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एक्सक्लूसिव: जनता की कसौटी पर खरे न उतरने वाले विधायकों का कटेगा पत्ता, सरकार के खिलाफ बोलने वाले भी रडार पर
Thu, 05 Aug 2021 10:57 AM IST
vivek shukla
संतोष सिंह, गोरखपुर।
संतोष सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 05 Aug 2021 10:57 AM IST
सार
भाजपा का केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व हर विधायक के कामकाज, छवि की जानकारी जुटा रहा। सरकार व संगठन के खिलाफ बोलने वाले विधायक भी रडार पर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
विधानसभा क्षेत्रों में कम समय देने और जनता की उम्मीदों पर खरे न उतरने वाले गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल के 30 फीसदी भाजपा विधायकों का टिकट कट सकता है। इसका खाका पार्टी आलाकमान तैयार कर रहा है। सरकार व संगठन के खिलाफ बोलने वाले विधायक भी इस छटनी के शिकार हो सकते हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व, भाजपा विधायकों के कामकाज की समीक्षा कर रहा है। देखा जा रहा है कि विधायक की क्षेत्र में उपस्थिति और छवि कैसी है। सरकार, संगठन के बारे में उनकी क्या राय है? गोरखपुर-बस्ती मंडल के तीन विधायक ऐसे हैं, जो सरकार व संगठन के बारे में गलत बयानबाजी कर रहे हैं। इससे पार्टी, सरकार की छवि प्रभावित हुई। इसकी रिपोर्ट बनाकर भेजी जा चुकी है।
सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में विधानसभा की 62 सीटें हैं। हर सीट की समीक्षा चल रही है। यह काम दिसंबर से पहले पूरा किया जाएगा। जनवरी 2022 में विधानसभा चुनावों का एलान संभव है। पिछले विधानसभा चुनाव की तरह फरवरी व मार्च के पहले सप्ताह तक अलग-अलग चरणों में चुनाव होने हो सकते हैं।
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आगामी विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व, भाजपा विधायकों के कामकाज की समीक्षा कर रहा है। देखा जा रहा है कि विधायक की क्षेत्र में उपस्थिति और छवि कैसी है। सरकार, संगठन के बारे में उनकी क्या राय है? गोरखपुर-बस्ती मंडल के तीन विधायक ऐसे हैं, जो सरकार व संगठन के बारे में गलत बयानबाजी कर रहे हैं। इससे पार्टी, सरकार की छवि प्रभावित हुई। इसकी रिपोर्ट बनाकर भेजी जा चुकी है।
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सूत्रों ने बताया कि गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडल में विधानसभा की 62 सीटें हैं। हर सीट की समीक्षा चल रही है। यह काम दिसंबर से पहले पूरा किया जाएगा। जनवरी 2022 में विधानसभा चुनावों का एलान संभव है। पिछले विधानसभा चुनाव की तरह फरवरी व मार्च के पहले सप्ताह तक अलग-अलग चरणों में चुनाव होने हो सकते हैं।
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गोरखपुर के विधायक भी जनता की उम्मीदों पर खरे नहीं
गोरखपुर में विधानसभा की नौ सीटें हैं। इसमें से कुछ विधायकों का कामकाज संतोषजनक नहीं है। जनता की उम्मीदों पर विधायक खरे नहीं उतर पा रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि तीन से चार विधायकों का टिकट काटा जा सकता है। कुछ विधायक ऐसे हैं, जो लगातार सरकार व संगठन के खिलाफ बोल रहे हैं। यह मामला पार्टी आलाकमान तक भी पहुंचा है।
सोशल मीडिया पर भी खुली आलोचना
संतकबीरनगर व देवरिया के दो विधायक ऐसे हैं, जो सरकार व संगठन के खिलाफ बोल रहे हैं। सोशल मीडिया पर खुलेआम आलोचना कर रहे हैं। इन विधायकों का टिकट कटना तय माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि संतकबीरनगर के एक विधायक पाला भी बदल सकते हैं।
छोटे दलों से गठबंधन का खामियाजा भी भुगतेंगे भाजपा विधायक
भाजपा छोटे राजनीतिक दलों से गठबंधन कर रही है। इसका खामियाजा भाजपा विधायकों को भुगतना पड़ सकता है। निषाद पार्टी भी इस बार प्रतिनिधित्व मांग रही है। चर्चा है कि गोरखपुर की एक सीट निषाद पार्टी को दी जा सकती है। अपना दल (एस) भी गोरखपुर-बस्ती मंडल में ज्यादा प्रतिनिधित्व चाहता है। अगर सुभासपा से समझौता हुआ तो गोरखपुर क्षेत्र के तीन मंडलों की कुछ विधानसभा सीटें भाजपा को छोड़नी पड़ेंगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 62 में से 44 सीटें जीती थीं। दो सीटें सहयोगी पार्टियों के खाते में गई थी।
भाजपा के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी डॉ. बच्चा पांडेय नवीन ने बताया कि पार्टी अपने हर कार्यकर्ता के कामकाज की जानकारी रखती है। टिकट देने का अधिकार भी पार्टी नेतृत्व के पास रहता है। जो अच्छा काम करेगा, उसे पार्टी तोहफा जरूर देगी। भाजपा का मुख्य मुद्दा विकास व जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी को विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 2022 में भाजपा को प्रचंड जीत मिलेगी। यूपी में फिर भाजपा की सरकार बनेगी।
सोशल मीडिया पर भी खुली आलोचना
संतकबीरनगर व देवरिया के दो विधायक ऐसे हैं, जो सरकार व संगठन के खिलाफ बोल रहे हैं। सोशल मीडिया पर खुलेआम आलोचना कर रहे हैं। इन विधायकों का टिकट कटना तय माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि संतकबीरनगर के एक विधायक पाला भी बदल सकते हैं।
छोटे दलों से गठबंधन का खामियाजा भी भुगतेंगे भाजपा विधायक
भाजपा छोटे राजनीतिक दलों से गठबंधन कर रही है। इसका खामियाजा भाजपा विधायकों को भुगतना पड़ सकता है। निषाद पार्टी भी इस बार प्रतिनिधित्व मांग रही है। चर्चा है कि गोरखपुर की एक सीट निषाद पार्टी को दी जा सकती है। अपना दल (एस) भी गोरखपुर-बस्ती मंडल में ज्यादा प्रतिनिधित्व चाहता है। अगर सुभासपा से समझौता हुआ तो गोरखपुर क्षेत्र के तीन मंडलों की कुछ विधानसभा सीटें भाजपा को छोड़नी पड़ेंगी। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 62 में से 44 सीटें जीती थीं। दो सीटें सहयोगी पार्टियों के खाते में गई थी।
भाजपा के क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी डॉ. बच्चा पांडेय नवीन ने बताया कि पार्टी अपने हर कार्यकर्ता के कामकाज की जानकारी रखती है। टिकट देने का अधिकार भी पार्टी नेतृत्व के पास रहता है। जो अच्छा काम करेगा, उसे पार्टी तोहफा जरूर देगी। भाजपा का मुख्य मुद्दा विकास व जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यूपी को विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। 2022 में भाजपा को प्रचंड जीत मिलेगी। यूपी में फिर भाजपा की सरकार बनेगी।