कोर्ट का आदेश: कारोबारी रणधीर सिंह की कुर्क संपत्तियां करें वापस, जिला मजिस्ट्रेट की कार्रवाई को बताया मनमाना
कारोबारी रणधीर सिंह ने कहा कि कोर्ट से न्याय मिला है। प्रशासनिक कार्रवाई एकतरफा की गई थी। छवि साफ-सुथरी है। गैंगस्टर नहीं हूं। साजिशन फंसाया गया है।
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गोरखपुर शहर के प्रमुख कारोबारी रणधीर सिंह की कुर्क संपत्तियों को विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट ने वापस करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने रणधीर सिंह से प्राप्त पत्रावलियों की जांच और सबूतों के आधार पर बृहस्पतिवार को फैसला सुनाया है। उधर, डीएम का कहना है कि कोर्ट के आदेशों का अध्ययन किया जा रहा है।
कोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट की कार्रवाई को मनमाना बताया है। अपने आदेश में कोर्ट ने जिक्र किया है कि मजिस्ट्रेट ने गैंगस्टर का मामला लंबित होने के बावजूद अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर कुर्की का आदेश दिया। निर्णय में कोर्ट ने उल्लेखित किया है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान रणधीर सिंह ने आपत्ति दर्ज कराई थी, इसके बाद से कार्रवाई की गई।
कोर्ट के आदेश के मुताबिक, कारोबारी रणधीर सिंह की शाहपुर के एचएन सिंह चौराहे के पास रुद्रा होटल, मैरिज हाल, जमीन और महादेव, सिक्टौर में जमीन को डीएम के आदेश पर 27 अप्रैल 2021 से तीन दिसंबर 2022 के बीच कुर्क किया गया था। प्रशासन ने कार्रवाई गैंगस्टर एक्ट के 14(1) के तहत की थी।
बताया गया था कि रणधीर सिंह ने 2015 में अपराध कारित करना शुरू किया और सक्रिय रहते हुए निरंतर अपराध में लिप्त है। प्राथमिक अपराध के समय से ही रणधीर संपत्तियां अपने व परिजनों के नाम से क्रय कर उपयोग किया करते हैं। इसी आधार पर प्रशासन ने ग्राम महादेव, सिक्टौर, शाहपुर में संपत्तियों को कुर्क कर दिया। 27 अप्रैल 2021 को रणधीर सिंह ने आपत्ति दाखिल कर आदेश पारित करने की याचना की थी।
इस पर जिला मजिस्ट्रेट ने प्रश्तगत आदेश 3 दिसंबर 2021 को पारित करते हुए गैंगस्टर एक्ट 1886 की धारा 15(2) में निहित अधिकारों के तहत संपत्तियों के ज्ञात स्रोत के संबंध में कोई पुष्टीकरण साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने को आधार बताते हुए दिव्यनगर कॉलोनी के मकान, जमीन को जब्त करने का आदेश दिया। इसी आदेश पर कार्रवाई हुई थी।
गैंगस्टर के लिए आधार बनाए गए दोनों मुकदमों का औचित्य नहीं
रणधीर सिंह पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई करने के लिए दो मुकदमों को आधार बनाया गया था। पहला अपराध संख्या 14/2015 थाना शाहपुर। न्यायालय में प्रेषित अंतिम रिपोर्ट के अवलोकन से पता चला कि प्रश्नगत मुकदमा धारा 147,148,427,506 में दर्ज न होकर धारा 135 भारतीय विद्युत अधिनियम के अपराध से संबंधित है, जिसमें अभियुक्त के रूप में अंजनी श्रीवास्तव का नाम अंकित है, उक्त मुकदमे से रणधीर सिंह का कोई वास्ता नहीं है। मामले के बाद विवेचना पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट न्यायालय में प्रेषित की और उक्त मामले के आधार पर गैंगचार्ट गलत रूप से किया गया।
दूसरा मामला अपराध संख्या 501/2017 में धारा 420, 467, 468, 471 में 18 जनवरी 2020 में आरोपपत्र दाखिल किया गया। इस मामले में रणधीर सिंह की ओर से दाखिल किए गए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की प्रति के अवलोकन से स्पष्ट है कि उक्त मुकदमे के आरोपपत्र एवं पूरी प्रक्रिया को प्रार्थीगण ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। उक्त मुकदमे की पूरी प्रक्रिया को क्रिमिनल अपील संख्या 932/2021 में पारित आदेश द्वारा निरस्त कर दिया गया। इस प्रकार रणधीर सिंह के खिलाफ गैंगचार्ट में वर्णित दो मुकदमे का अस्तित्व वर्तमान में नहीं है।
डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि कोर्ट के आदेश का अवलोकन किया जा रहा है। आदेश के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। रणधीर सिंह की तरफ से प्रत्यावेदन दिया गया है।
कारोबारी रणधीर सिंह ने कहा कि कोर्ट से न्याय मिला है। प्रशासनिक कार्रवाई एकतरफा की गई थी। छवि साफ-सुथरी है। गैंगस्टर नहीं हूं। साजिशन फंसाया गया है।