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देवरिया: जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में गिरीश पर दांव लगा सकती है भाजपा, इनके सपने नहीं हो पाए साकार

Sat, 05 Jun 2021 07:08 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया।
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया। Published by: vivek shukla Updated Sat, 05 Jun 2021 07:08 PM IST
सार

बाहरी सदस्यों का समर्थन हासिल करने का दांवा बन सकता है टिकट का आधार, जिले के 56 वार्डों में हुए चुनाव में भाजपा बहुमत के मामले में सपा की तुलना में रह गई पीछे।

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BJP can bet on Girish tiwari in election of zila Panchayat President
भाजपा (सांकेतिक चित्र) - फोटो : social media

विस्तार

देवरिया में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी ने पूर्व जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव की बहू शैलजा यादव को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। उधर, भाजपा भाटपाररानी इलाके से पार्टी के समर्थन से जीते गिरीश तिवारी पर दांव लगा सकती है। इसके पीछे अन्य दलों एवं निर्दलियों का अधिक समर्थन मिलना बताया जा रहा है। कांग्रेस एवं बसपा किसे चुनाव लड़ाएंगी अभी तय नहीं है।

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जिले के 56 वार्डों में हुए चुनाव में भाजपा बहुमत के मामले में सपा की तुलना में पीछे रह गई। भाजपा के आठ उम्मीदवार ही जीत पाए। जबकि पांच बागी विजयश्री हासिल करने में सफल रहे। भाजपा से जीते तीन दावेदार टिकट की दौड़ में हैं। जबकि तीन बागी भी टिकट मांग रहे हैं।
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भाजपा ने चुनाव लड़ रहे 17 लोगों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। लेकिन चुनाव जीतने वाले तीनों बागियों के नाम पार्टी से बाहर होने वालों की सूची में शामिल नहीं थे। इसके पीछे वजह चाहे जो भी हो, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने इस बात को गंभीरता से लिया है।
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भाजपा को जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव जीतने के लिए 15 से 20 सदस्यों की दरकार है। पार्टी में गिरीश तिवारी ही ऐसे उम्मीदवार हैं, जिन्होंने निर्दलीयों एवं अन्य 12 सदस्यों के समर्थन का न केवल दांवा किया है, बल्कि उन्होंने इसका प्रमाण भी देकर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है।

इन लोगों ने भी किया था दांवा

चुनाव परिणाम आने के बाद से ही गिरीश तिवारी, अंखड प्रताप सिंह, सुजीत सिंह और बागी होकर चुनाव जीतने वाले अजीत सिंह, उपेंद्र तिवारी, विनय जायसवाल आदि टिकट की दौड़ में शामिल हो गए। लेकिन पार्टी की हरी झंडी नहीं मिलने से कुछ ही लोग सदस्यों के जोड़-तोड़ में जुटे रहे।

गिरीश तिवारी विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश में लगे हुए हैं। वैसे पार्टी का एक बड़ा तबका जातीय समीकरणों का हवाला देते हुए उनका विरोध कर रहा है। भाजपा जिलाध्यक्ष अंतर्यामी सिंह का कहना है कि अध्यक्ष जिला पंचायत का चुनाव कौन लड़ेगा, पार्टी का प्रदेश नेतृत्व तय करेगा। संभावित उम्मीदवारों के नाम पार्टी को भेज दिए गए हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष का पद अनारक्षित होने के बाद आरएसएस एवं प्रदेश के कृषि मंत्री के करीबी आशुतोष सिंह, पूर्व विधायक प्रमोद सिंह के पुत्र सत्यप्रकाश सिंह, बरहज विधायक सुरेश तिवारी के पुत्र संजय तिवारी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष धनंजय राव, कारोबारी पुनीत शाही, भाजपा की प्रदेश मंत्री मधु मिश्र, गिरीश तिवारी, व्यापारी नेता हरेंद्र जायसवाल आदि अध्यक्ष बनने का सपना संजोए थे। विधायक सुरेश तिवारी एवं पूर्व विधायक प्रमोद सिंह के पुत्रों को पार्टी ने टिकट ही नहीं दिया। बाकी गिरीश तिवारी को छोड़कर सभी चुनाव हार गए।
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