Lok Sabha Elections : जम्मू-कश्मीर में पाला बदल से दिलचस्प होगा चुनावी मुकाबला, 'चिढ़ाने' वाली होंगी चुनौतियां
एक तो अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार बदले माहौल में अग्निपरीक्षा होगी। दूसरे पांच साल में सियासत काफी बदल गई है। परिवार वादी पार्टियों को चुनाव प्रचार के दौरान उनके शागिर्द ही चुनौती देते नजर आएंगे।
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जम्मू-कश्मीर में 2024 का लोकसभा चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण और दिलचस्प होगा। एक तो अनुच्छेद 370 हटने के बाद पहली बार बदले माहौल में अग्निपरीक्षा होगी। दूसरे पांच साल में सियासत काफी बदल गई है। परिवार वादी पार्टियों को चुनाव प्रचार के दौरान उनके शागिर्द ही चुनौती देते नजर आएंगे। जम्मू-कश्मीर में तीन पंजीकृत पार्टियों का उद्भव हुआ है, जो अपनी मूल पार्टियों को चुनौती देने के लिए तैयार हैं। कई नेता, पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक बदले घर में राजनीति करते दिखेंगे। जम्मू और कश्मीर में तीन दर्जन से अधिक नेताओं, पूर्व मंत्रियों व विधायकों ने पाला बदला है।
370 हटने के बाद सबसे पहले कश्मीर में राजनीतिक उथल पुथल हुई। पीडीपी से कई दिग्गज नेताओं ने किनारा कर लिया। पीडीपी के संस्थापक मुफ्ती मोहम्मद सईद के करीबी पूर्व मंत्री सैयद अल्ताफ बुखारी ने पीडीपी छोड़ नई पार्टी जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी बना ली। पहली बार डीडीसी के हुए चुनाव में इसने कई इलाकों में अपनी मूल पार्टी पीडीपी को चुनौती देते हुए बेहतर प्रदर्शन किया। इसके बाद कांग्रेस से अलग होकर कद्दावर नेता गुलाम नबी आजाद ने डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) बना ली।
इस पार्टी ने कांग्रेस में जोरदार उथलपुथल किया। कई पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक ने कांग्रेस छोड़ आजाद का दामन थाम लिया। कुछ नेता जो आजाद के साथ गए थे उन्होंने कुछ समय बाद दोबारा कांग्रेस की राह पकड़ ली। आजाद की पार्टी जम्मू, उधमपुर तथा अनंतनाग-राजोरी समेत अन्य सीटों पर संभावनाएं तलाश रही है। अपनी पार्टी की ओर से भी कश्मीर में गठबंधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। एडवोकेट अंकुश शर्मा की एक अन्य पार्टी एकम सनातन धर्म दल भी अस्तित्व में आई जो जम्मू संभाग में ज्यादा सक्रिय है।
जम्मू संभाग में नेकां के लिए बड़ा सबक था जब 2022 में उसके संभागीय अध्यक्ष देवेंद्र सिंह राणा समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। उनके साथ पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह सलाथिया भी थे। बाद में पूर्व विधायक कमल अरोड़ा व प्रेमसागर अजीज ने भी नेकां छोड़ दी। हाल ही में पहाड़ियों को एसटी का आरक्षण मिलने के बाद पुंछ से एमएलसी रहीं डॉ. शहनाज गनेई ने भी औपचारिक रूप से भाजपा का दामन थाम लिया। इसके अलावा पूर्व एमएलए मुश्ताक बुखारी, चौधरी अरशद, धर्मवीर सिंह जमवाल, सोमनाथ खजूरिया आदि पार्टी में शामिल हुए।
पीडीपी से नाता तोड़ने वालों में सैयद अल्ताफ बुखारी के अलावा पूर्व मंत्री इमरान रजा अंसारी, बशारत बुखारी, अब्दुल रहीम राथर, पूर्व उप मुख्यमंत्री मुजफ्फर बेग, पूर्व मंत्री हसीब द्राबू, जावेद मुस्तफा मीर, अशरफ मीर समेत कई नेता शामिल हैं। इसके अलावा महबूबा मुफ्ती के कुछ रिश्तेदारों ने भी पार्टी का दामन छोड़ दिया है। यही कारण है कि इंडिया गठबंधन में शामिल नेकां ने साफ तौर पर कह दिया है कि वह पीडीपी के साथ सीट शेयरिंग पर कोई समझौता नहीं कर सकती है। नेकां से पूर्व विधायक शेख जब्बार व पूर्व डिप्टी सीएम परवेज कादरी भी अलग हुए हैं।
डीपीएपी अन्य सीटों पर तलाश रही उम्मीदवार
कांग्रेस के पूर्व विधायक जीएम सरूरी व जुगल किशोर शर्मा समेत कई पदाधिकारी अब गुलाम नबीआजाद के साथ हैं। आजाद का पीर पंजाल में प्रभाव है। आजाद ने कश्मीर के लगभग सभी जिलों में रैलियां पूरी कर ली हैं। इसके साथ ही जम्मू संभाग में सभाओं का दौर जारी है। उधमपुर से प्रत्याशी घोषित किया जा चुका है। अन्य सीटों के लिए भी प्रत्याशी तलाशे जा रहे हैं।