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गोरखपुर: शोध कर चेहरे पर पड़ने वाली छाईं की तलाशेंगे वजह, एम्स में शुरू हुई मालीक्यूलर बायोलॉजी लैब

Thu, 31 Mar 2022 03:24 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 31 Mar 2022 03:24 PM IST
सार

रिसर्च सेल के हेड डॉ. हरिशंकर जोशी ने कहा कि इस लैब के जरिए रोग शुरू होने के दो साल पहले ही पता चल सकेगा। मसलन, किसी को दो साल बाद कैंसर होने वाला है, तो जीन की जांच कर पता किया जा सकता है कि उसके डीएनए में कैंसर मौजूद है। उसका उपचार शुरू कर दिया जाएगा।

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After doing research we will find reason for shadow falling on face
गोरखपुर एम्स। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मालीक्यूलर बायोलॉजी लैब का शुभारंभ बुधवार को हुआ। इस लैब के जरिए जीन की जांच होगी और विभिन्न रोगों पर शोध किए जाएंगे। पहला शोध चेहरे पर पड़ने वाली छाईं के कारणों पर किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी डर्मेटोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार गुप्ता को दी गई है। इस शोध के लिए 76 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

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लैब का उद्घाटन करते हुए कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर ने कहा कि मालीक्यूलर बायोलॉजी लैब शोध के लिए सबसे उत्तम लैब है। इसके माध्यम से शोध के अलावा उपचार की प्लानिंग भी की जाएगी। इससे डायग्नोसिस (रोग के कारणों की जांच), प्राग्नोसिस (रोग का भविष्य) व ट्रीटमेंट (किस हद तक उपचार हो सकता है) का पता चल सकेगा। इस लैब में जीन सिक्वेंसर मशीन लग जाने से यहां जीनोम सिक्वेंसिंग भी हो सकेगी। उम्मीद की जाती है कि शीघ्र ही यह मशीन भी लग जाएगी।
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रिसर्च सेल के हेड डॉ. हरिशंकर जोशी ने कहा कि इस लैब के जरिए रोग शुरू होने के दो साल पहले ही पता चल सकेगा। मसलन, किसी को दो साल बाद कैंसर होने वाला है, तो जीन की जांच कर पता किया जा सकता है कि उसके डीएनए में कैंसर मौजूद है। उसका उपचार शुरू कर दिया जाएगा।
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इसी तरह से अन्य गंभीर रोगों के बारे में रोग शुरू होने के पूर्व ही पता किया जा सकेगा। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैलेंद्र कुमार द्विवेदी ने किया। इस अवसर पर डॉ. रुचिका अग्रवाल, डॉ. अलका त्रिपाठी, डॉ. विकास श्रीवास्तव व पंकज आदि उपस्थित थे।

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