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वोट से तय होगा रावण के कुनबे के साथ किसका होगा दहन, दर्शकों के लिए 120 फुट से बड़ा होगा मंच

Fri, 05 Oct 2018 04:29 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 05 Oct 2018 04:29 AM IST
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Vote will decide who will be burnt with Ravana in this dussehra
रावण

हर वर्ष समसामायिक मुद्दों को लेकर राजधानी में रामलीला आयोजक पुतला दहन करते हैं। लेकिन पूर्वी दिल्ली के इंद्रप्रस्थ स्थित डीडीए ग्राउंड पर 10 अक्टूबर से शुरू होने जा रहे रामलीला महोत्सव में 19 अक्टूबर को रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ चौथे पुतले के रूप में वाट्सएप का आतंक, कथित बलात्कारी बाबा, पारिवारिक बलात्कारी विषय को दर्शकों के समक्ष रखा जाएगा। जिस विषय को सर्वाधिक वोट मिलेंगे, उसी पर आधारित चौथा पुतला दहन किया जाएगा। इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी मौजूद रहेंगे।

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गुरुवार को श्रीरामलीला कमेटी इंद्रप्रस्थ के प्रधान सुरेश बिंदल ने बताया कि पूरी दिल्ली में सिर्फ यहीं चौथे पुतले का दहन किया जाता है। कार्यक्रम में आनंद रामायण का मंचन भी होगा, जिसमें शिक्षक और महिला एवं पुरुष पार्षद भी पात्र निभाएंगे। इसमें प्रीत विहार से पार्षद बबीता खन्ना शबरी, लक्ष्मी नगर से पार्षद संतोष पाल केवट, आईपी एक्सटेंशन से पार्षद अपर्णा गोयल, मंडावली से पार्षद शशि चांदना, पूर्व पार्षद गीता शर्मा सहित अन्य 11 महिला पार्षद सीता विदाई पर परिवार प्रबंधन को लेकर शिक्षा का संदेश भी देंगी। हर वर्ष यहां रामलीला में करीब 50 से 70 हजार दर्शक एकत्रित होते हैं। यूपी बॉर्डर होने के चलते गाजियाबाद, नोएडा तक के लोग यहां आते हैं। इसलिए सुरक्षा के लिहाज से विशेष इंतजाम भी किए गए हैं। अबकी बार एलईडी बल्बों से 1 हजार किलो वॉट बिजली की खपत बचाने का प्रयास किया जाएगा।       
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रावण के साथ राम नृत्य शिव स्तुति का मंचन
भगवान शिव के परमभक्त रावण से सभी भलीभांति परिचित हैं, लेकिन इंद्रप्रस्थ की रामलीला में दर्शकों को रावण के साथ भगवान श्रीराम भी देवों के देव भोले भंडारी शिव की संगीतमयी प्रस्तुति देते दिखाई देंगे। प्रचार मंत्री राजीव गुगलानी ने बताया कि आनंद रामायण का मंचन 11 अक्टूबर को होगा। इसी दौरान ये मंचन भी देखने को मिलेगा।       
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...तो इसलिए जरूरी होता है संवाद
कहा जाता है कि राजा दशरथ अपनी तीनों रानियों में सबसे ज्यादा स्नेह कैकयी से करते थे। शायद इसीलिए दरबार में पहुंचने का अधिकार राजा के साथ कैकयी को था। बावजूद इसके रामतिलक की सूचना उन्हें नहीं मिली थी, जिसका लाभ मंथरा को मिला। उस वक्त संवाद स्थापित होता तो शायद रामलीला का स्वरूप ही कुछ और होता। इस कथन के साथ सुरेश बिंदल ने बताया कि परिवार में संवाद जरूरी है। इसलिए उन्होंने रामायण में संवाद को लेकर बाकायदा पांच मंचन तय किए हैं। इसमें ऋषि विश्वामित्र-लक्ष्मण, कैकयी-मंथरा, राम-भरत का चित्रकूट में संवाद, परशुराम-राम और रावण-कुंभकर्ण संवाद शामिल हैं।       

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