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Noida News: लाइन बिछाने का खर्च सुन डूब क्षेत्र में सर्वे कराने भी नहीं पहुंचे लोग
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एक पोल लगाने का एस्टीमेट 30 से 40 हजार रुपये, पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने में लाखों खर्च होने का अनुमान
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन देने के लिए विद्युत निगम की ओर से बनाई गई नई व्यवस्था को अब तक कोई आवेदक नहीं मिला है। बिजली की लाइन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने का खर्च खुद निवासियों को उठाना है। लाखों रुपये का खर्च आने के अनुमान के चलते एक भी व्यक्ति ने अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए सर्वे नहीं कराया है। ऐसे में डूब क्षेत्र में बिजली अब भी सिंडिकेट के बनाए इंफ्रास्ट्रक्चर के सहारे चल रही है। विद्युत निगम की नई व्यवस्था के मुताबिक, डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन लेने के इच्छुक लोगों को सबसे पहले निगम से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए सर्वे कराना होगा। सर्वे के बाद निगम की ओर से एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। इसमें बिजली के खंभे लगाने, लाइन बिछाने और अन्य जरूरी कार्यों का खर्च शामिल होगा। एस्टीमेट में तय पूरी राशि का भुगतान करने के बाद ही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराया जा सकेगा।
दो विकल्प, दोनों में निवासियों को करना होगा भुगतान:
विद्युत निगम ने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए दो विकल्प दिए हैं। पहले विकल्प में निवासी निगम के जरिये ही काम करा सकते हैं। इसमें एस्टीमेट के मुताबिक 100 प्रतिशत खर्च निवासी को देना होगा। दूसरे विकल्प में निजी ठेकेदार के जरिये काम कराने की सुविधा है। हालांकि, यह काम भी विद्युत निगम की निगरानी में ही होगा। इस विकल्प में निवासी को एस्टीमेट की 15 प्रतिशत राशि निगम को देनी होगी। शेष भुगतान और काम की शर्तें संबंधित व्यवस्था के मुताबिक पूरी करनी होंगी।
एक पोल पर 30 से 40 हजार का खर्च:
इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने में आने वाले खर्च का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक बिजली का पोल लगाने के लिए ही निगम की ओर से करीब 30 से 40 हजार रुपये का एस्टीमेट बनाया जाता है। ऐसे में कई खंभे लगाने और लंबी दूरी तक बिजली की लाइन बिछाने की जरूरत पड़ने पर कुल खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। इसी खर्च को देखते हुए अब तक किसी निवासी ने सर्वे कराने के लिए आवेदन नहीं किया है।
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डूब क्षेत्र में कनेक्शन देने की प्रक्रिया नियमित जारी है। जल्द कनेक्शन जारी किए जा सकें इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर शिविर लगाए गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए उपभोक्ता को ही खर्च अदा करना होगा।
-माेहित गोयल, अधिशासी अभियंता वाणिज्यिक विद्युत निगम।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन देने के लिए विद्युत निगम की ओर से बनाई गई नई व्यवस्था को अब तक कोई आवेदक नहीं मिला है। बिजली की लाइन और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने का खर्च खुद निवासियों को उठाना है। लाखों रुपये का खर्च आने के अनुमान के चलते एक भी व्यक्ति ने अब तक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए सर्वे नहीं कराया है। ऐसे में डूब क्षेत्र में बिजली अब भी सिंडिकेट के बनाए इंफ्रास्ट्रक्चर के सहारे चल रही है। विद्युत निगम की नई व्यवस्था के मुताबिक, डूब क्षेत्र में बिजली कनेक्शन लेने के इच्छुक लोगों को सबसे पहले निगम से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए सर्वे कराना होगा। सर्वे के बाद निगम की ओर से एस्टीमेट तैयार किया जाएगा। इसमें बिजली के खंभे लगाने, लाइन बिछाने और अन्य जरूरी कार्यों का खर्च शामिल होगा। एस्टीमेट में तय पूरी राशि का भुगतान करने के बाद ही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराया जा सकेगा।
दो विकल्प, दोनों में निवासियों को करना होगा भुगतान:
विद्युत निगम ने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए दो विकल्प दिए हैं। पहले विकल्प में निवासी निगम के जरिये ही काम करा सकते हैं। इसमें एस्टीमेट के मुताबिक 100 प्रतिशत खर्च निवासी को देना होगा। दूसरे विकल्प में निजी ठेकेदार के जरिये काम कराने की सुविधा है। हालांकि, यह काम भी विद्युत निगम की निगरानी में ही होगा। इस विकल्प में निवासी को एस्टीमेट की 15 प्रतिशत राशि निगम को देनी होगी। शेष भुगतान और काम की शर्तें संबंधित व्यवस्था के मुताबिक पूरी करनी होंगी।
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एक पोल पर 30 से 40 हजार का खर्च:
इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने में आने वाले खर्च का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक बिजली का पोल लगाने के लिए ही निगम की ओर से करीब 30 से 40 हजार रुपये का एस्टीमेट बनाया जाता है। ऐसे में कई खंभे लगाने और लंबी दूरी तक बिजली की लाइन बिछाने की जरूरत पड़ने पर कुल खर्च लाखों रुपये तक पहुंच सकता है। इसी खर्च को देखते हुए अब तक किसी निवासी ने सर्वे कराने के लिए आवेदन नहीं किया है।
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डूब क्षेत्र में कनेक्शन देने की प्रक्रिया नियमित जारी है। जल्द कनेक्शन जारी किए जा सकें इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर शिविर लगाए गए हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कराने के लिए उपभोक्ता को ही खर्च अदा करना होगा।
-माेहित गोयल, अधिशासी अभियंता वाणिज्यिक विद्युत निगम।