यहां बिना PPE किट्स के मरीजों की जांच कर रहे हैं डॉक्टर, कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ा
- मौलाना आजाद डेंटल कॉलेज के डॉक्टरों की परेशानी
- मुंह खोलकर करना है इलाज, लेकिन संक्रमण से बचने का कोई उपाय नहीं
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डॉक्टरों को इस दौरान पीपीई किट्स मुहैया नहीं कराई गई हैं, जिसके कारण उनमें कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। अनेक स्वास्थ्यकर्मियों के कोरोना की चपेट में आने की खबरों के बीच डॉक्टरों की मांग है कि उन्हें भी पीपीई किट्स मुहैया कराया जाए।
मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के डॉक्टर सचिन ने अमर उजाला को बताया कि उन्हें लोगों के दांतों का इलाज करना होता है, जिसके लिए मरीजों का मुंह खोलना पड़ता है। इलाज के दौरान मरीजों के थूक-लार से डॉक्टरों के संपर्क में आने का खतरा हमेशा बना रहता है।
लेकिन इस खतरे के बाद भी उन्हें पीपीई किट्स नहीं दी जा रही हैं। इस डेंटल कॉलेज में रोज सुबह 08:30 से 11 बजे तक ओपीडी सेवा दी जाती है। इसके अलावा इमरजेंसी सेवाएं भी हमेशा चलती रहती हैं।
पीपीई की बजाय यह किट पहन रहे डॉक्टर
अस्पताल के डॉक्टरों को डेंटल मरीजों की देखभाल के दौरान सामान्य किट पहनने के लिए दी जा रही है। इसमें गाउन, हेड कैप, शील्ड और फेसमास्क होता है। लेकिन पीपीई किट्स की तरह यह चारों तरफ से कवर नहीं होता, जिसके कारण इसे पहनने के बाद भी संक्रमण की गुंजाइश बनी रहती है।
मरीजों की होती है थर्मल स्क्रीनिंग
अस्पताल में इन दिनों दंत चिकित्सा के लिए आने वाले हर मरीज की कोरोना संक्रमण के लिहाज से प्राथमिक जांच की जाती है। हर मरीज के शरीर के तापमान का स्तर चेक किया जाता है। इसके अलावा उनमें सर्दी-खांसी होने की संभावना का भी पता किया जाता है।
लेकिन किसी व्यक्ति में कोरोना संक्रमण पता करने के लिए यह बहुत विश्वसनीय तरीका नहीं माना जाता है, क्योंकि भारत में कोरोना के 69 फीसदी तक मरीज बिना किसी लक्षणों वाले पाए गए हैं। ऐसे में किसी मरीज के बाहरी स्रोत से संक्रमित होने की स्थिति में डॉक्टरों के भी संक्रमित होने की संभावना बढ़ गई है।