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किसानों के लिए प्रेरणा: शिक्षक की नौकरी छोड़ अमित कर रहे जैविक खेती, दूध से लेकर गेहूं व तेल की कर रहे आपूर्ति

Tue, 08 Feb 2022 04:34 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 08 Feb 2022 04:34 PM IST
सार

अमित बताते हैं कि इसकी शुरुआत 2017 में की। शुरू में उत्पादन कम हुआ, लेकिन अब बढ़ रहा है। जैविक खेती को पहले भी लोग करते थे। आज उसका स्वरूप बदल गया है।

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Amit left job of teacher and doing organic farming in Gorakhpur
जैविक खेती करने वाले अमित पांडेय। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अंग्रेजी व मैथ पढ़ाने वाला युवक, शिक्षक की नौकरी छोड़कर किसान बन गया है। जैविक खेती के माध्यम से अमित पांडेय क्षेत्र के किसानों के प्रेरणास्रोत बन गए हैं। वह दूध से लेकर गेहूं व तेल की आपूर्ति कर किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित भी कर रहे हैं। उनका लक्ष्य जैविक खेती करने वालों का समूह बनाने का है।

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गोरखपुर जिले के पिपरौली ब्लॉक के व्यवहरिया गांव निवासी अमित पांडेय कांवेंट स्कूल में अंग्रेजी और गणित के शिक्षक थे। कई साल तक उन्होंने शिक्षक की नौकरी की, लेकिन उनका मन इसमें नहीं लगा। बढ़ते प्रदूषण एवं रसायनिक उत्पादों के कारण हो रही बीमारियों से उसका मन जैविक खेती की तरफ घूमा। गांव से थोड़ी दूर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र बेलीपार के वैज्ञानिकों से सलाह लेकर उन्होंने जैविक खेती शुरू की।
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अमित बताते हैं कि इसकी शुरुआत 2017 में की। शुरू में उत्पादन कम हुआ, लेकिन अब बढ़ रहा है। जैविक खेती को पहले भी लोग करते थे। आज उसका स्वरूप बदल गया है। अमित गौ पर आधारित खेती करते हैं। गाय के गोबर और गोमूत्र से जीवामृत बनाकर उसको खेत में डालते हैं। इससे खेत की उर्वरक शक्ति बढ़ती है।
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जैविक उत्पाद का स्वाद ही अलग

अमित बताते हैं कि उनके चुनिंदा ग्राहक हैं, जिनके वहां वह अपना उत्पाद पहुंचाते हैं। इसका वह शुल्क भी लेते हैं। वह काला गेहूं की पैदावार करते हैं, जो उच्च गुणवत्ता की होती है, उसका दाम अन्य गेंहू की वैरायटी से अधिक मिलता है। बाजार में काला गेहूं 50 रुपये किलो है, जबकि आम गेहूं की कीमत 35 रुपये किलो है।

देशी गायों का बेचते हैं दूध

अमित बताते हैं कि उनके पास देशी व गिर नस्ल की गाय है। उसका दूध दवा की तरह काम करता है। बहुत से लोग जिनको दूध नहीं पचता है, वह भी इसका इस्तेमाल करते हैं। जिस खेत से जैविक उत्पाद निकलता है। उसी खेत में गायों के लिए चारा भी पैदा होता है। उससे उनका दूध उच्च गुणवत्ता वाला होता है। इसके ग्राहक तय रहते हैं, जो एक लीटर दूध का दाम 100 रुपये देते हैं।
 
बोलीपार कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र पर जैविक खेती के बारे में प्रशिक्षण व जानकारी दी जाती है। जिससे इस दिशा में किसानों का रुझान बढ़े। क्षेत्र के जो भी किसान जैविक खेती करने को इच्छुक हों, वह 20 लोगों का ग्रुप बनाकर आ सकते हैं। उनको प्रशिक्षण व जानकारी दी जाएगी।

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