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Noida News: बिल्डरों को हर तीन माह में बैंक खातों का देना होगा ब्यौरा
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- यूपी रेरा ने प्रोजेक्टों के बैंक अकाउंट के नियमों में किया संशोधन, आदेश जारी
- गलत प्रमाण पत्र देने वाले सीए या आर्किटेक पर भी होगी कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अब बिल्डरों को प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट के साथ हर तीन माह में बैंक अकाउंट का ब्यौरा भी देना होगा। उन्हें यह बताना होगा कि प्रोजेक्ट के अकाउंट में कितना पैसा है कितना खर्च हो गया और कितना कर्ज लिया गया है। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपीरेरा) ने बैंकों की भी जिम्मेदारी भी तय की है। बैंक प्रोजेक्ट के अकाउंट में रेरा नियमों के पालन की निगरानी करेंगे। वहीं अब बैंक प्रोजेक्ट के अकाउंट में अस्थायी रोक नहीं लगा सकेंगे।
बिल्डर प्रोजेक्ट का पैसा कहीं और खर्च कर रहे थे। इसकी शिकायत मिलने पर यूपी रेरा ने प्रोजेक्ट के बैंक अकाउंट को लेकर नियम लागू किए थे। जिसमें बिल्डर हेराफेरी कर रहे थे। लगातार शिकायतें आने के बाद अब यूपी रेरा ने प्रोजेक्टों के बैंक अकाउंट की नियमावली में संशोधन किया है। यूपी रेरा के अधिकारियों ने बताया कि एक प्रोजेक्ट के तीन बैंक अकाउंट खोलने की व्यवस्था पहले से थी। इनमें कलेक्शन, सेपरेट व ट्रांजेक्शन अकाउंट शामिल है। अब नए नियम के तहत खरीदारों से आने वाली धनराशि का 70 प्रतिशत हिस्सा सेपरेट अकाउंट में भेजा जाएगा। इस धनराशि का प्रयोग केवल भूमि और निर्माण कार्यों पर किया जाएगा। कलेक्शन अकाउंट की निगरानी बढ़ाई है। चेक बुक, डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। वहीं बैंक और एनबीसीसी से अगर ऋण लिया गया है तो बिल्डर को उसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी अनिवार्य होगी।
रेरा पोर्टल पर हर तिमाही बैंक खाता, ऋण और खर्चों का खुलासा करना होगा। तिमाही रिपोर्ट देनी होगी। यूपी रेरा ने भी बैंकों की जिम्मेदारी तय की है। यूपी रेरा ने सेपरेट अकाउंट से निकासी के लिए तीन प्रमाण पत्र जरूरी कर दिए हैं। इसके लिए आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाण पत्र जरूरी होंगे। अधिकारियों ने बताया कि अगर बिल्डर को प्रोजेक्ट का बैंक खाता बदलना है तो इसके लिए यूपी रेरा के फाइनल अप्रूवल की जरूरत होगी। ऐसा करने से प्रोजेक्ट निधि की पारदर्शिता व अनधिकृत फंड स्थानांतरण करने पर रोक लगेगी। यूपी रेरा ने कलेक्शन व सेपरेट अकाउंट पर बैंकों की कार्रवाई को सीमित किया है। अब बैंक खाते की धनराशि को किसी अन्य वित्तीय लेनदेन के नाम पर अस्थायी रोक नहीं लगा सकते हैं। इसका पैसा प्रोजेक्ट के निर्माण पर खर्च होगा। इससे खरीदारों के पैसों की सुरक्षा की जा सकेगी।
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पंजीकरण समाप्त हो चुके प्रोजेक्ट के बैंक खातों पर रोक
यूपी रेरा के अफसरों ने बताया कि जिन प्रोजेक्टों का पंजीकरण समाप्त हो चुका है या निरस्त कर दिया गया है। उनके कलेक्शन और सेपरेट अकाउंट का संचालन नहीं किया जा सकता है। इन खातों को तत्काल फ्रीज कर दिया जाएगा। यूपी रेरा की अनुमति और पंजीकरण विस्तार होने के बाद ही बैंक खातों का संचालन किया जा सकता है।
एओए को देनी होगी कॉमन एरिया की जिम्मेदारी
अफसरों ने बताया कि सेपरेट अकाउंट को प्रोजेक्ट पूरा होने पर यूपी रेरा की अनुमति के बाद ही बंद किया जा सकता है। इसकी अनुमति का आवेदन देना होगा। आवेदन के साथ यह भी प्रमाण देना होगा कि कॉमन एरिया एओए का सौंप दिया गया है। उसके बाद ही बिल्डर धनराशि निकलने के बाद खाते को बंद कर सकेंगे।
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- गलत प्रमाण पत्र देने वाले सीए या आर्किटेक पर भी होगी कार्रवाई
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अब बिल्डरों को प्रोजेक्ट की प्रगति रिपोर्ट के साथ हर तीन माह में बैंक अकाउंट का ब्यौरा भी देना होगा। उन्हें यह बताना होगा कि प्रोजेक्ट के अकाउंट में कितना पैसा है कितना खर्च हो गया और कितना कर्ज लिया गया है। उत्तर प्रदेश भूसंपदा विनियामक प्राधिकरण (यूपीरेरा) ने बैंकों की भी जिम्मेदारी भी तय की है। बैंक प्रोजेक्ट के अकाउंट में रेरा नियमों के पालन की निगरानी करेंगे। वहीं अब बैंक प्रोजेक्ट के अकाउंट में अस्थायी रोक नहीं लगा सकेंगे।
बिल्डर प्रोजेक्ट का पैसा कहीं और खर्च कर रहे थे। इसकी शिकायत मिलने पर यूपी रेरा ने प्रोजेक्ट के बैंक अकाउंट को लेकर नियम लागू किए थे। जिसमें बिल्डर हेराफेरी कर रहे थे। लगातार शिकायतें आने के बाद अब यूपी रेरा ने प्रोजेक्टों के बैंक अकाउंट की नियमावली में संशोधन किया है। यूपी रेरा के अधिकारियों ने बताया कि एक प्रोजेक्ट के तीन बैंक अकाउंट खोलने की व्यवस्था पहले से थी। इनमें कलेक्शन, सेपरेट व ट्रांजेक्शन अकाउंट शामिल है। अब नए नियम के तहत खरीदारों से आने वाली धनराशि का 70 प्रतिशत हिस्सा सेपरेट अकाउंट में भेजा जाएगा। इस धनराशि का प्रयोग केवल भूमि और निर्माण कार्यों पर किया जाएगा। कलेक्शन अकाउंट की निगरानी बढ़ाई है। चेक बुक, डेबिट कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। वहीं बैंक और एनबीसीसी से अगर ऋण लिया गया है तो बिल्डर को उसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करनी अनिवार्य होगी।
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रेरा पोर्टल पर हर तिमाही बैंक खाता, ऋण और खर्चों का खुलासा करना होगा। तिमाही रिपोर्ट देनी होगी। यूपी रेरा ने भी बैंकों की जिम्मेदारी तय की है। यूपी रेरा ने सेपरेट अकाउंट से निकासी के लिए तीन प्रमाण पत्र जरूरी कर दिए हैं। इसके लिए आर्किटेक्ट, इंजीनियर और चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाण पत्र जरूरी होंगे। अधिकारियों ने बताया कि अगर बिल्डर को प्रोजेक्ट का बैंक खाता बदलना है तो इसके लिए यूपी रेरा के फाइनल अप्रूवल की जरूरत होगी। ऐसा करने से प्रोजेक्ट निधि की पारदर्शिता व अनधिकृत फंड स्थानांतरण करने पर रोक लगेगी। यूपी रेरा ने कलेक्शन व सेपरेट अकाउंट पर बैंकों की कार्रवाई को सीमित किया है। अब बैंक खाते की धनराशि को किसी अन्य वित्तीय लेनदेन के नाम पर अस्थायी रोक नहीं लगा सकते हैं। इसका पैसा प्रोजेक्ट के निर्माण पर खर्च होगा। इससे खरीदारों के पैसों की सुरक्षा की जा सकेगी।
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पंजीकरण समाप्त हो चुके प्रोजेक्ट के बैंक खातों पर रोक
यूपी रेरा के अफसरों ने बताया कि जिन प्रोजेक्टों का पंजीकरण समाप्त हो चुका है या निरस्त कर दिया गया है। उनके कलेक्शन और सेपरेट अकाउंट का संचालन नहीं किया जा सकता है। इन खातों को तत्काल फ्रीज कर दिया जाएगा। यूपी रेरा की अनुमति और पंजीकरण विस्तार होने के बाद ही बैंक खातों का संचालन किया जा सकता है।
एओए को देनी होगी कॉमन एरिया की जिम्मेदारी
अफसरों ने बताया कि सेपरेट अकाउंट को प्रोजेक्ट पूरा होने पर यूपी रेरा की अनुमति के बाद ही बंद किया जा सकता है। इसकी अनुमति का आवेदन देना होगा। आवेदन के साथ यह भी प्रमाण देना होगा कि कॉमन एरिया एओए का सौंप दिया गया है। उसके बाद ही बिल्डर धनराशि निकलने के बाद खाते को बंद कर सकेंगे।