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Noida News: कासा ग्रीन्स-1 में फिर रुकी रजिस्ट्री, 75 फ्लैट खरीदारों की बढ़ी परेशानी
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- सात वर्षों से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे 75 फ्लैट खरीदार
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित कासा ग्रीन्स-1 सोसाइटी में फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं होने पर निवासियों ने विरोध जताया है। करीब सात वर्षों से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे 75 फ्लैट खरीदार अब दोबारा अनिश्चितता की स्थिति में पहुंच गए हैं। आरोप है कि लगातार प्रयासों और प्रशासनिक दबाव के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
सोसाइटी निवासी महेश यादव ने बताया कि सोसाइटी में लगभग 500 फ्लैटों की रजिस्ट्री वर्ष 2019 से लंबित थी। लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2024 में बिल्डर द्वारा पुनर्वास योजना के तहत बकाया राशि जमा करने की प्रक्रिया शुरू की गई। पहली किस्त जमा होने के बाद ए1, ए2 और ए9 टावरों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) प्राप्त हुआ और रजिस्ट्री की अनुमति मिली। इसके बाद दूसरी किस्त जमा होने पर कुल 425 फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हुआ। बिल्डर ने प्रशासन और प्राधिकरण के दबाव में जनवरी 2026 में अंतिम किस्त भी जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद शेष 75 फ्लैटों की रजिस्ट्री की अनुमति जारी नहीं हो सकी। प्राधिकरण के वित्त विभाग ने बिल्डर पर अतिरिक्त मुआवजे के रूप में करीब 8.5 करोड़ रुपये की नई देयता निर्धारित कर दी, जिसके बाद प्रक्रिया रुक गई।
रजिस्ट्री से जुड़ी फाइलों का अनुमोदन लटका : खरीदारों का कहना है कि पिछले तीन-चार महीनों से रजिस्ट्री से जुड़ी फाइलों का अनुमोदन लंबित है। जिन फ्लैटों को पहले अनुमति मिल चुकी थी, उनकी रजिस्ट्री हो गई, लेकिन बाकी खरीदार अभी भी इंतजार कर रहे हैं। वहीं, बिल्डर ने अतिरिक्त मुआवजा वसूली के आदेश के खिलाफ न्यायालय से स्टे प्राप्त कर लिया है। खरीदारों का कहना है कि 3 सितंबर 2025 से लंबित रजिस्ट्री पर प्रतिदिन 100 रुपये विलंब शुल्क लगाया जा रहा है, जो अब तक लगभग 33 हजार रुपये प्रति फ्लैट तक पहुंच चुका है और लगातार बढ़ रहा है।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित कासा ग्रीन्स-1 सोसाइटी में फ्लैटों की रजिस्ट्री नहीं होने पर निवासियों ने विरोध जताया है। करीब सात वर्षों से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे 75 फ्लैट खरीदार अब दोबारा अनिश्चितता की स्थिति में पहुंच गए हैं। आरोप है कि लगातार प्रयासों और प्रशासनिक दबाव के बाद भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
सोसाइटी निवासी महेश यादव ने बताया कि सोसाइटी में लगभग 500 फ्लैटों की रजिस्ट्री वर्ष 2019 से लंबित थी। लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2024 में बिल्डर द्वारा पुनर्वास योजना के तहत बकाया राशि जमा करने की प्रक्रिया शुरू की गई। पहली किस्त जमा होने के बाद ए1, ए2 और ए9 टावरों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) प्राप्त हुआ और रजिस्ट्री की अनुमति मिली। इसके बाद दूसरी किस्त जमा होने पर कुल 425 फ्लैटों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ हुआ। बिल्डर ने प्रशासन और प्राधिकरण के दबाव में जनवरी 2026 में अंतिम किस्त भी जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद शेष 75 फ्लैटों की रजिस्ट्री की अनुमति जारी नहीं हो सकी। प्राधिकरण के वित्त विभाग ने बिल्डर पर अतिरिक्त मुआवजे के रूप में करीब 8.5 करोड़ रुपये की नई देयता निर्धारित कर दी, जिसके बाद प्रक्रिया रुक गई।
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रजिस्ट्री से जुड़ी फाइलों का अनुमोदन लटका : खरीदारों का कहना है कि पिछले तीन-चार महीनों से रजिस्ट्री से जुड़ी फाइलों का अनुमोदन लंबित है। जिन फ्लैटों को पहले अनुमति मिल चुकी थी, उनकी रजिस्ट्री हो गई, लेकिन बाकी खरीदार अभी भी इंतजार कर रहे हैं। वहीं, बिल्डर ने अतिरिक्त मुआवजा वसूली के आदेश के खिलाफ न्यायालय से स्टे प्राप्त कर लिया है। खरीदारों का कहना है कि 3 सितंबर 2025 से लंबित रजिस्ट्री पर प्रतिदिन 100 रुपये विलंब शुल्क लगाया जा रहा है, जो अब तक लगभग 33 हजार रुपये प्रति फ्लैट तक पहुंच चुका है और लगातार बढ़ रहा है।
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