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Gurugram News: नियमों को ताक पर रख सरपट दौड़ रहीं स्कूल बसें
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पिनगवां बडकली रोड पर कस्बे के पास बच्चों को लेकर जाती शीशा टूटी स्कूल बस
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मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़, नियम कागजों में कैद, सड़कों पर बढ़ा खतरा
सद्दाम हुसैन
पिनगवां । बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए नियम और नीतियां कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा संचालित बसों की हालत बेहद चिंताजनक है, जहां मासूम बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें जर्जर और असुरक्षित वाहनों में सफर कराया जा रहा है। सुरक्षित स्कूल वाहन नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
बुधवार को पिनंगवा बड़कली रोड पर कस्बे के पास एक निजी स्कूल की खटारा बस का मामला सामने आया, जिसका फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि बस के पिछले हिस्से का शीशा पूरी तरह टूटा हुआ है और उसकी जगह हरे रंग की फाइबर सीट लगाकर काम चलाया जा रहा है। यही नहीं, बस में बैठे बच्चे उसी खुले हिस्से से बाहर झांकते नजर आ रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता देने के बराबर है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस की हालत इतनी खराब है कि यदि अचानक ब्रेक लग जाए या बस को झटका लगे, तो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह बस रोजाना इसी मार्ग पर चलती है, लेकिन न तो प्रशासन और न ही यातायात पुलिस की इस पर नजर पड़ रही है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर सुरक्षित स्कूल वाहन नीति को लागू करने के दावे किए जाते हैं और बैठकों में सख्ती की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
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मात्र मुनाफे पर ध्यान दे रहे निजी स्कूल :
निजी स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर केवल मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं।मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने संबंधित निजी स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल बसों की नियमित जांच होनी चाहिए और जो भी वाहन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। बताया जा रहा है कि बस का केवल शीशा ही नहीं टूटा, बल्कि दरवाजे और खिड़कियां भी खुले हुए हैं फिर भी बस तेज गति से सड़क पर दौड़ रही है।
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न सीसीटीवी कैमरे और न ही फर्स्ट एड :
इसके अलावा अधिकांश स्कूल बसों में न तो सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं और न ही फर्स्ट एड किट जैसी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में किसी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी केवल स्कूल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि प्रशासन पर भी आएगी। स्कूल बसों से पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
…….
यह मामला संज्ञान में अभी आया है, मामले की जांच कराई जाएगी और जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-अखिल पिलानी डीसी नूंह
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सद्दाम हुसैन
पिनगवां । बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनाए गए नियम और नीतियां कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं। क्षेत्र में निजी स्कूलों द्वारा संचालित बसों की हालत बेहद चिंताजनक है, जहां मासूम बच्चों की जान जोखिम में डालकर उन्हें जर्जर और असुरक्षित वाहनों में सफर कराया जा रहा है। सुरक्षित स्कूल वाहन नीति की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
बुधवार को पिनंगवा बड़कली रोड पर कस्बे के पास एक निजी स्कूल की खटारा बस का मामला सामने आया, जिसका फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि बस के पिछले हिस्से का शीशा पूरी तरह टूटा हुआ है और उसकी जगह हरे रंग की फाइबर सीट लगाकर काम चलाया जा रहा है। यही नहीं, बस में बैठे बच्चे उसी खुले हिस्से से बाहर झांकते नजर आ रहे हैं, जो किसी बड़े हादसे को न्योता देने के बराबर है।
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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस की हालत इतनी खराब है कि यदि अचानक ब्रेक लग जाए या बस को झटका लगे, तो बच्चे गंभीर रूप से घायल हो सकते हैं। हैरानी की बात यह है कि यह बस रोजाना इसी मार्ग पर चलती है, लेकिन न तो प्रशासन और न ही यातायात पुलिस की इस पर नजर पड़ रही है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर सुरक्षित स्कूल वाहन नीति को लागू करने के दावे किए जाते हैं और बैठकों में सख्ती की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
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मात्र मुनाफे पर ध्यान दे रहे निजी स्कूल :
निजी स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर केवल मुनाफे पर ध्यान दे रहे हैं।मामले के सामने आने के बाद क्षेत्र के जागरूक नागरिकों ने संबंधित निजी स्कूल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि स्कूल बसों की नियमित जांच होनी चाहिए और जो भी वाहन नियमों का उल्लंघन करते पाए जाएं, उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। बताया जा रहा है कि बस का केवल शीशा ही नहीं टूटा, बल्कि दरवाजे और खिड़कियां भी खुले हुए हैं फिर भी बस तेज गति से सड़क पर दौड़ रही है।
न सीसीटीवी कैमरे और न ही फर्स्ट एड :
इसके अलावा अधिकांश स्कूल बसों में न तो सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं और न ही फर्स्ट एड किट जैसी जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में किसी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी केवल स्कूल प्रबंधन ही नहीं, बल्कि प्रशासन पर भी आएगी। स्कूल बसों से पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
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यह मामला संज्ञान में अभी आया है, मामले की जांच कराई जाएगी और जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
-अखिल पिलानी डीसी नूंह