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कलानौर में समय अवधि पर क्यों नहीं करवाए पंचायत चुनाव : हाईकोर्ट
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। गुरदासपुर जिले के गांव कलानौर में तय अवधि पर पंचायत चुनाव न होने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और चुनाव आयोग को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता महकप्रीत सिंह ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि तुरंत चुनाव की अधिसूचना जारी कर निश्चित समय सीमा में मतदान कराया जाए। याचिका में कहा गया है कि गांव में पिछली बार ग्राम पंचायत चुनाव जुलाई 2013 में हुए थे।
संविधान के और पंजाब पंचायती राज अधिनियम के मुताबिक हर पंचायत का कार्यकाल पांच साल होता है और नए चुनाव कार्यकाल समाप्त होने से पहले कराना जरूरी है। इस आधार पर 2018 में चुनाव होने चाहिए थे लेकिन अब तक चुनाव नहीं कराए गए। याची ने दलील दी कि 2018 और 2024 में पंजाब में पंचायत चुनाव हुए लेकिन कलानौर को हर बार चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
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यहां तक कि 27 जुलाई 2025 को राज्यभर में हुए उपचुनाव में भी गांव को शामिल नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि पंचायत न होने से गांव वाले न केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं उठा पा रहे।
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चंडीगढ़। गुरदासपुर जिले के गांव कलानौर में तय अवधि पर पंचायत चुनाव न होने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और चुनाव आयोग को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
याचिकाकर्ता महकप्रीत सिंह ने हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिया जाए कि तुरंत चुनाव की अधिसूचना जारी कर निश्चित समय सीमा में मतदान कराया जाए। याचिका में कहा गया है कि गांव में पिछली बार ग्राम पंचायत चुनाव जुलाई 2013 में हुए थे।
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संविधान के और पंजाब पंचायती राज अधिनियम के मुताबिक हर पंचायत का कार्यकाल पांच साल होता है और नए चुनाव कार्यकाल समाप्त होने से पहले कराना जरूरी है। इस आधार पर 2018 में चुनाव होने चाहिए थे लेकिन अब तक चुनाव नहीं कराए गए। याची ने दलील दी कि 2018 और 2024 में पंजाब में पंचायत चुनाव हुए लेकिन कलानौर को हर बार चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखा गया।
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यहां तक कि 27 जुलाई 2025 को राज्यभर में हुए उपचुनाव में भी गांव को शामिल नहीं किया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि पंचायत न होने से गांव वाले न केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हैं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं उठा पा रहे।