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Gorakhpur News: कैंसर के इलाज में नई राह, दवा जांच का बदलेगा तरीका
Sun, 04 Oct 2026 02:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 04 Oct 2026 02:57 AM IST
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- बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
- कैंसर के सटीक इलाज के लिए दवा विकसित करने पर रहा जोर
- जानवरों पर शोध की जगह वैकल्पिक मॉडल पर बढ़ेगा जोर
- देशभर के फार्मेसी कॉलेजों से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से समझीं शोध की नई दिशाएं
गोरखपुर। कैंसर के इलाज में एक ही दवा सभी मरीजों पर समान असर नहीं करती। ऐसे में मरीज की बीमारी और शरीर की जरूरत के अनुसार सटीक दवा विकसित करने पर अब शोध का जोर बढ़ रहा है। शनिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित राजकीय फार्मेसी कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कैंसर की जटिलताओं, कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी को अधिक प्रभावी बनाने के साथ दवा शोध के नए तरीकों पर चर्चा की। डॉ.शीलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आने वाले समय में दवाओं की प्रभावशीलता और सुरक्षा जांच के लिए जानवरों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम हो रहा है। इसके विकल्प के तौर पर सेल कल्चर, अंग आधारित कोशिकाओं और दूसरे वैकल्पिक मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी दवा का कैंसर कोशिकाओं पर कितना और किस तरह असर होगा।
सम्मेलन में फार्मास्युटिकल इनोवेशन, प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नैनोमेडिसिन और रेगुलेटरी टॉक्सिकोलॉजी पर भी चर्चा हुई। देश के विभिन्न फार्मेसी कॉलेजों से आए छात्र-छात्राओं ने शोध की नई तकनीकों को समझा और विशेषज्ञों से सवाल किए। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. भरत मिश्रा, डॉ. अमित राय, डॉ. तथागत दत्ता समेत देश-विदेश के वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन का आयोजन राजकीय फार्मेसी कॉलेज और बीपीसीआईएल, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
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कई दवाएं मरीजों पर अपेक्षित असर नहीं करतीं
डॉ. तथागत दत्ता ने कहा कि फार्मेसी के क्षेत्र में बीमारी और मरीज को ध्यान में रखकर दवा विकसित करने पर शोध चल रहा है। खासकर, कैंसर की दवाओं को लेकर ऐसी विधि पर काम हो रहा है, जिससे दवा के असर का बेहतर आकलन किया जा सके। कई दवाएं मरीजों पर अपेक्षित असर नहीं करतीं। नई शोध पद्धति से प्रभावी दवाओं के विकास पर जोर है। जानवरों पर प्रयोग कम करने की दिशा में भी शोध आगे बढ़ रहा है।कई बार दवा विकसित होने के बाद भी मरीजों में उसका अपेक्षित असर नहीं दिखता। नई शोध पद्धतियों का उद्देश्य इस स्थिति को कम करना है।दुनिया में वैज्ञानिक शोध के दौरान जानवरों पर प्रयोग कम करने और वैकल्पिक वैज्ञानिक विधियों को बढ़ावा देने पर काम चल रहा है। भारत में भी आने वाले समय में ऐसी आधुनिक शोध व्यवस्था को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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- कैंसर के सटीक इलाज के लिए दवा विकसित करने पर रहा जोर
- जानवरों पर शोध की जगह वैकल्पिक मॉडल पर बढ़ेगा जोर
- देशभर के फार्मेसी कॉलेजों से पहुंचे छात्र-छात्राओं ने विशेषज्ञों से समझीं शोध की नई दिशाएं
गोरखपुर। कैंसर के इलाज में एक ही दवा सभी मरीजों पर समान असर नहीं करती। ऐसे में मरीज की बीमारी और शरीर की जरूरत के अनुसार सटीक दवा विकसित करने पर अब शोध का जोर बढ़ रहा है। शनिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित राजकीय फार्मेसी कॉलेज में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशेषज्ञों ने कैंसर की जटिलताओं, कीमोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी को अधिक प्रभावी बनाने के साथ दवा शोध के नए तरीकों पर चर्चा की। डॉ.शीलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आने वाले समय में दवाओं की प्रभावशीलता और सुरक्षा जांच के लिए जानवरों पर निर्भरता कम करने की दिशा में काम हो रहा है। इसके विकल्प के तौर पर सेल कल्चर, अंग आधारित कोशिकाओं और दूसरे वैकल्पिक मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी दवा का कैंसर कोशिकाओं पर कितना और किस तरह असर होगा।
सम्मेलन में फार्मास्युटिकल इनोवेशन, प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नैनोमेडिसिन और रेगुलेटरी टॉक्सिकोलॉजी पर भी चर्चा हुई। देश के विभिन्न फार्मेसी कॉलेजों से आए छात्र-छात्राओं ने शोध की नई तकनीकों को समझा और विशेषज्ञों से सवाल किए। कार्यक्रम में प्रो. डॉ. भरत मिश्रा, डॉ. अमित राय, डॉ. तथागत दत्ता समेत देश-विदेश के वैज्ञानिक और शोधकर्ता शामिल हुए। सम्मेलन का आयोजन राजकीय फार्मेसी कॉलेज और बीपीसीआईएल, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
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कई दवाएं मरीजों पर अपेक्षित असर नहीं करतीं
डॉ. तथागत दत्ता ने कहा कि फार्मेसी के क्षेत्र में बीमारी और मरीज को ध्यान में रखकर दवा विकसित करने पर शोध चल रहा है। खासकर, कैंसर की दवाओं को लेकर ऐसी विधि पर काम हो रहा है, जिससे दवा के असर का बेहतर आकलन किया जा सके। कई दवाएं मरीजों पर अपेक्षित असर नहीं करतीं। नई शोध पद्धति से प्रभावी दवाओं के विकास पर जोर है। जानवरों पर प्रयोग कम करने की दिशा में भी शोध आगे बढ़ रहा है।कई बार दवा विकसित होने के बाद भी मरीजों में उसका अपेक्षित असर नहीं दिखता। नई शोध पद्धतियों का उद्देश्य इस स्थिति को कम करना है।दुनिया में वैज्ञानिक शोध के दौरान जानवरों पर प्रयोग कम करने और वैकल्पिक वैज्ञानिक विधियों को बढ़ावा देने पर काम चल रहा है। भारत में भी आने वाले समय में ऐसी आधुनिक शोध व्यवस्था को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
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