अदालत ने पुलिसकर्मियों को ठुल्ला कहने के मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को मानहानि के केस से आरोपमुक्त कर दिया है। केजरीवाल अपने जिस इंटरव्यू में पुलिसवालों को ठुल्ला कहा था उसके बाद काफी विवाद हो गया था। उनके ऊपर केस तो हुआ ही गाजियाबाद के एसएसपी ने तो अपने सहकर्मियों को यह संदेश भी जारी कर दिया कि सभी एक-दूसरे को ठुल्ला कहें वो भी गर्व से। जानिए क्या था वो पूरा विवाद और क्या है ठुल्ला शब्द का इतिहास....
तत्कालीन गाजियाबाद एसएसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने केजरीवाल के बयान के बाद उस वक्त अपने एक संदेश से सबको चौंका दिया था। अपने कलीग्स को उनका यह फरमान था कि वो एक दूसरे को बुलाने के लिए 'ठुल्ला' शब्द का इस्तेमाल करें। दिल्ली सीएम केजरीवाल ने एक टीवी इंटरव्यू में दिल्ली पुलिस के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया था। इसके बाद उनके खिलाफ दिल्ली के तीन अलग-अलग थानों में दिल्ली पुलिस के सिपाहियों ने शिकायत दर्ज कराई थी और इस शब्द को आपत्तिजनक करार दिया था।
'ठुल्ला' शब्द को अपने लिए चुनौती मानते हुए उस वक्त गाजियाबाद के एसएसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने अपने मातहतों को वायरलेस के साथ ही अन्य माध्यम से भी संदेश पहुंचाया था कि वो ठुल्ला शब्द का इस्तेमाल एक-दूसरे को बुलाने के लिए करें। एसएसपी यादव ने कहा कि हालांकि यह एक अशोभनीय शब्द है लेकिन हमें इसे चुनौती के रूप में लेते हुए इसका उपयोग अपनी छवि सुधारने के लिए करना चाहिए।
उन्होंने ये भी कहा था कि हमें इतनी मेहनत से काम करना चाहिए कि लोग हमारे अच्छे काम को पसंद करें और जिन लोगों की वजह से ठुल्ला शब्द का टैग हम पर लगा है उन्हें चिन्हित कर उनपर कार्रवाई भी करनी चाहिए। हालांकि इससे पहले भी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने अपने ट्वीट में एक फोटो शेयर करते हुए केजरीवाल के इस शब्द पर टिप्पणी की थी। पोस्ट में कहा गया था कि एक ठुल्ले ने एक बेटे को उसकी मां से मिलवाया। वहीं केजरीवाल द्वारा पुलिस के लिए उपयोग किए गए इस शब्द से गाजियाबाद के एसएसपी धर्मेंद्र सिंह यादव ने अपने साथियों से ठुल्ला शब्द का प्रयोग गर्व से करने को कहा। उन्होंने कहा कि 'गर्व से कहिए ठुल्ला हैं हम।'
क्या ऐसे शब्द भी होते हैं जो शब्दकोशों में दर्ज न हों! जवाब है बिल्कुल होते हैं और ‘ठुल्ला’ भी एक ऐसा ही शब्द है जो इन दिनो चर्चा में है। हिन्दी क्षेत्र में ‘ठुल्ला’ शब्द से खाकी वर्दी पहने ऐसे पुलिस वाले की छवि दिमाग में कौंधती है जो तुंदियल है। मैली, सिलवटदार वर्दी पहने, पान चबाए लापरवाह मुद्रा में या तो कुर्सी पर पसरा है या चौराहे पर किसी न किसी को ताड़ रहा है। सामान्यतौर पर आम लोग सिपाही से लेकर कांस्टेबल और हेडसाब तक को इस शब्द के दायरे में रखते हैं। इस तरह ‘ठुल्ला’ शब्द की अर्थवत्ता अगर निर्धारित ही करनी हो तो कामचोर, निष्क्रिय, लापरवाह और जबर्दस्ती रौब गालिब करने का आदी पुलिसवाला है।