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1000 करोड़ खर्च कर नो पावर कट जोन बनेगा ग्रेनो
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा आने वाले दो साल में नो पावर कट जोन बन जाएगा। इसके लिए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने नोएडा पावर कंपनी लिमिडेट (एनपीसीएल) और उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) के साथ मिलकर कार्य योजना तैयार की है। इसके तहत एक हजार करोड़ रुपये की लागत से 400, 220 और 132 केवी के दो-दो विद्युत उपकेन्द्र बनेंगे, एक से ढाई साल में बनकर तैयार हो जाएंगे।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेन्द्र भूषण ने यूपीपीटीसीएल और एनपीसीएल के अफसरों के साथ बैठक में शहर में बिजली आपूर्ति से संबंधित परियोजना पर फैसला लिया। अधिकारियों ने बताया कि अमरपुर और मेट्रो डिपो के पास 400-400 केवी के दो विद्युत उपकेन्द्र बनेंगे। वहीं, ग्रेनो वेस्ट के जलपुरा और नॉलेज पार्क- 5 में 220 केवी के दो विद्युत उपकेन्द्र बनेंगे। औद्योगिक सेक्टर इकोटेक आठ व दस में 132 केवी के दो विद्युत उपकेन्द्र बनेंगे। 132 केवी के उपकेन्द्रों का निर्माण 12 माह, 220 केवी के उपकेन्द्रों का निर्माण 18 माह और 400 केवी उपकेन्द्र का निर्माण 30 माह में पूरा होगा। मेट्रो डिपो के विद्युत उपकेन्द्र से जलपुरा, नॉलेज पार्क पांच, इकोटेक आठ व दस के विद्युत उपकेन्द्रों को जोड़ा जाएगा। सभी विद्युत उपकेन्द्र बनने के बाद आगामी दस साल तक शहर में बिजली की किल्लत नहीं होगी।
नोएडा से ली जाएगी 100 मेगावाट बिजली
नोएडा के सेक्टर-123 स्थित 400 केवी के विद्युत उपकेन्द्र से 100 मेगावाट बिजली ग्रेटर नोएडा लेगा। इस पर करीब 40 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एनपीसीएल के अफसरों ने बताया कि दस मार्च तक अनुमति मिलने की उम्मीद है। उसके बाद लाइन बिछाने का काम शुरू होगा, जो तीन माह में पूरा होगा।
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इस गर्मी नहीं होगी बिजली की कमी
ग्रेटर नोएडा में पिछले साल बिजली की मांग 435 मेगावाट प्रति दिन तक पहुंची थी। इस बार 500 मेेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। नोएडा से 100 मेेगावाट मिलने के बाद एनपीसीएल के पास 550 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो जाएगी। इस कारण शहर में बिजली की कमी नहीं होगी।
उद्योगों को भी मिलेगी भरपूर बिजली
प्राधिकरण ने उद्योगों को ध्यान में रखकर यह कार्ययोजना तैयार की है। शहर में कई डाटा सेंटर को जमीन आवंटित की गई है। वहीं ओप्पो, वीवो समेत कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी उत्पादन शुरू करेंगी। साथ ही कई बहुराष्ट्ररीय कंपनियां आने वाली है। योजना के सिरे चढ़ने पर उन्हें बिजली की कमी नहीं होगी।
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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ नरेन्द्र भूषण ने यूपीपीटीसीएल और एनपीसीएल के अफसरों के साथ बैठक में शहर में बिजली आपूर्ति से संबंधित परियोजना पर फैसला लिया। अधिकारियों ने बताया कि अमरपुर और मेट्रो डिपो के पास 400-400 केवी के दो विद्युत उपकेन्द्र बनेंगे। वहीं, ग्रेनो वेस्ट के जलपुरा और नॉलेज पार्क- 5 में 220 केवी के दो विद्युत उपकेन्द्र बनेंगे। औद्योगिक सेक्टर इकोटेक आठ व दस में 132 केवी के दो विद्युत उपकेन्द्र बनेंगे। 132 केवी के उपकेन्द्रों का निर्माण 12 माह, 220 केवी के उपकेन्द्रों का निर्माण 18 माह और 400 केवी उपकेन्द्र का निर्माण 30 माह में पूरा होगा। मेट्रो डिपो के विद्युत उपकेन्द्र से जलपुरा, नॉलेज पार्क पांच, इकोटेक आठ व दस के विद्युत उपकेन्द्रों को जोड़ा जाएगा। सभी विद्युत उपकेन्द्र बनने के बाद आगामी दस साल तक शहर में बिजली की किल्लत नहीं होगी।
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नोएडा से ली जाएगी 100 मेगावाट बिजली
नोएडा के सेक्टर-123 स्थित 400 केवी के विद्युत उपकेन्द्र से 100 मेगावाट बिजली ग्रेटर नोएडा लेगा। इस पर करीब 40 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। एनपीसीएल के अफसरों ने बताया कि दस मार्च तक अनुमति मिलने की उम्मीद है। उसके बाद लाइन बिछाने का काम शुरू होगा, जो तीन माह में पूरा होगा।
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इस गर्मी नहीं होगी बिजली की कमी
ग्रेटर नोएडा में पिछले साल बिजली की मांग 435 मेगावाट प्रति दिन तक पहुंची थी। इस बार 500 मेेगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। नोएडा से 100 मेेगावाट मिलने के बाद एनपीसीएल के पास 550 मेगावाट बिजली उपलब्ध हो जाएगी। इस कारण शहर में बिजली की कमी नहीं होगी।
उद्योगों को भी मिलेगी भरपूर बिजली
प्राधिकरण ने उद्योगों को ध्यान में रखकर यह कार्ययोजना तैयार की है। शहर में कई डाटा सेंटर को जमीन आवंटित की गई है। वहीं ओप्पो, वीवो समेत कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी उत्पादन शुरू करेंगी। साथ ही कई बहुराष्ट्ररीय कंपनियां आने वाली है। योजना के सिरे चढ़ने पर उन्हें बिजली की कमी नहीं होगी।