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चकबंदी घोटाला ------------- सरकारी जमीन में 1344 करोड़ का हुआ था हेरफेर
Updated Fri, 12 Oct 2018 06:49 AM IST
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चकबंदी घोटाला
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1344 करोड़ की सरकारी जमीन की हुई थी हेराफेरी
- जिला प्रशासन जल्द जारी करेगा आरसी, फिर से सरकार के नाम पर चढ़ेगी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। दनकौर, अट्टा फतेहपुर व जगनपुर-अफजलपुर गांव में चकबंदी घोटाले में 1344 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन की हेरफेर की बात सामने आई है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। हालांकि यह रिपोर्ट एक साल पहले तैयार हो गई है, लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिला प्रशासन शीघ्र आरसी जारी करने की बात कह रहा है।
दरअसल, 1982 से 2011 के बीच इन तीनों गांवों की चकबंदी की गई थी। चकबंदी अधिकारी व कर्मचारियों के साथ कुछ स्थानीय लोगों ने भी मिलीभगत कर सरकारी जमीन अपने नाम करा ली थी। अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी खुद के परिवारजनों के नाम से जमीन खरीदे। बाद में उसे प्राधिकरण ने अधिग्रहित किया और मुआवजा बांटा।
सूत्र बताते हैं कि चकबंदी से पहले जगनपुर अफजलपुर गांव में सरकारी जमीन का रकबा 451 बीघा था, जो बाद में मात्र छह बीघा रह गया। ग्राम समाज की परती भूमि 49 बीघा जमीन में से चकबंदी होने पर मात्र तीन बीघा ही बची। इसी तरह नदी क्षेत्र की 25 बीघा जमीन में से 8 बीघा, नाले की 22 बीघा जमीन में सात, 98 बीघा बंजर भूमि में 0.08 बीघा बची। कुआं, तालाब, चारागाह की 80 बीघा जमीन फर्जीवाड़े की पूरी तरह से भेंट चढ़ गई।
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इसके अलावा अट्टा फतेहपुर में ग्राम समाज की 260 बीघा जमीन में सिर्फ 45 बीघा जमीन बची, जबकि दनकौर में 2400 बीघा में से मात्र 325 बीघा जमीन बची। यमुना प्राधिकरण ने 2009 से 2013 के दौरान जमीन का अधिग्रहण व पुर्नग्रहण किया। जगनपुर अफजलपुर में 674 हेक्टेयर, अट्टा फतेहपुर में 135 हेक्टेयर, दनकौर में 648 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की और 880 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से 1344 करोड़ रुपये बांट दिया। मौजूदा दर के हिसाब से यह रकम करीब 2903 करोड़ रुपये है।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थी एसआईटी की जांच
चकबंदी के दौरान सरकारी जमीन की बंदरबांट के खिलाफ बोधिसत्व समाज सेवा संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने एसआइटी से जांच कराने के आदेश दिए थे। एसआईटी ने जांच पूरी की और अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी। करीब दो साल तक यह रिपोर्ट शासन में धूल फांकती रही। पिछले साल रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अब जिला प्रशासन फर्जीवाड़ा कर मुआवजा उठाने वालों के खिलाफ आरसी जारी करने जा रहा है। साथ ही जिन लोगों ने फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज कराए थे। सरकारी दस्तावेजों में उनके नाम हटाकर दोबारा इस जमीन को सरकार के नाम दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा जमीन का नक्शा भी नए सिरे से तैयार होगा। बता दें, कि इसी मामले में चकबंदी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ दनकौर कोतवाली में पहले ही एफआइआर दर्ज हो चुकी है।
कोट
एसआईटी जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनसे मुआवजे की वसूली के लिए आरसी शीघ्र जारी की जाएगी, जिन लोगों ने नाम सही जमीन दर्ज है, उनकी सूची तैयार की जा रही है। - बलराम सिंह, एडीएम एलए, गौतमबुद्ध नगर
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चकबंदी घोटाला
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1344 करोड़ की सरकारी जमीन की हुई थी हेराफेरी
- जिला प्रशासन जल्द जारी करेगा आरसी, फिर से सरकार के नाम पर चढ़ेगी जमीन
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। दनकौर, अट्टा फतेहपुर व जगनपुर-अफजलपुर गांव में चकबंदी घोटाले में 1344 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन की हेरफेर की बात सामने आई है। एसआईटी की जांच रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। हालांकि यह रिपोर्ट एक साल पहले तैयार हो गई है, लेकिन अब तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिला प्रशासन शीघ्र आरसी जारी करने की बात कह रहा है।
दरअसल, 1982 से 2011 के बीच इन तीनों गांवों की चकबंदी की गई थी। चकबंदी अधिकारी व कर्मचारियों के साथ कुछ स्थानीय लोगों ने भी मिलीभगत कर सरकारी जमीन अपने नाम करा ली थी। अधिकारियों व कर्मचारियों ने भी खुद के परिवारजनों के नाम से जमीन खरीदे। बाद में उसे प्राधिकरण ने अधिग्रहित किया और मुआवजा बांटा।
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सूत्र बताते हैं कि चकबंदी से पहले जगनपुर अफजलपुर गांव में सरकारी जमीन का रकबा 451 बीघा था, जो बाद में मात्र छह बीघा रह गया। ग्राम समाज की परती भूमि 49 बीघा जमीन में से चकबंदी होने पर मात्र तीन बीघा ही बची। इसी तरह नदी क्षेत्र की 25 बीघा जमीन में से 8 बीघा, नाले की 22 बीघा जमीन में सात, 98 बीघा बंजर भूमि में 0.08 बीघा बची। कुआं, तालाब, चारागाह की 80 बीघा जमीन फर्जीवाड़े की पूरी तरह से भेंट चढ़ गई।
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इसके अलावा अट्टा फतेहपुर में ग्राम समाज की 260 बीघा जमीन में सिर्फ 45 बीघा जमीन बची, जबकि दनकौर में 2400 बीघा में से मात्र 325 बीघा जमीन बची। यमुना प्राधिकरण ने 2009 से 2013 के दौरान जमीन का अधिग्रहण व पुर्नग्रहण किया। जगनपुर अफजलपुर में 674 हेक्टेयर, अट्टा फतेहपुर में 135 हेक्टेयर, दनकौर में 648 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की और 880 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से 1344 करोड़ रुपये बांट दिया। मौजूदा दर के हिसाब से यह रकम करीब 2903 करोड़ रुपये है।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई थी एसआईटी की जांच
चकबंदी के दौरान सरकारी जमीन की बंदरबांट के खिलाफ बोधिसत्व समाज सेवा संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने एसआइटी से जांच कराने के आदेश दिए थे। एसआईटी ने जांच पूरी की और अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी। करीब दो साल तक यह रिपोर्ट शासन में धूल फांकती रही। पिछले साल रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजकर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। अब जिला प्रशासन फर्जीवाड़ा कर मुआवजा उठाने वालों के खिलाफ आरसी जारी करने जा रहा है। साथ ही जिन लोगों ने फर्जी तरीके से अपने नाम दर्ज कराए थे। सरकारी दस्तावेजों में उनके नाम हटाकर दोबारा इस जमीन को सरकार के नाम दर्ज किया जाएगा। इसके अलावा जमीन का नक्शा भी नए सिरे से तैयार होगा। बता दें, कि इसी मामले में चकबंदी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ दनकौर कोतवाली में पहले ही एफआइआर दर्ज हो चुकी है।
कोट
एसआईटी जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनसे मुआवजे की वसूली के लिए आरसी शीघ्र जारी की जाएगी, जिन लोगों ने नाम सही जमीन दर्ज है, उनकी सूची तैयार की जा रही है। - बलराम सिंह, एडीएम एलए, गौतमबुद्ध नगर