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अज्ञात शवों की पहचान के लिये प्रयोग किया जाये आधार बायो मैट्रिक
Updated Mon, 12 Nov 2018 05:17 AM IST
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अज्ञात शवों की पहचान के लिए
आधार बायोमेट्रिक का प्रयोग हो
- जनहित याचिका दायर कर केंद्र और यूआईडीएआई को निर्देश देने का किया आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अज्ञात शवों की पहचान के लिए आधार बायोमेट्रिक का प्रयोग करने के निर्देश केंद्र सरकार और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) को देने के लिए जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा है कि देश में हर साल हजारों अज्ञात शव मिलते हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाती। अगर आधार के जरिए इन शवों की पहचान हो जाती है तो इनके परिवार वाले सम्मानपूर्वक इनका अंतिम संस्कार कर पाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष दायर इस जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हो सकती है। याचिका अधिवक्ता अमित साहनी ने दायर की है। इसमें अज्ञात शवों की पड़ताल के लिए उसका मिलान मौजूदा आधार डाटा से करने का निर्देश केंद्र सरकार, यूआईडीएआई, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) व सभी राज्यों को देने का आग्रह किया है।
याचिका में कहा गया कि अगर अज्ञात शवों के आधार का डाटा यूआईडीएआई के पास मौजूद है तो उसे बिना देरी के एनसीआरबी व राज्यों के साथ साझा करने का निर्देश दिया जाए ताकि अज्ञात शवों की पहचान कर उनके परिजनों को सौंपे जा सकें। याची का कहना है कि देश में 1.22 अरब लोगों का पंजीकरण आधार में हो चुका है लेकिन इसके बाद भी इसका इस्तेमाल अज्ञात शवों की पहचान के लिए नहीं किया जा रहा है।
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याची ने अज्ञात शवों से जुड़े मामलों का निबटारा मौत के दिन या उससे अगले दिन करने के लिए विशेष अदालतों का गठन करने की मांग की है। याची ने यह याचिका पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट में गुमशुदा व मानसिक रूप से पीड़ित लोगों की पहचान के लिए आधार बायोमेट्रिक डाटा के प्रयोग व उनके परिजनों से मिलाने के निर्देश देने के लिए याची ने पहले ही याचिका दायर कर रखी है।
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आधार बायोमेट्रिक का प्रयोग हो
- जनहित याचिका दायर कर केंद्र और यूआईडीएआई को निर्देश देने का किया आग्रह
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अज्ञात शवों की पहचान के लिए आधार बायोमेट्रिक का प्रयोग करने के निर्देश केंद्र सरकार और यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) को देने के लिए जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा है कि देश में हर साल हजारों अज्ञात शव मिलते हैं, जिनकी पहचान नहीं हो पाती। अगर आधार के जरिए इन शवों की पहचान हो जाती है तो इनके परिवार वाले सम्मानपूर्वक इनका अंतिम संस्कार कर पाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ के समक्ष दायर इस जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हो सकती है। याचिका अधिवक्ता अमित साहनी ने दायर की है। इसमें अज्ञात शवों की पड़ताल के लिए उसका मिलान मौजूदा आधार डाटा से करने का निर्देश केंद्र सरकार, यूआईडीएआई, राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) व सभी राज्यों को देने का आग्रह किया है।
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याचिका में कहा गया कि अगर अज्ञात शवों के आधार का डाटा यूआईडीएआई के पास मौजूद है तो उसे बिना देरी के एनसीआरबी व राज्यों के साथ साझा करने का निर्देश दिया जाए ताकि अज्ञात शवों की पहचान कर उनके परिजनों को सौंपे जा सकें। याची का कहना है कि देश में 1.22 अरब लोगों का पंजीकरण आधार में हो चुका है लेकिन इसके बाद भी इसका इस्तेमाल अज्ञात शवों की पहचान के लिए नहीं किया जा रहा है।
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याची ने अज्ञात शवों से जुड़े मामलों का निबटारा मौत के दिन या उससे अगले दिन करने के लिए विशेष अदालतों का गठन करने की मांग की है। याची ने यह याचिका पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसे हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए कहा था। हाईकोर्ट में गुमशुदा व मानसिक रूप से पीड़ित लोगों की पहचान के लिए आधार बायोमेट्रिक डाटा के प्रयोग व उनके परिजनों से मिलाने के निर्देश देने के लिए याची ने पहले ही याचिका दायर कर रखी है।