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Delhi: यूपीएससी अभ्यर्थी को हुई द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वाली बीमारी, अस्पताल में चल रहा इलाज
Thu, 08 Aug 2024 07:42 AM IST
विजय पुंडीर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विजय पुंडीर
Updated Thu, 08 Aug 2024 07:42 AM IST
सार
दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल ने बताया कि पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों में पाइलोनिडल साइनस नामक बीमारी मिली थी। सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे 21 वर्षीय एक अभ्यर्थी में यह बीमारी पाई गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : istock
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विस्तार
एक यूपीएससी अभ्यर्थी में पाइलोनिडल साइनस नामक बीमारी पाई गई है। बताया जा रहा है कि पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों में यह बीमारी पाई गई थी। 21 वर्षीय अभयर्थी को इलाज के लिए दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
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पायलोनिडल साइनस - एक दर्दनाक स्थिति जिसमें त्वचा के नीचे एक गुहा में टूटे हुए बालों के संग्रह के कारण टेलबोन के पास बार-बार मवाद बनने की समस्या पैदा हो जाती है। जिसे जीपर्स बॉटम भी कहा जाता है। सर गंगा राम अस्पताल ने बताया कि पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सैनिकों में यह बीमारी मिली थी।
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लेप्रोस्कोपिक और लेजर सर्जरी विभाग के तरुण मित्तल ने कहा कि यह स्थिति संभवतः इसलिए विकसित हुई क्योंकि छात्र लाइब्रेरी की कुर्सियों पर घंटों बैठकर पढ़ाई करता था। आखिरकार, उसे अपने नितंब की दरार में दर्दनाक सूजन का अनुभव होने लगा। छात्र की सर्जरी की गई है।
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सर्जरी करने वाले मित्तल ने कहा, 'छात्र की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, हमने छात्र के लिए एक आदर्श समाधान के रूप में ईपीएसआईटी (एंडोस्कोपिक पिलोनिडल साइनस ट्रैक्ट एब्लेशन सर्जरी) को चुना ताकि वह जल्दी से ठीक हो सके और अपनी पढ़ाई पर वापस लौट सके।