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सिम बॉक्स से ठगी: आंध्र प्रदेश में ठगी कर, गोरखपुर में छिपा था बिहार का 'नटवरलाल'- देने लगा था 'खाकी' की धौंस

Wed, 19 Feb 2025 01:50 PM IST
रोहित सिंह रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Wed, 19 Feb 2025 01:50 PM IST
सार

पकड़े जाने पर उसने खुद हैरत जताते हुए जांच एजेंसी की टीम से पूछ लिया कि आखिर पुलिस ने उसका पता कैसे निकाला? जांच एजेंसी और पुलिस को पहुंचते देख वो हैरत में पड़ गया। फिर उसने शहर के एक थाने के इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज, पुलिस की स्थानीय जांच एजेंसी के खाकी धारकों का नाम लेना शुरू कर दिया।

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Andhra Pradesh police with the help of central agency arrested the thug from Gorakhpur,he is a native of Bihar
गिरफ्तार राहुल शाही( फाइल फोटो) और बिछिया में बनवा रहा अपना घर - फोटो : स्त्रोत- एजेंसी

विस्तार

गुंटूर जिले में फर्जी कॉल सेंटर की मदद से इंटरनेशनल कॉल के नेशनल काल में ट्रांसफर कर ठग के मास्टरमाइंड को रविवार को आंध्र प्रदेश की पुलिस ने गोरखपुर से गिरफ्तार कर लिया है। गोरखपुर के अफसरों को भी इसकी भनक देर से लगी।
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बिहार के सारंग जिले का रहने वाला राहुल कुमार शाही अपने पत्नी के साथ गोरखपुर के बिछिया में एक किराए के मकान में रहता था। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम के मदद से उसे गिरफ्तार करने के बाद आंध्र प्रदेश पुलिस उसे अपने साथ लेते गई।
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राहुल के खिलाफ गुंटूर जिले के मंगलापुरी टाउन थाने में 28 नवंबर 2024 को केस दर्ज किया गया था। तभी से वह फरार था और पुलिस उसकी तलाश में थी। सूत्रों के अनुसार, राहुल ने आंध्र प्रदेश में बैंकपे, कैशबैक पे के अलावा सीबीपीई ऑप्टीमाइज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर किराए के मकान में अपना ऑफिस खोला था, जिसमें कॉल सेंटर चलाता था।
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उसने कुछ स्थानीय लड़कों को नौकरी पर भी रखा था। ये लड़के सिम बॉक्स के जरिये आंध्र प्रदेश से देश-विदेश में फोन कर लोकल नंबर दिखाते हुए विभिन्न ऑफर, योजनाओं के अलावा रुपयों को दोगुना-तीगुना करने का लालच देकर लोगों को फंसाते थे।

उनसे बैंक की डिटेल और अन्य जरूरी जानकारी लेने के बाद बैंक से रुपये उड़ाकर उनके साथ ठगी की जाती थी। ऐसी ही एक शिकायत पर आंध्र पुलिस ने राहुल पर केस दर्ज किया था और रविवार को उसे दबोच लिया।

खाकी का खुमार..नटवरलाल ने बोला- यहां की पुलिस जानती है
गोरखपुर। सिम बॉक्स के जरिये इंटरनेशनल कॉल को नेशनल काल में ट्रांसफर कर ठगी के मामले में जब आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम बिछिया स्थित आरोपी राहुल कुमार शाही के किराए के मकान में पहुंची तो वह खाकी वालों से जान-पहचान का रौब झाड़ने लगा।

सूत्रों की मानें तो अपने घर पर  जांच एजेंसी और पुलिस को देख आरोपी राहुल हैरत में पड़ गया। फिर उसने शहर के एक थाने के इंस्पेक्टर, चौकी इंचार्ज, पुलिस की स्थानीय जांच एजेंसी के लोगों के नाम लेकर रौब झाड़ना शुरू कर दिया। कहा कि उसे इंस्पेक्टर जानते हैं।

सभी के सामने उसने एक खाकी वाले से पूछ भी लिया- इस कार्रवाई के बारे में मुझे पहले बताया क्यों नहीं? इस पर खाकी वाले ने कार्रवाई के बारे में अनभिज्ञता जताई। एक खाकीधारी ने आरोपी के समर्थन में धाराओं को हल्का करने तक को कहा। हालांकि, आंध्र प्रदेश की पुलिस ने इससे इन्कार कर अपने साथ ले गई।

 

सिम बॉक्स का इस्तेमाल है प्रतिबंधित 
सिम बॉक्स का इस्तेमाल प्रतिबंधित है। सिम बॉक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला सिम कार्ड आमतौर पर नकली आईडी का उपयोग करके खरीदे जाते हैं। जांच एजेंसी के लिए वीओआईपी कॉल को ट्रैक करना काफी आसान है। हालांकि, सिम बॉक्स के जरिये किए गए कॉल का पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है।

एक फोन से आरोपी आया पकड़ में
आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम ने केस दर्ज होने के बाद दिल्ली में केंद्रीय एजेंसी से संपर्क किया था। इसे लेकर एजेंसी लखनऊ स्तर पर काम कर रही थी। इसी बीच राहुल का एक मोबाइल नंबर सीडीआर से मिल गया। यह वह नंबर था, जो लंबे समय से बंद था। इसी बीच राहुल ने एक बार इस नंबर से कॉल कर दिया। यही कॉल एजेंसी की रडार पर आ गई और राहुल का एड्रेस लोकेट हो गया

बिछिया में बनवा रहा था घर 
राहुल बिछिया में अपना घर बनवा रहा था। आशंका है कि धोखाधड़ी की रकम से यह मकान बनवाया जा रहा है। पुलिस इसकी भी जांच करेगी।

ऐसे काम करता है सिस्टम
जांच एजेंसी के अनुसार, ये पूरा फ्रॉड सिम बॉक्स पर आधारित होता है। ये एक ऐसा उपकरण है, जिसका इस्तेमाल 500 सिम कॉर्ड तक एक साथ किया जा सकता है। साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय कॉल को नेशनल कॉल में परिवर्तित करने के लिए करते हैं।

दूसरे शब्दों में, सिम बॉक्स एक वीओआईपी कॉल को जीएसएम कॉल में बदल देता है। फिर इंटरनेट के जरिये इंटरनेशनल कॉल में लोकल नंबर का प्रयोग करते हुए लोगों के साथ ठगी की जाती है।

आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम ने संपर्क किया था। साइबर सेल की मदद से लोकेशन ट्रेस कर आरोपी की गिरफ्तारी की गई थी। आंध्र प्रदेश पुलिस की टीम के साथ गोरखपुर पुलिस की टीम भी मौजूद थी: अभिनव त्यागी, एसपी सिटी

 

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