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महराजगंज: कांग्रेस ने तीन सीटों पर घोषित किया प्रत्याशी, दो सीटो पर संस्पेंस बरकरार
Thu, 13 Jan 2022 05:17 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 13 Jan 2022 05:17 PM IST
सार
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने बताया कि पार्टी प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए सभी कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से जुटे हैं। सभी विधानसभा पर मजबूती के साथ चुनाव लड़ा जाएगा।
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कांग्रेस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
महराजगंज जिले में कांग्रेस पार्टी ने तीन विधान सभा क्षेत्रो में अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। दो सीटो पर अभी संस्पेंस है। वह भी जल्दी घोषित होने की संभावना है। सबसे पहले पार्टी ने उम्मीदवार घोषित कर अपनी तैयारी तेज कर दी है। सदर, पनियरा एवं फरेंदा से प्रत्याशी की घोषणा हुआ है। इन तीनो विधान सभा में बीते चुनाव में कांग्रेस की स्थिति फरेंदा सबसे बेहतर रही।
सदर विधान क्षेत्र के लिए कांग्रेस ने अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष आलोक प्रसाद पर भरोस जताया है। पार्टी ने उनपर तीसरी बार भरोसा जताया है। सदर सीट ज्यादातर भाजपा के कब्जे में रही। इस सीट से भाजपा के स्व. चंद्र किशोरी तीन बार विधायक रहे। वर्ष 1991 राम पियारे आजाद भारतीय जनता पार्टी, 1993-चंद्र किशोर-भारतीय जनता पार्टी, 1996-चंद्र किशोर-भारतीय जनता पार्टी, 2002-चंद्र किशोर-भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीते।
यहां भाजपा का कब्जा रहा। लेकिन भाजपा के किले को तोड़ते हुए 2007 श्रीपति समाजवादी पार्टी एवं 2012 सुदामा समाजवादी पार्टी से विजयी हुए। इसके बाद फिर भाजपा ने वापसी की। 2017 जयमंगल कन्नौजिया भारतीय जनता पार्टी से विजयी हुए। जयमंगल कन्नौजिया को 1,25154 मत मिले थे। निकटतम प्रतिद्वंदी निर्मेश मंगल बसपा के 56793 मत मिले। भाजपा को 68,361 मतों से जीत मिली थी। कांग्रेस प्रत्याशी आलोक प्रसाद को 50,217 मत मिले थे।
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फरेंदा विधान सभा से कांग्रेस ने छठवीं बार वीरेंद्र चौधरी पर भरोसा किया है। हर बार यह कडी टक्कर में रहे। इस बार पार्टी ने इनको फिर से चुनाव मैदान में उतारा है। फरेंदा विधान सभा में आजादी के बाद से 1952 से लेकर 1967 तक कांग्रेस के गौरीराम गुप्ता ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1969 के चुनाव में महिला पियारी देवी ने निर्दलीय जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1974 में सीपीआई के लक्ष्मीनरायन पांडेय विधायक बन गए।
1977 में सीपीआई से श्यामनरायन तिवारी ने क्षेत्र में कदम रखा और उन्हें जीत मिली। 1980 में फिर श्यामनरायन ने जीत दर्ज की। जनता पार्टी से 1985 में हर्षवर्धन सिंह ने पहली जीत दर्ज की थी। 1989 व 1991 में कांग्रेस के टिकट पर फिर श्याम नारायण तिवारी जीते। 1993 में भाजपा ने चौधरी शिवेंद्र ने सीपीएम के विनोद तिवारी को मात्र 50 मतों से हराया था।
1996 के विधान सभा चुनाव में सीपीएम-सपा से विनोद तिवारी को जीत मिली थी। 2002 के चुनाव में कांग्रेस ने श्याम नारायण जीत गए। 2007 व 2012 के चुनाव में भाजपा ने बजरंग बहादुर सिंह को टिकट दिया और जीत मिली। वर्ष 2017 के चुनाव में बजरंग बहादुर सिंह तीसरी बार 76312 मत पाकर निर्वाचित हुए। वहीं कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को 73958 मत मिला। बीएसपी के बेचन को 35765 मत मिले थे।
पनियरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार शरदेंदू पांडेय चुनाव मैदान में उतरे हैं। पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ता शरदेंदू पांडेय के पास संगठन में कार्य करने का अनुभव है। पनियरा विधान सभा में भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह इस सीट से चार बार से विधायक हैं। यहां से वर्ष 2017 में ज्ञानेंद्र सिंह 119308 मत पाए थे। वहीं बीएसपी के गणेश पांडेय 51817 मत पाए थे। वर्ष 2017 के पहले यह श्यामदेउरवां विधान सभा के नाम से जाना जाता था।
ज्ञानेंद्र सिंह वर्ष 1991, 1996 एवं 2002 में चुनाव जीते। यह विधान सभा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बीरबहादुर सिंह का गढ़ माना जाता था। वह यहां से 1967,1969,1974 -वीर बहादुर सिंह-इंडियन नेशनल कांग्रेस से चुनाव जीते थे। 1980- 1985-वीरबहादुर सिंह-इंडियन नेशनल कांग्रेस जीते थे। इस क्षेत्र में उनका खास दबदबा था। वर्ष 2017 में भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह को 119308 मत मिले थे। जबकि बीएसपी के गणेश शंकर पांडेय को 51817 मिले मत थे। वहीं कांग्रेस की तलत अजीज को 48004 मिले थे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने बताया कि पार्टी प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए सभी कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से जुटे हैं। सभी विधानसभा पर मजबूती के साथ चुनाव लड़ा जाएगा।
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सदर विधान क्षेत्र के लिए कांग्रेस ने अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष आलोक प्रसाद पर भरोस जताया है। पार्टी ने उनपर तीसरी बार भरोसा जताया है। सदर सीट ज्यादातर भाजपा के कब्जे में रही। इस सीट से भाजपा के स्व. चंद्र किशोरी तीन बार विधायक रहे। वर्ष 1991 राम पियारे आजाद भारतीय जनता पार्टी, 1993-चंद्र किशोर-भारतीय जनता पार्टी, 1996-चंद्र किशोर-भारतीय जनता पार्टी, 2002-चंद्र किशोर-भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीते।
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यहां भाजपा का कब्जा रहा। लेकिन भाजपा के किले को तोड़ते हुए 2007 श्रीपति समाजवादी पार्टी एवं 2012 सुदामा समाजवादी पार्टी से विजयी हुए। इसके बाद फिर भाजपा ने वापसी की। 2017 जयमंगल कन्नौजिया भारतीय जनता पार्टी से विजयी हुए। जयमंगल कन्नौजिया को 1,25154 मत मिले थे। निकटतम प्रतिद्वंदी निर्मेश मंगल बसपा के 56793 मत मिले। भाजपा को 68,361 मतों से जीत मिली थी। कांग्रेस प्रत्याशी आलोक प्रसाद को 50,217 मत मिले थे।
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फरेंदा विधान सभा से कांग्रेस ने छठवीं बार वीरेंद्र चौधरी पर भरोसा किया है। हर बार यह कडी टक्कर में रहे। इस बार पार्टी ने इनको फिर से चुनाव मैदान में उतारा है। फरेंदा विधान सभा में आजादी के बाद से 1952 से लेकर 1967 तक कांग्रेस के गौरीराम गुप्ता ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 1969 के चुनाव में महिला पियारी देवी ने निर्दलीय जीत दर्ज की थी। उसके बाद 1974 में सीपीआई के लक्ष्मीनरायन पांडेय विधायक बन गए।
1977 में सीपीआई से श्यामनरायन तिवारी ने क्षेत्र में कदम रखा और उन्हें जीत मिली। 1980 में फिर श्यामनरायन ने जीत दर्ज की। जनता पार्टी से 1985 में हर्षवर्धन सिंह ने पहली जीत दर्ज की थी। 1989 व 1991 में कांग्रेस के टिकट पर फिर श्याम नारायण तिवारी जीते। 1993 में भाजपा ने चौधरी शिवेंद्र ने सीपीएम के विनोद तिवारी को मात्र 50 मतों से हराया था।
1996 के विधान सभा चुनाव में सीपीएम-सपा से विनोद तिवारी को जीत मिली थी। 2002 के चुनाव में कांग्रेस ने श्याम नारायण जीत गए। 2007 व 2012 के चुनाव में भाजपा ने बजरंग बहादुर सिंह को टिकट दिया और जीत मिली। वर्ष 2017 के चुनाव में बजरंग बहादुर सिंह तीसरी बार 76312 मत पाकर निर्वाचित हुए। वहीं कांग्रेस के वीरेंद्र चौधरी को 73958 मत मिला। बीएसपी के बेचन को 35765 मत मिले थे।
पनियरा विधानसभा क्षेत्र से पहली बार शरदेंदू पांडेय चुनाव मैदान में उतरे हैं। पुराने कांग्रेसी कार्यकर्ता शरदेंदू पांडेय के पास संगठन में कार्य करने का अनुभव है। पनियरा विधान सभा में भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह इस सीट से चार बार से विधायक हैं। यहां से वर्ष 2017 में ज्ञानेंद्र सिंह 119308 मत पाए थे। वहीं बीएसपी के गणेश पांडेय 51817 मत पाए थे। वर्ष 2017 के पहले यह श्यामदेउरवां विधान सभा के नाम से जाना जाता था।
ज्ञानेंद्र सिंह वर्ष 1991, 1996 एवं 2002 में चुनाव जीते। यह विधान सभा पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बीरबहादुर सिंह का गढ़ माना जाता था। वह यहां से 1967,1969,1974 -वीर बहादुर सिंह-इंडियन नेशनल कांग्रेस से चुनाव जीते थे। 1980- 1985-वीरबहादुर सिंह-इंडियन नेशनल कांग्रेस जीते थे। इस क्षेत्र में उनका खास दबदबा था। वर्ष 2017 में भाजपा के ज्ञानेंद्र सिंह को 119308 मत मिले थे। जबकि बीएसपी के गणेश शंकर पांडेय को 51817 मिले मत थे। वहीं कांग्रेस की तलत अजीज को 48004 मिले थे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद कुमार सिंह ने बताया कि पार्टी प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए सभी कार्यकर्ता पूरे मनोयोग से जुटे हैं। सभी विधानसभा पर मजबूती के साथ चुनाव लड़ा जाएगा।