जानिए किस तरह खारिज हुई हाईकोर्ट में सीबीआई की थ्योरी, ये हैं वो 4 आधार

अभ‌िषेक यादव/योगेंद्र म‌िश्र/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Sat, 14 Oct 2017 11:01 AM IST
know how allahabad high court refused cbi theory in aarushi hemraj murder case on these 4 points
परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपराध साबित करने में गुनाह के पीछे किसी मकसद का होना बेहद जरूरी है। कानूनी तौर पर यही मकसद सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, अभियोजन पक्ष को साबित करना होता है कि अपराध का इरादा क्या था। आरुषि-हेमराज मर्डर केस में हत्या का कारण अभियुक्ताें का अचानक आवेग में आना बताया गया था।

हाईकोर्ट में अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि डॉ. राजेश तलवार ने हेमराज को आरुषि के साथ यौन संबंधों में लिप्त देख लिया और तैश में आकर दोनों की हत्या कर दी। लेकिन यह बात वे साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर पाए। वहीं हाईकोर्ट ने सीबीआई की कहानियों के आधार पर निर्णय पर पहुंचने के लिए निचली अदालत को भी आड़े हाथ लिया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पूर्व के कई मामलों में आए निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपराध को साबित करने के लिए यह जरूरी है कि ये साक्ष्य पूरी तरह प्रमाणित हों।

वे संपूर्ण घटनाक्रम की सिलसिलेवार कहानी कहते हों जिसकी एक भी कड़ी टूटी हुई नहीं होनी चाहिए। तभी अभियुक्त को दोषी माना जा सकता है और दूसरी सभी कल्पनाएं और अनुमान खत्म किए जा सकते हैं।
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ये हैं वो तथ्य

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