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ज्यादातर महिलाओं को CAA की नहीं है सही जानकारी, इस डर के कराण आंदोलन में हो रही हैं शामिल
Tue, 21 Jan 2020 10:51 PM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अवधेश कुमार
Updated Tue, 21 Jan 2020 10:51 PM IST
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शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी
- फोटो : अमर उजाला
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शाहीन बाग में आंदोलन कर रही अधिकतर महिलाओं को सीएए के बारे में सही जानकारी नहीं है। वे तो बस इस डर से आंदोलन करने पहुंची हैं कि इस कानून के तहत उन्हें देश से निकाल दिया जाएगा।
यहां आंदोलन में जुटी महिलाओं से बातचीत के दौरान पता चला कि इन्हें बताया गया है कि सीएए लागू हो जाने के बाद सरकार उन्हें देश से निकालने वाली है। इसीलिए इनके भीतर सीएए और एनआरसी के प्रति भय है। इनमें से ज्यादातर का कहना है कि सीएए लागू हुआ तो उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाएगा।
केंद्र की मोदी सरकार उन्हें हिरासतघरों में कैद कर देगी। यहां आंदोलन में भाग लेने आई निगहत ने कहा कि वह 25 साल से शाहीन बाग में रहती हैं। उनका जन्म स्थान मुजफ्फरपुर है। उनके परिवार के बाकी सदस्य आज भी वहीं हैं।
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सीएए आने के बाद एनआरसी की चर्चा चली तो उन्होंने अपने गांव से परिवार की जमीनों के खसरा-खतौनी मंगाए हैं, ताकि समय आने पर साबित कर सकें कि वे भारतीय हैं। यहां आंदोलन के लिए जुटी ज्यादातर महिलाओं को सीएए के बारे में इसी प्रकार का भ्रम है।
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यहां आंदोलन में जुटी महिलाओं से बातचीत के दौरान पता चला कि इन्हें बताया गया है कि सीएए लागू हो जाने के बाद सरकार उन्हें देश से निकालने वाली है। इसीलिए इनके भीतर सीएए और एनआरसी के प्रति भय है। इनमें से ज्यादातर का कहना है कि सीएए लागू हुआ तो उन्हें पाकिस्तान भेज दिया जाएगा।
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केंद्र की मोदी सरकार उन्हें हिरासतघरों में कैद कर देगी। यहां आंदोलन में भाग लेने आई निगहत ने कहा कि वह 25 साल से शाहीन बाग में रहती हैं। उनका जन्म स्थान मुजफ्फरपुर है। उनके परिवार के बाकी सदस्य आज भी वहीं हैं।
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सीएए आने के बाद एनआरसी की चर्चा चली तो उन्होंने अपने गांव से परिवार की जमीनों के खसरा-खतौनी मंगाए हैं, ताकि समय आने पर साबित कर सकें कि वे भारतीय हैं। यहां आंदोलन के लिए जुटी ज्यादातर महिलाओं को सीएए के बारे में इसी प्रकार का भ्रम है।