्सपर नंबर मांगा गया। नंबर देने के बाद उनसे वीडियो चैट के माध्यम से संवाद स्थापित हुआ। इसके बाद आपत्तिजनक चैट को रिकार्ड कर लिया गया। अभी तक गैंग ने उनसे 70 हजार रुपये लिए हैं। खुद को इस गिरोह के जाल में फंसता देख उन्होंने साइबर सेल में इसकी शिकायत की है।
केस 2
देवरिया के एक बड़े इंजीनियर भी गैंग के जाल में फंस गए हैं। कोरोना के बीच में घर पर ही आइसोलेट थे। ऐसे में उन्होंने भी फेसबुक के माध्यम से एक अंजान युवती से दोस्ती की। इसके बाद उनसे भी मैसेंजर पर बातचीत शुरू हो गई। उन्होंने भी अपना व्हाट्सएप नंबर गैंग के सदस्य को चैट के दौरान दे दिया। इसके बाद उसने भी आपत्तिजनक चैट और वीडियो के आधार पर अभी तक 91 हजार रुपये वसूल लिए। उन्होंने भी खुद को घिरता देखकर इसकी शिकायत साइबर सेल में की है।