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कोरोना की काली छाया: कोरोना कर्फ्यू से लगन के व्यापार की उड़ी रंगत, कारीगरों को तनख्वाह देना भी मुश्किल
Fri, 14 May 2021 02:06 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 14 May 2021 02:06 PM IST
सार
कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार भी शादी-ब्याह के बाजार पर काफी खराब असर पड़ा है। बैंड, डीजे और कैटरिंग व्यवसाय पर ज्यादा असर। फर्नीचर के सामानों की बुकिंग इस बार भीं नहीं हो सकी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार भी शादी-ब्याह के बाजार पर काफी खराब असर पड़ा है। अप्रैल से ही लगन शुरू है, लेकिन कोरोना कर्फ्यू के चलते अधिकांश शादियां टल गईं। इसका असर तो लगभग सभी व्यवसायों पर पड़ा है लेकिन कपड़ा, बैंड, डीजे और कैटरिंग, फर्नीचर समेत कुछ अन्य व्यवसाय ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
फर्नीचर : कारीगरों को तनख्वाह देना मुश्किल
शहर में तीन सौ छोटे-बड़े व्यवसायी फर्नीचर के कारोबार से जुड़े हैं। फर्नीचर व्यवसायी राम रतन विश्वकर्मा ने बताया कि लगन को देखते हुए फरवरी-मार्च में ही फर्नीचर का सामान मंगवा लिया था, लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह से दुकानों के बंद होने कारण ज्यादा बिक्री नहीं हो सकी। अप्रैल में तब भी कुछ बिक्री हुई, लेकिन इधर कारोबार एकदम ठप है। कारीगरों को तनख्वाह देना मुश्किल हो गया है।
कपड़ा व्यवसाय : इस बार स्थिति और बदतर
कोरोना ने इस बार भी कपड़ा व्यवसाय को पूरी तरह से चौपट कर दिया है। पहली लहर के बाद स्थिति सुधरी तो दुकानदारों ने लगन को देखते हुए स्टॉक जमा कर लिया था। लेकिन इस बार स्थिति और बदतर हो गई। थोक वस्त्र व्यवसायी वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष राजेश नेभानी ने बताया कि इस बार भी लगन में मात्र अप्रैल और मई में करीब ढाई सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस माह ईद भी है। इन मौकों पर गोरखपुर के अलावा आसपास के जिलों में भी यहां से माल जाता था।
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फर्नीचर : कारीगरों को तनख्वाह देना मुश्किल
शहर में तीन सौ छोटे-बड़े व्यवसायी फर्नीचर के कारोबार से जुड़े हैं। फर्नीचर व्यवसायी राम रतन विश्वकर्मा ने बताया कि लगन को देखते हुए फरवरी-मार्च में ही फर्नीचर का सामान मंगवा लिया था, लेकिन मार्च के अंतिम सप्ताह से दुकानों के बंद होने कारण ज्यादा बिक्री नहीं हो सकी। अप्रैल में तब भी कुछ बिक्री हुई, लेकिन इधर कारोबार एकदम ठप है। कारीगरों को तनख्वाह देना मुश्किल हो गया है।
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कपड़ा व्यवसाय : इस बार स्थिति और बदतर
कोरोना ने इस बार भी कपड़ा व्यवसाय को पूरी तरह से चौपट कर दिया है। पहली लहर के बाद स्थिति सुधरी तो दुकानदारों ने लगन को देखते हुए स्टॉक जमा कर लिया था। लेकिन इस बार स्थिति और बदतर हो गई। थोक वस्त्र व्यवसायी वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष राजेश नेभानी ने बताया कि इस बार भी लगन में मात्र अप्रैल और मई में करीब ढाई सौ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। इस माह ईद भी है। इन मौकों पर गोरखपुर के अलावा आसपास के जिलों में भी यहां से माल जाता था।
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मेकअप-सलून का बाजार भी ठप
लैक्मे सलून की निदेशक अनीता अग्रवाल ने बताया कि शादियों के बीच में ही कोरोना कर्फ्यू होने से दुल्हन के श्रृंगार का काम पूरी तरह बंद है। पहले से जिनकी बुकिंग थी, उनके घर जाकर ही स्टॉफ पूरे कोविड प्रोटोकाल के तहत मेकअप कर रही हैं। कई बुकिंग रद भी करनी पड़ी।
डीजे, कैटरिंग : ज्यादातर बुकिंग रद्द
कैटरिंग का काम करने वाले अतुल ने बताया कि इस बार लगभग 17 बुकिंग कैंसिल कर दी गई है। इसके अलावा जहां दो हजार लोगों की बुकिंग थी, अब सौ से डेढ़ सौ लोगों की बुकिंग के हिसाब से कैटरिंग का काम करना पड़ा। डीजे का काम करने वाले अलहदादपुर के विनय ने बताया कि इस बार सभी बुकिंग कैंसिल हो गई।
डीजे, कैटरिंग : ज्यादातर बुकिंग रद्द
कैटरिंग का काम करने वाले अतुल ने बताया कि इस बार लगभग 17 बुकिंग कैंसिल कर दी गई है। इसके अलावा जहां दो हजार लोगों की बुकिंग थी, अब सौ से डेढ़ सौ लोगों की बुकिंग के हिसाब से कैटरिंग का काम करना पड़ा। डीजे का काम करने वाले अलहदादपुर के विनय ने बताया कि इस बार सभी बुकिंग कैंसिल हो गई।