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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   By forging appointment letter issued in 2015 fake form of appointment of 38 people was prepared.

कूटरचित नौकरी: पकड़े जाने के डर से धर्मेंद्र बन गया राधेश्याम, सफल नहीं हुआ तो फर्जी कागजात लगाए

Tue, 09 May 2023 12:56 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 09 May 2023 12:56 PM IST
सार

मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि एमडी ऑफिस से निर्देश के बाद विभागीय कार्रवाई कर दी गई है। इसमें आरोपियों पर मुकदमा भी दर्ज करवाया जाएगा। ये कार्रवाई भी अगले दो दिनों में हो जाएगी।

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By forging appointment letter issued in 2015 fake form of appointment of 38 people was prepared.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजली निगम से बर्खास्त किए गए चार श्रमिकों में से एक पहली बार जालसाजी में पकड़ा गया था। दूसरी बार उसने कूटरचित दस्तावेजों के सहारे नियुक्ति पाने में कामयाबी हासिल की। इस जालसाजी में बिजली निगम के लिपिक भी शामिल थे। विभाग की जांच रिपोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर इस बात का खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही पांच लिपिकों पर कार्रवाई की गई है।
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जानकारी के मुताबिक, श्रमिक राधेश्याम शर्मा ने पहली बार धर्मेंद्र शर्मा के नाम से अवैध प्रपत्रों के सहारे नियुक्ति का प्रयास किया। उसने यह प्रयास कुशीनगर जिले में तैनाती के लिए किया था। फर्जी नाम इसलिए इस्तेमाल किया गया, क्योंकि एक बार पहले भी राधेश्याम शर्मा पर एक सरकारी विभाग में फर्जी नियुक्ति का मुकदमा दर्ज हो चुका था।
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उसे डर था कि थाने से जारी होने वाले चरित्र प्रमाण पत्र में मामला खुल न जाए। ऐसे में उसने धर्मेंद्र नाम से आवेदन किया। लेकिन, पूरा मामला पकड़ में आ गया। इसके बाद उसने दूसरे प्रयास में फिर कूटरचित दस्तावेज का प्रयोग करके फर्जी नियुक्ति हासिल की।
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धर्मेंद्र ने कोरना काल के समय में अपनी नियुक्ति के लिए पत्राचार शुरू किया। तत्कालीन अधिशासी अभियंता, पड़रौना को पत्र लिखते हुए कहा कि प्रबंध निदेशक कार्यालय से उसकी नियुक्ति 2015 में पत्रांक संख्या 535 के आधार पर की गई है। उसमें 38 और लोगों का नाम जोड़ दिया गया। लेकिन, पांच वर्ष पूरा होने के बाद भी तैनाती नहीं दी गई। एक्सईएन ने इस पत्र और पत्रांक संख्या का हवाला देते हुए उक्त नियुक्ति के संबंध में निर्देश लेने के लिए प्रबंध निदेशक को पत्र लिखा।




प्रबंध निदेशक कार्यालय के वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी त्रिभुवन जोशी ने पत्रांक संख्या की जांच की तो पाया कि एक मस्टररोल कर्मचारी को श्रमिक पद पर नियुक्त किए जाने का प्रपत्र तो जारी किया गया था, लेकिन उसमें धर्मेंद्र नाम का जिक्र नहीं है। इसी आधार पर एमडी कार्यालय से तत्कालीन मुख्य अभियंता को निर्देशित किया गया कि इस मामले में शामिल सभी लोगों पर मुकदमा कराएं। लेकिन, मामला लटका दिया गया। इसी बीच एक दूसरे नियुक्ति आदेश में कूटरचित करके चार लोगों का नाम जोड़ दिया गया और इनकी नियुक्ति कर दी गई। इस नियुक्ति में विभागीय लिपिकों की मिलीभगत पकड़ी गई है।

मुख्य अभियंता आशु कालिया ने कहा कि एमडी ऑफिस से निर्देश के बाद विभागीय कार्रवाई कर दी गई है। इसमें आरोपियों पर मुकदमा भी दर्ज करवाया जाएगा। ये कार्रवाई भी अगले दो दिनों में हो जाएगी।
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