स्वाइन फ्लू से फेफड़ों को खतरा: बुखार-खांसी के बाद सांस फूलने लगे तो हो जाएं सावधान, ये लोग अधिक खतरे में
स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी शामिल हैं। कुछ मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
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स्वाइन फ्लू कुछ मरीजों के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। संक्रमण बढ़ने पर यह फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और सांस से जुड़ी गंभीर परेशानी पैदा कर सकता है। ऐसे में फ्लू के लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। खासतौर पर बुजुर्गों, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों और पहले से गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
फ्लू के सामान्य लक्षण
स्वाइन फ्लू के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी शामिल हैं। कुछ मरीजों में संक्रमण बढ़ने पर सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। इसलिए लगातार तेज बुखार, खांसी या सांस लेने में दिक्कत होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
सभी को वैक्सीन की जरूरत नहीं
फ्लू से बचाव के लिए वैक्सीन एक महत्वपूर्ण उपाय हो सकती है। फ्लू वैक्सीन संक्रमण के साथ गंभीर बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अनुसार फ्लू वैक्सीन सभी लोगों के लिए जरूरी नहीं है।
इन लोगों को वैक्सीन की जरूरत
65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग और गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित मरीज डॉक्टर की सलाह से फ्लू वैक्सीन लगवाने पर विचार कर सकते हैं। इन लोगों में फ्लू का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए बचाव के उपायों पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
बरतें ये सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लू के मौसम में भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना और हाथों की साफ-सफाई रखना संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। लक्षण गंभीर होने पर खुद से दवा लेने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।