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Noida News: लाल किले में जानें आजादी, संविधान से लेकर संस्कृति, विरासत, कला का संगम

Wed, 24 Jan 2024 07:54 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jan 2024 07:54 PM IST
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Know the confluence of freedom, constitution, culture, heritage and art in the Red Fort.
I-प्रधानमंत्री ने ' पराक्रम दिवस ' और 'भारत पर्व ' प्रदर्शनी का किया उद्घाटनI
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I-नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आजादी के संघर्ष से जुड़ने की कहानी भी जानेंI
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Iअमर उजाला ब्यूरोI
Iनई दिल्ली। IIदेश 75 वां गणतंत्र दिवस का जश्न मना रहा है। ऐसे में आजादी से लेकर संविधान लागू होने तक के संघर्ष की कहानी को जानने और भारतीय संस्कृति, विविधता में एकता, धरोहर, इतिहास, कला व विकास से रूबरू होना चाहते हैं तो लाल किले तक आना होगा। केंद्र सरकार ने यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन और संघर्ष पर आधारित सफर को ' पराक्रम दिवस' और भारत की विविधता में एकता, भाषा,संस्कृति व इतिहास को ' भारत पर्व ' नामक IIप्रदर्शनी में दिखाया है। I
Iप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले में आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किया है। पीएम ने कहा कि नेताजी का जीवन परिश्रम ही नहीं, पराक्रम की भी पराकाष्ठा है। उन्होंने आजादी के लिए अपने सपनों व IIआकांक्षाओं को छोड़ दिया। वे चाहते तो अपने लिए एक अच्छा जीवन चुन सकते थे। लेकिन उन्होंने अपने सपनों को भारत के संकल्प के साथ जोड़ दिया। वह जानते थे कि गुलामी सिर्फ शासन की ही नही, विचार व व्यवहार की भी होती है। इसलिए उन्होंने युवा पीढ़ी को जागरूक किया और मदर ऑफ डेमोक्रेसी के रूप में भारत की पहचान को विश्व के सामने रखा। I
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Iसन्यासी बनना चाहते थे नेताजी I
Iकेंद्रीय संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित 'पराक्रम दिवस' प्रदर्शनी में युवाओं को नेताजी की आवाज में हमें अंग्रेजों से मुक्ति पानी है...भी सुनने में मिलेगा। इसके अलावा एक फिल्म के माध्यम से युवाओं को यह भी जानने का मौका मिलेगा कि नेताजी बचपन में सन्यासी बनना चाहते थे। इसी दौरान देशभर में भ्रमण करते हुए उन्होंने अंग्रेजों के शासन में देश में गरीबी और शोषण देखा। इसके बाद उन्हाेंने फैसला लिया कि देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त करवाना ही सबसे बड़ी पूजा है। इस तरह वे देश की आजादी के संघर्ष से जुड़ गए। सबसे पहले गांधी जी से जुड़े, आईएनए गठन से लेकर ट्रायल भारत से रशिया, जापान होते हुए जर्मनी तक पहुंचने की भी जानकारी मिलेगी। यहां नेताजी के भाषण सुनने से लेकर उनके लिखे पत्र पढ़ने का मौका भी मिलेगा। I
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Iनेताजी के विचारों से ले सकेंगे प्रेरणा
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Iदर्शक नेताजी के साथ अपनी फोटो और उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने की प्रतिज्ञा भी ले सकते हैं। इसके अलावा एनएसडी की ओर 270 डिग्री थियेटर में 20 मिनट की ' मैं भी बाॅस हूं.' फिल्म देखने का भी मौका मिलेगा। IIदूसरी ओर, केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की ओर से भारत पर्व प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इसमें राज्यों की संस्कृति, विरासत, कला, इतिहास, खानपान व वेशभूषा को जानने का मौका मिलेगा। 26 जनवरी परेड में विभिन्न प्रदेशों की झांकियां भी इसी प्रदर्शनी में रखी जाएंगी। बच्चों को खाने-पीने के साथ प्रदर्शनी में फोटो का भी मौका मिलेगा। I
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