खुलासा: फ्लैट में ठग कंपनी, 10 लैपटॉप... 30 ATM कार्ड और एक करोड़ का चेक; अमीर बनाने वाले आठ ठग गिरफ्तार
ग्रेटर नोएडा पुलिस ने सोमवार को निवेश कर अमीर बनने का सपना दिखाने वाली ठग कंपनी का खुलासा किया है। इस मामले में पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। ठग ज्वेलरी और घड़ियों में निवेश का झांसा दिया करता था।
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ईकोटेक-1 कोतवाली पुलिस ने सोमवार को ज्वेलरी और घड़ियों में निवेश कर जल्दी अमीर बनने का सपना दिखाकर ठगने वाली ठग कंपनी का खुलासा कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी क्यूनेट/विहान नाम की फर्जी मल्टीलेवल मार्केटिंग कंपनी के जरिए निवेश कराने के नाम पर लोगों को करोड़पति बनाने का सपना दिखाते थे। फिर लाखों की ठगी कर लेते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से 10 लैपटॉप, 13 मोबाइल फोन, पांच टैबलेट, 30 एटीएम कार्ड, एक करोड़ रुपये का चेक, चार महंगी घड़ियां और एक स्विफ्ट कार बरामद की है।
एडिशनल डीसीपी ग्रेटर नोएडा सुधीर कुमार ने बताया कि आरोपी सेक्टर-1 और सेक्टर-4 के फ्लैटों में कुछ लोग ऑनलाइन फ्रॉड कंपनी चला रहे थे। पुलिस टीम ने दबिश देकर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान पश्चिमी मेदिनीपुर बंगाल के विधान डागर (27), रांची झारखंड के सतीश शाव (29), बनासकांठा गुजरात के कल्पेश राजू भाई (23), लुधियाना पंजाब के गुरविंदर सिंह (29), मुक्तसर पंजाब के गुरदीप सिंह (39), पश्चिमी मेदिनीपुर बंगाल के कौशिक डागर (31), पूर्व मेदिनीपुर बंगाल के गणेश बेरा (23) और पश्चिमी मेदिनीपुर के तापस धारा (28) के रूप में हुई है।
सभी आरोपी विभिन्न राज्यों बंगाल, झारखंड, गुजरात और पंजाब से ताल्लुक रखते हैं। फिलहाल ग्रेटर नोएडा वेस्ट की अलग-अलग सोसायटी में किराये पर फ्लैट लेकर रहते थे। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह सभी लोग मिलकर एक संगठित तरीके से लोगों को ऑनलाइन मीटिंग और प्रेजेंटेशन दिखाकर करोड़पति बनने का सपना दिखाते थे।
डॉलर और बिटकॉइन में ट्रांजेक्शन
आरोपी गूगल मीट पर ऑनलाइन मीटिंग करते थे। जिसमें कंपनी के प्रोडक्ट जैसे सोना, हीरे और घड़ियों को खरीदने और बेचने का झांसा देकर निवेश कराते थे। लोगों को कंपनी में शामिल होने के लिए करीब 1.5 लाख रुपये देने पड़ते थे। यह रकम गूगल मीट के दौरान भेजे गए लिंक के जरिए डॉलर या बिटकॉइन में जमा कराई जाती थी। जब निवेशकों को मुनाफा नहीं मिलता था, तो आरोपियों द्वारा और प्रोडक्ट खरीदने या लोन दिलाने की पेशकश की जाती थी। जिससे पीड़ित पूरी तरह जाल में फंस जाते थे।
सेना के जवान को भी बनाते थे निशाना
आरोपियों में से कई का सेना बैकग्राउंड भी है। जिसका फायदा उठाकर यह लोग सेना के जवानों से भी संपर्क करते थे और उन्हें भी निवेश के लिए फंसाते थे। आरोपियों का कहना था कि जल्दी अमीर बनने की चाह में लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते थे। क्यूनेट/विहान नाम की इस कंपनी के खिलाफ दिल्ली की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) में जांच चल रही है। इसके अलावा राजस्थान और मेघालय समेत अन्य राज्यों में भी इनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं।
बंगाल के युवक को ठगने के बाद दी थी धमकी
पीड़ित के भाई प्रवीण कुमार पाल ने केस दर्ज कराया था कि उनका चचेरा भाई निखिल कुमार पाल सितंबर-2024 में गांव चूहड़पुर में किराए पर रह रहा था। वहीं उसकी मुलाकात से हुई थी। आरोप है कि इन लोगों ने निखिल को बताया कि वह एक बड़ी कंपनी की फ्रेंचाइजी दिला सकते हैं। जिसमें घड़ियां, ज्वैलरी जैसे महंगे प्रोडक्ट बेचे जाते हैं और अच्छा कमीशन भी मिलता है। जितना ज्यादा पैसा लगाएगा। उतनी ही ज्यादा कमाई होगी और बदले में प्रोडक्ट भी मिलेंगे। निखिल ने आरोपियों के झांसे में आकर करीब 3.75 लाख और फिर दोबारा 3.75 लाख रुपये दिए। कुल मिलाकर साढ़े सात लाख रुपये देने के बाद न तो उसे कोई प्रोडक्ट मिला और न ही पैसे वापस हुए। जब पीड़ित ने पैसे वापस मांगे, तो कौशिक डांगर और उसके साथियों ने उसे जान से मारने की धमकी दे दी।