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Gorakhpur News: वरासत के लिए डेढ़ साल से भटक रहे भीम, जमीन बचाने के लिए पांचवीं बार पहुंचीं असीबुन
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गोरखपुर। सदर तहसील समाधान दिवस में शनिवार को फरियादियों की जुबान पर एक ही शिकायत थी, समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। वरासत दर्ज कराने के लिए डेढ़ साल से तहसील के चक्कर काट रहे भीम बहादुर सिंह हों या जमीन से कब्जा हटवाने की गुहार लेकर पांचवीं बार पहुंचीं असीबुन निशा, सभी परेशान दिखाई दिए।
हाथों में पुराने आवेदन की फाइल, आंखों में समाधान की उम्मीद और चेहरे पर लंबे इंतजार की थकान लिए फरियादी अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखते नजर आए। शिकायतें सुनी गईं, आवेदन लिए गए और संबंधित विभागों को अग्रसारित भी किए गए। कई फरियादियों के लिए समाधान दिवस एक बार फिर सिर्फ अगली तारीख मिलने तक सीमित नजर आया।
डोहरिया बाजार निवासी भीम बहादुर सिंह हाथों में कागजों की फाइल लिए अधिकारियों से अपनी वरासत दर्ज कराने की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता पदुमन सिंह की एक फरवरी 2025 को निधन हो गया था। इसके बाद से वह वरासत दर्ज कराने के लिए लगातार लेखपाल के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार अनुरोध और आवेदन देने के बावजूद डेढ़ साल बाद भी उनके नाम वरासत दर्ज नहीं हो सकी। हर बार समाधान की उम्मीद लेकर तहसील पहुंचते हैं और निराश होकर लौटना पड़ता है।
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वहीं, कौड़िया जंगल के भिटनी निवासी असीबुन निशा भी अपनी जमीन को लेकर फरियाद करने पहुंचीं। उनका कहना था कि जमीन के विवाद में दबंगों से कब्जा हटवाने के लिए वह पांचवीं बार शिकायत कर रही हैं। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
नौसड़ निवासी बुजुर्ग बागेश्वरी प्रसाद भी भू-माफिया से जुड़ी समस्या को लेकर अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक देने पहुंचे। सदर तहसील समाधान दिवस में कुल 116 आवेदन आए। इनमें कई ऐसे फरियादी भी रहे, जो दूसरी और तीसरी बार अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे। फरियादियों का कहना था कि शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन समाधान के बजाय मामले एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक अग्रसारित किए जा रहे हैं।
वर्जन
समाधान दिवस में आने वाले मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने का प्रयास किया जाता है। कई लोग तय समय से पहले ही दोबारा आवेदन करने पहुंच जाते हैं। वहीं, कुछ विवादित व त्रुटिपूर्ण अभिलेखों वाले मामलों के निस्तारण में थोड़ा समय लगता है।
- सत्य प्रकाश गुप्ता, तहसीलदार सदर
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हाथों में पुराने आवेदन की फाइल, आंखों में समाधान की उम्मीद और चेहरे पर लंबे इंतजार की थकान लिए फरियादी अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखते नजर आए। शिकायतें सुनी गईं, आवेदन लिए गए और संबंधित विभागों को अग्रसारित भी किए गए। कई फरियादियों के लिए समाधान दिवस एक बार फिर सिर्फ अगली तारीख मिलने तक सीमित नजर आया।
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डोहरिया बाजार निवासी भीम बहादुर सिंह हाथों में कागजों की फाइल लिए अधिकारियों से अपनी वरासत दर्ज कराने की गुहार लगा रहे थे। उन्होंने बताया कि उनके पिता पदुमन सिंह की एक फरवरी 2025 को निधन हो गया था। इसके बाद से वह वरासत दर्ज कराने के लिए लगातार लेखपाल के चक्कर लगा रहे हैं। कई बार अनुरोध और आवेदन देने के बावजूद डेढ़ साल बाद भी उनके नाम वरासत दर्ज नहीं हो सकी। हर बार समाधान की उम्मीद लेकर तहसील पहुंचते हैं और निराश होकर लौटना पड़ता है।
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वहीं, कौड़िया जंगल के भिटनी निवासी असीबुन निशा भी अपनी जमीन को लेकर फरियाद करने पहुंचीं। उनका कहना था कि जमीन के विवाद में दबंगों से कब्जा हटवाने के लिए वह पांचवीं बार शिकायत कर रही हैं। इसके बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।
नौसड़ निवासी बुजुर्ग बागेश्वरी प्रसाद भी भू-माफिया से जुड़ी समस्या को लेकर अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक देने पहुंचे। सदर तहसील समाधान दिवस में कुल 116 आवेदन आए। इनमें कई ऐसे फरियादी भी रहे, जो दूसरी और तीसरी बार अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे। फरियादियों का कहना था कि शिकायतें दर्ज तो हो रही हैं, लेकिन समाधान के बजाय मामले एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक अग्रसारित किए जा रहे हैं।
वर्जन
समाधान दिवस में आने वाले मामलों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराने का प्रयास किया जाता है। कई लोग तय समय से पहले ही दोबारा आवेदन करने पहुंच जाते हैं। वहीं, कुछ विवादित व त्रुटिपूर्ण अभिलेखों वाले मामलों के निस्तारण में थोड़ा समय लगता है।
- सत्य प्रकाश गुप्ता, तहसीलदार सदर