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ट्रांसपोर्टर की हड़ताल का मिला-जुला असर रहने की संभावना
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गुरुग्राम। ट्रांसपोर्टरों की बृहस्पतिवार को होने वाली हड़ताल को लेकर ट्रांसपोर्टर एकजुट होने शुरू हो गए हैं। बुधवार रात से ही ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों को रोककर सरकार के विरुद्ध अपनी नाराजगी जाहिर करने की तैयारी में हैं। हालांकि मंदी की मार झेल रहे ट्रांसपोर्टर इस हड़ताल को लेकर आपस में बंट गए हैं। आपसी गुटबाजी में फंसे होने के चलते कई ट्रांसपोर्टर एसोसिएशनों ने हड़ताल में शामिल होने से इंकार कर दिया है जिसके कारण हड़ताल का मिलाजुला असर जिले में देखने को मिल सकता है। ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल से करीब 100 करोड़ रुपये का राजस्व का नुकसान होने की संभावना है।
सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार एक देश एक टैक्स होने की बात कहती है, वहीं दूसरी तरफ ईंधन पर अब तक यह लागू नहीं किया गया है। आए दिन बढ़ रहे ईंधन के दामों से ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। रोड, सामान सहित अन्य करों ने कमर तोड़ दी है। सरकार द्वारा नए करों को जोड़ा जा रहा है जिससे माल ढुलाई के वाहनों को चलाना मुश्किल हो गया है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, प्रवेश निषेध के कारण चालक समय पर अपने गंतव्य पर नहीं पहुंच पाता जिसके कारण बीच रास्ते में ही खड़ा होना पड़ता है। इससे उन पर दोहरी मार पड़ती है। इन समस्याओं को लेकर करीब दो साल पहले सरकार से वार्ता हुई थी।
सरकार ने ट्रांसपोर्टरों को राहत देने का आश्वासन भी दिया था, मगर यह आश्वासन झूठा साबित हुआ। इसके विरोध में राष्ट्रीय स्तर की ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आह्वान पर देश भर में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की जा रही है।
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उधर, मंदी की मार झेल रहे कुछ ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल से किनारा कर लिया है। उनका कहना है कि हड़ताल में केवल बड़े ट्रांसपोर्टर ही शामिल हैं। उन्हें अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए सरकार के अत्याचारों को सहना ही पड़ेगा। ऐसे में हड़ताल पर मिला जुला असर देखने को मिल सकता है।
बयान
जिले के सभी ट्रांसपोर्टर हड़ताल में बढ़चढ़कर हिस्सा लेंगे। कोई भी ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों को सड़कों पर नहीं उतारेगा। एक दिन की सांकेतिक हड़ताल को सफल बनाने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा।
- प्रदीप मोदी, महासचिव, गुरुग्राम ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन
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सरकार द्वारा बनाए गए नियमों से ट्रांसपोर्टर परेशान हैं। उनका कहना है कि एक तरफ सरकार एक देश एक टैक्स होने की बात कहती है, वहीं दूसरी तरफ ईंधन पर अब तक यह लागू नहीं किया गया है। आए दिन बढ़ रहे ईंधन के दामों से ट्रांसपोर्टरों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। रोड, सामान सहित अन्य करों ने कमर तोड़ दी है। सरकार द्वारा नए करों को जोड़ा जा रहा है जिससे माल ढुलाई के वाहनों को चलाना मुश्किल हो गया है। ट्रांसपोर्टरों के मुताबिक, प्रवेश निषेध के कारण चालक समय पर अपने गंतव्य पर नहीं पहुंच पाता जिसके कारण बीच रास्ते में ही खड़ा होना पड़ता है। इससे उन पर दोहरी मार पड़ती है। इन समस्याओं को लेकर करीब दो साल पहले सरकार से वार्ता हुई थी।
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सरकार ने ट्रांसपोर्टरों को राहत देने का आश्वासन भी दिया था, मगर यह आश्वासन झूठा साबित हुआ। इसके विरोध में राष्ट्रीय स्तर की ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आह्वान पर देश भर में एक दिन की सांकेतिक हड़ताल की जा रही है।
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उधर, मंदी की मार झेल रहे कुछ ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल से किनारा कर लिया है। उनका कहना है कि हड़ताल में केवल बड़े ट्रांसपोर्टर ही शामिल हैं। उन्हें अपनी रोजी रोटी कमाने के लिए सरकार के अत्याचारों को सहना ही पड़ेगा। ऐसे में हड़ताल पर मिला जुला असर देखने को मिल सकता है।
बयान
जिले के सभी ट्रांसपोर्टर हड़ताल में बढ़चढ़कर हिस्सा लेंगे। कोई भी ट्रांसपोर्टर अपने वाहनों को सड़कों पर नहीं उतारेगा। एक दिन की सांकेतिक हड़ताल को सफल बनाने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा।
- प्रदीप मोदी, महासचिव, गुरुग्राम ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन