कोरोना संक्रमित समझ बेटों ने बीमार मां-बाप को किया कमरे में बंद, मौत
- डासना के रफीकाबाद में सामने आया बेटों का अमानवीय चेहरा
- सांस लेने में हो रही थी परेशानी, डॉक्टरों के कहने पर भी नहीं कराई जांच
- स्वास्थ्य विभाग ने घर के बाकी लोगों का टेस्ट कराने की बात कही
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बीमार मां-बाप का इलाज कराने के बजाय कलयुगी बेटों ने उन्हें कोरोना संक्रमित समझ कमरे में बंद कर दिया। दो दिन तक कमरे में बंद बुजुर्ग दंपती ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। दोनों बुजुर्ग की मौत के बाद पड़ोसियों को घटना की जानकारी हुई। अब स्वास्थ्य विभाग ने घर के बाकी लोगों का टेस्ट कराने की बात कही है।
डासना के रफीकाबाद में बुजुर्ग महिला की पिछले एक सप्ताह से तबीयत खराब थी। सांस लेने में परेशानी होने पर बेटे इलाज के लिए पिलखुवा के एक निजी अस्पताल ले गए। अस्पताल में डॉक्टर ने महिला की कोरोना जांच कराने की सलाह दी, लेकिन परिजन जांच कराने के बजाए वापस ले आए और घर के एक कमरे में सबसे अलग रख दिया। महिला का पति उनकी देखरेख करने लगा।
इस दौरान उनकी भी तबीयत खराब हो गई। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सक ने उनकी भी कोरोना जांच कराने की सलाह दी, लेकिन बेटे उन्हें भी बिना जांच कराए घर ले आए और मां के साथ पिता को भी उसी कमरे में बंद कर दिया। ज्यादा तबीयत बिगड़ी तो प्राइवेट डॉक्टर से घर में ही ऑक्सीजन भी लगवा दी लेकिन अस्पताल ले जाने की जहमत नहीं उठाई।
इलाज के अभाव में बुधवार को बुजुर्ग पति और बृहस्पतिवार को बुजुर्ग महिला (पत्नी) की मौत हो गई। दोनों की मौत के बाद पड़ोसियों को घटना की जानकारी हुई। स्थानीय लोगों की मानें तो बुजुर्ग के चार बेटे और बहू हैं, इसके बावजूद कोई भी उनके पास नहीं गया। उधर, सीएमओ डॉ. एनके गुप्ता का कहना है कि दोनों के मौत की जानकारी नहीं है, लेकिन टीम भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी। अगर घर में किसी अन्य सदस्य में इस तरह के लक्षण हैं तो उनकी जांच कराई जाएगी।
मुरादनगर में भी बेटे ने नहीं कराया मां का इलाज, मौत
बेटे के अमानवीयता की दूसरी घटना मुरादनगर में सामने आई। यहां भी बुजुर्ग मां के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि होने पर बेटे ने उन्हें अलग कमरे में बंद कर दिया। पड़ोसियों की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो बुजुर्ग महिला की हालत देख दंग रह गई। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम हो रहा था। गंभीर स्थिति में महिला को लाकर संतोष अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
गलत सूचनाओं के कारण लोग हो रहे भयभीत
वरिष्ठ काउंसलर डॉ. संजीव त्यागी का कहना है कि इस समय कोरोना इलाज के बारे में सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी सर्कुलेट हो रही है। यही कारण है कि लोगों में भय अधिक है। गलत जानकारी के कारण ही लोगों में कोरोना को लेकर डर और तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में कई बार लोग संक्रमित का समय से इलाज न कराकर उसे छुपा लेते हैं। चाहे वह मां-बाप ही क्यों न हों। ऐसे में जरूरत है कि हम गलत सूचनाओं से बचें और डाक्टरों की सलाह मानें।
लोगों में डर के साथ ही स्वार्थपरता भी बढ़ती जा रही है। जबकि कोरोना ही नहीं किसी भी रोग की चपेट में आने पर लोगों को अपनत्व की जरूरत होती है। संक्रमण से बचने के लिए एक निश्चित दूरी बनाने के बाद भी लोगों को एकाकीपन में नहीं छोड़ना चाहिए बल्कि मरीज को मानसिक रूप से प्रोत्साहित करना चाहिए, इससे वह जल्दी स्वस्थ होगा।
-डॉ. हेमिका अग्रवाल, मनोचिकित्सक