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सख्ती के बाद भी सुस्ती कम नहीं, 60 हजार शौचालय पूरे, 1.30 लाख अब भी चुनौती
Fri, 03 Jan 2020 12:48 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Fri, 03 Jan 2020 12:48 PM IST
सार
- - शौचालयों के निर्माण में लापरवाही पर सख्ती बरकरार
- - दो महीने से सभी एडीओ व 269 पंचायत सचिवों का रुका है वेतन
- - शौचालयों की 90 फीसदी से कम जियो टैगिंग पर डीएम ने की थी कार्रवाई
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
शौचालयों के निर्माण में लापरवाही पर सख्ती के बाद कर्मचारियों-अधिकारियों सुस्ती कम हुई है। दो महीने में 60 हजार शौचालयों की जियो टैगिंग (निर्माण के बाद फोटो) हो चुकी है, मगर अब भी पंचायतीराज विभाग के सामने 1.32 लाख शौचालय का निर्माण चुनौती है। इनमें कुछ में थोड़ा तो कुछ में आधे से ज्यादा काम बाकी है।
विभाग तो सभी शौचालयों का निर्माण पूरा मानते हुए करीब डेढ़ साल पहले ही जिले को ओडीएफ भी घोषित कर चुका है। मगर, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जियो टैगिंग करने के बाद ही शौचालयों का निर्माण पूरा माना जाएगा। यही वजह रही कि 90 फीसदी से कम जियो टैगिंग पर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने पांच नवंबर को ही जिले के सभी 20 एडीओ पंचायत और 1139 ग्राम पंचायतों से जुड़े 269 पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया था जो अभी जारी नहीं किया गया है।
एडीओ पंचायत और पंचायत सचिवों पर सख्ती के साथ ही डीएम ने पिछले महीने 500 से अधिक शौचालयों की जियो टैगिंग नहीं करने वाले 35 गांवों के प्रधानों को भी नोटिस भेजा था। इनमें चरगांवा के सर्वाधिक 12, जंगल कौड़िया, खजनी, खोराबार, पिपरौली, उरुवां, पिपरौली, बांसगांव व भटहट ब्लाक के एक, भरोहिया के पांच, ब्रह्मपुर के चार, पिपराइच व सहजनवां के दो तथा सरदारनगर ब्लाक के तीन गांव शामिल हैं।
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इस सख्ती का नतीजा यह हुआ कि कुल 1.92 लाख शौचालयों में से अब तक 62 हजार शौचालयों की जियो टैगिंग का काम पूरा हो गया। पंचायतीराज विभाग के मुताबिक लगातार मानीटरिंग की जा रही है। जल्द ही बाकी शौचालयों के जियो टैगिंग का भी काम पूरा हो जाएगा।
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विभाग तो सभी शौचालयों का निर्माण पूरा मानते हुए करीब डेढ़ साल पहले ही जिले को ओडीएफ भी घोषित कर चुका है। मगर, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जियो टैगिंग करने के बाद ही शौचालयों का निर्माण पूरा माना जाएगा। यही वजह रही कि 90 फीसदी से कम जियो टैगिंग पर डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने पांच नवंबर को ही जिले के सभी 20 एडीओ पंचायत और 1139 ग्राम पंचायतों से जुड़े 269 पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया था जो अभी जारी नहीं किया गया है।
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एडीओ पंचायत और पंचायत सचिवों पर सख्ती के साथ ही डीएम ने पिछले महीने 500 से अधिक शौचालयों की जियो टैगिंग नहीं करने वाले 35 गांवों के प्रधानों को भी नोटिस भेजा था। इनमें चरगांवा के सर्वाधिक 12, जंगल कौड़िया, खजनी, खोराबार, पिपरौली, उरुवां, पिपरौली, बांसगांव व भटहट ब्लाक के एक, भरोहिया के पांच, ब्रह्मपुर के चार, पिपराइच व सहजनवां के दो तथा सरदारनगर ब्लाक के तीन गांव शामिल हैं।
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इस सख्ती का नतीजा यह हुआ कि कुल 1.92 लाख शौचालयों में से अब तक 62 हजार शौचालयों की जियो टैगिंग का काम पूरा हो गया। पंचायतीराज विभाग के मुताबिक लगातार मानीटरिंग की जा रही है। जल्द ही बाकी शौचालयों के जियो टैगिंग का भी काम पूरा हो जाएगा।
सफाई में गोरखपुर के गांव प्रदेश में नंबर वन
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत 5.50 लाख से अधिक शौचालयों में भले ही अभी एक लाख से अधिक शौचालयों की जियो टैगिंग का काम अधूरा है मगर स्वच्छ सर्वेक्षण (ग्रामीण) 2019 में गोरखपुर के गांव प्रदेश के भीतर सबसे ज्यादा साफ मिले हैं। डेढ़ महीने पहले आए नतीजों के मुताबिक गोरखपुर पूरे प्रदेश में जहां पहले पायदान पर है वहीं देश में 26वें नंबर पर। 100 में 89.08 अंक पाकर तेलंगाना राज्य का पेद्दापल्ली जिला देश में पहले नंबर पर है। वाराणसी 224 तो लखनऊ 344वें नंबर पर है। पिछले साल यानी 2018 के सर्वेक्षण में गोरखपुर, प्रदेश के भीतर 24वें तो देश में 285वें नंबर पर था। उस समय हुई किरकिरी के बाद मुख्यमंत्री खुद जिले में सफाई व्यवस्था पर जोर दे रहे थे।