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सर्दी और प्रदूषण के बीच ज्यादा घातक होगा कोरोना, डॉक्टर बोले, फेफड़ों पर पड़ सकती है दोहरी मार

Mon, 02 Nov 2020 11:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा नीरज मिश्र, गोरखपुर
नीरज मिश्र, गोरखपुर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 02 Nov 2020 11:35 AM IST
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Corona will be more deadly between winter and pollution
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिवाली के दौरान ज्यादा प्रदूषण और बढ़ती ठंड के बीच कोरोना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। ऐसे लोग जो कोरोना से जंग जीत चुके हैं उन्हें ज्यादा एहतियात बरतने की जरूरत है। डॉक्टरों का मानना है कि जिनके फेफड़े कोरोना से प्रभावित हुए हैं, उन पर दोहरा वार हो सकता है। ऐसे में कोविड से मौतें भी बढ़ सकती हैं। बचाव के लिए डॉक्टर मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक वैक्सीन नहीं, तब तक मास्क को ही कोरोना की सबसे बड़ी दवाई समझें।

Corona will be more deadly between winter and pollution
डॉ. अश्वनी मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला।
दिवाली के बाद कोरोना के दूसरी लहर की आशंका 
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा के मुताबिक वायरस का हवा में ज्यादा देर ठहरने का मतलब ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में दिवाली के बाद कोरोना के दूसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। पहले से कोरोना की चपेट में आ चुके लोगों के लिए यह ज्यादा खतरनाक साबित होगा। खासकर ऐसे लोगों को ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है जिनके फेफड़ों पर वायरस का ज्यादा असर हुआ है। बताया कि जिले में करीब 70 प्रतिशत से अधिक लोग है, जिनके फेफड़ें पर कोरोना का असर हुआ है। इसके अलावा सांस के मरीजों को भी दोबारा संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है।
Corona will be more deadly between winter and pollution
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Amar Ujala
आईसीएमआर जारी कर चुका है निर्देश 
आईसीएमआर के प्लानिंग कोर्डिनेटर व आरएमआरसी के निदेशक डॉ. रजनीकांत ने बताया कि अधिक समय तक वायु प्रदूषण का सामना करने से कोरोना से मौत के मामले बढ़ सकते हैं। अमेरिका, यूरोप जैसे देशों में इस पर शोध हुए है। ऐसे में कोरोना से बचाव के सभी दिशा निर्देशों का पालन ही एकमात्र विकल्प है। 
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Corona will be more deadly between winter and pollution
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
तापमान गिरने के साथ बढ़ेगी समस्या 
शहर का मौजूदा वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 है। मानकों के अनुसार सेहतमंद हवा का एक्सयूआई 50 होना चाहिए। जैसे-जैसे तापमान में गिरावट आएगी वैसे-वैसे प्रदूषण का स्तर और बढ़ेगा। इससे हवा जहरीली होगी। प्रदूषण बढ़ने के कारण धूल के कण कम ऊंचाई पर आ जाएंगे। इसकी वजह से वायरस ज्यादा देर तक ठहरेगा। अभी शहर का न्यूनतम तापमान 22 डिग्री के आसपास है। दिवाली तक जैसे-जैसे तापमान गिरेगा, हवा का फैलाव कम होगा। इसके चलते भी वायरस का असर बढ़ सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
50 प्रतिशत मरीजों के फेफड़ों में बन रहा पैच
डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना का असर फेफड़ों पर ज्यादा होता है। करीब 50 प्रतिशत मरीजों के ठीक होने के बाद भी फेफड़ों में पैच दिख रहे हैं। कुछ मरीजों में पल्मोनरी फ्राइब्रोसिस की समस्या है। इससे फेफड़ों का एक हिस्सा काम नहीं करता है। मरीजों को जल्दी-जल्दी सांस लेनी पड़ती है। ऐसे मरीजों को ठंड और प्रदूषण दोनों से बचने की जरूरत है।
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