राहुल गांधी की किसान यात्रा में भीड़ से दिखी ताकत लेकिन गुटबाजी से उठे सवाल
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने यूपी से दिल्ली तक की 26 दिनों की किसान यात्रा में जमीन से जुड़कर पार्टी की जड़ मजबूत करने की कोशिश की है। तो कांग्रेस के अलग-अलग राज्यों के नेता गुटबाजी से कांग्रेस की जड़ खोदने में जुटे हैं।
जंतर-मंतर पर किसान यात्रा का समापन भीड़ की दृष्टि से सफल माना जा सकता है लेकिन रास्ते में जगह-जगह गुटबाजी का ग्रहण दिखाई दिया। अगले साल यूपी, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड चुनाव में इसी गुटबाजी की चुनौती कांग्रेस रणनीतिकारों के सामने अहम होगी।
किसान यात्रा के समापन के दौरान बृहस्पतिवार को भैरो मार्ग पर मारपीट हो गई। राहुल गांधी का स्वागत भी फीका रहा क्योंकि प्रदेश अध्यक्ष समेत करीब डेढ़ दर्जन कार्यकर्ता इसमें घायल हो गए।
गुटबाजी के बीच बंटे नेताओं और अलग-अलग राज्यों के नेताओं को दिए गए स्वागत प्वाइंट से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन जंतर-मंतर पर भीड़ जुटाकर अपनी दमदारी दिखाने में सफल साबित हुए।
नेताओं ने अलग-अलग प्वाइंट पर दिखाई ताकत
पहले ये वाहवाही हरियाणा ले जाता था। यूपी के देवरिया से 3438 किमी की दूरी तय करके राहुल गांधी की किसान यात्रा दिल्ली में करीब दो घंटे देरी से पहुंची।
यहां पहला स्वागत अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दिल्ली से सचिव और विश्वास नगर से पूर्व विधायक नसीब सिंह ने किया। नसीब सिंह पीछे से ही बस में बैठकर आए थे और राहुल गांधी के साथ बस के गेट पर हाथ हिलाते निकले।
यहां राहुल गांधी ने समर्थकों को संबोधित भी किया। अगला प्वाइंट पूर्व सांसद संदीप दीक्षित और उनके समर्थकों का हसनपुर डिपो पर था, कड़कड़ी मोड़ पर भी उन्हीं के समर्थक नेता थे।
निर्माण विहार पर पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरविंद सिंह ने ताकत दिखाई तो आईटीओ पर पूर्व सांसद जेपी अग्रवाल की ताकत थी। हर जगह गुटबाजी का असर दिखा। इसमें कोई प्वाइंट प्रदेश की तरफ से नहीं रखा गया था।
विकास मार्ग पर एक जगह मध्य प्रदेश के नेता ने भी मंच बनाया हुआ था। आगे विजय घाट पर पंजाब, राजघाट पर राजस्थान-उत्तराखंड और भैरो मार्ग पर हरियाणा को जिम्मेदारी दी गई थी।