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Noida News: गैस और श्रमिक न मिलने से उड़ रहा टेक्सटाइल उद्योग का रंग
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5,000 टेक्सटाइल यूनिटों में बिगड़ी स्थिति
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। टेक्सटाइल उद्योग पर इन दिनों दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है तो दूसरी ओर श्रमिकों की घटती संख्या ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है। शहर की करीब 5,000 टेक्सटाइल यूनिट इस स्थिति से जूझ रही हैं जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है।
उद्यमियों ने बताया कि कपड़ों की रंगाई और प्रोसेसिंग के लिए भाप (स्टीम) सबसे जरूरी होती है। इसके लिए आमतौर पर कॉमर्शियल गैस का उपयोग किया जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से गैस की आपूर्ति बाधित है। विकल्प के तौर पर केरोसिन का इस्तेमाल भी संभव नहीं हो पा रहा क्योंकि वह महंगा और कम प्रभावी है। ऐसे में कई यूनिट को उत्पादन कम करना पड़ा है या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
उद्यमियों का आरोप है कि पीएनजी कनेक्शन मिलने में लंबा समय लग रहा है। आवेदन के बाद भी महीनों तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही जिससे उद्योग को राहत नहीं मिल पा रही है। श्रमिकों की कमी ने स्थिति और गंभीर बना दी है। उद्यमियों के मुताबिक, कई श्रमिक काम छोड़कर अपने गांव लौट गए हैं या दूसरे क्षेत्रों में रोजगार तलाश रहे हैं। इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है और समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो गया है।
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टेक्सटाइल उद्योग को श्रमिकों और कॉमर्शियल सिलिंडर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। -राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
जिले की करीब 5 हजार से ज्यादा ऐसे उद्योग हैं जिन पर इसका सीधा असर पड़ा है। आगे स्थिति बिगड़ सकती है। -कुलदीप गोयल, उद्यमी
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। टेक्सटाइल उद्योग पर इन दिनों दोहरी मार पड़ रही है। एक ओर कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति लगभग ठप हो गई है तो दूसरी ओर श्रमिकों की घटती संख्या ने उद्यमियों की चिंता बढ़ा दी है। शहर की करीब 5,000 टेक्सटाइल यूनिट इस स्थिति से जूझ रही हैं जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ रहा है।
उद्यमियों ने बताया कि कपड़ों की रंगाई और प्रोसेसिंग के लिए भाप (स्टीम) सबसे जरूरी होती है। इसके लिए आमतौर पर कॉमर्शियल गैस का उपयोग किया जाता है लेकिन पिछले कुछ समय से गैस की आपूर्ति बाधित है। विकल्प के तौर पर केरोसिन का इस्तेमाल भी संभव नहीं हो पा रहा क्योंकि वह महंगा और कम प्रभावी है। ऐसे में कई यूनिट को उत्पादन कम करना पड़ा है या अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।
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उद्यमियों का आरोप है कि पीएनजी कनेक्शन मिलने में लंबा समय लग रहा है। आवेदन के बाद भी महीनों तक प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही जिससे उद्योग को राहत नहीं मिल पा रही है। श्रमिकों की कमी ने स्थिति और गंभीर बना दी है। उद्यमियों के मुताबिक, कई श्रमिक काम छोड़कर अपने गांव लौट गए हैं या दूसरे क्षेत्रों में रोजगार तलाश रहे हैं। इससे उत्पादन क्षमता प्रभावित हो रही है और समय पर ऑर्डर पूरा करना मुश्किल हो गया है।
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टेक्सटाइल उद्योग को श्रमिकों और कॉमर्शियल सिलिंडर की कमी का सामना करना पड़ रहा है। -राजीव बंसल, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, आईआईए
जिले की करीब 5 हजार से ज्यादा ऐसे उद्योग हैं जिन पर इसका सीधा असर पड़ा है। आगे स्थिति बिगड़ सकती है। -कुलदीप गोयल, उद्यमी