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मैदान छोड़ रोजी रोटी के लिए दुकान चला रहे नेशनल चैंपियन

Wed, 09 Dec 2020 12:16 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 09 Dec 2020 12:16 AM IST
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National champion running shop for Rosie Roti leaving the field
गुरुग्राम (अंजू सिंह)। दिव्यांगता को दरकिनार कर जिन खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर परचम लहराया, खेलों का आयोजन नहीं होने पर उनका उत्साह टूटता नजर आ रहा है। अपने खेल संसाधनों और डाइट को पूरा करने के लिए वे दुकान चलाने को मजबूर हैं। दरअसल कोरोना काल में खेल विभाग द्वारा खेलों के आयोजन बंद कर दिए हैं। पिछले साल का नकद पुरस्कार भी इन खिलाड़ियों को नहीं मिल सका है। जिसकी वजह से वे मैदान छोड़कर रोजीरोटी का सहारा खोज रहे हैं। कोरोना काल में जहां सामान्य खिलाड़ी विभिन्न मैदानों में जाकर अभ्यास कर रहे हैं, वहीं इन खिलाड़ियों के लिए मैदान में पहुंचना और कठिन हो गया है। खिलाड़ी होने के नाते जहां इन्हें फिटनेस को बनाए रखने के लिए नियमित अभ्यास की जरूरत होती है वहीं इनके लिए अपनी विशेष डाइट को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।
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चाय बेच रहे पैरा एथलीट परवीन
दिव्यांग परवीन पावर लिफ्टिंग 2019 में राष्ट्रीय पदक विजेता रहे हैं। हरियाणा चैंपियन रहे परवीन इन दिनों अपने गांव हकदारपुर में चाय बेचकर गुजारा कर रहे हैं। 2019 में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मिलने वाला नकद पुरस्कार भी अभी तक नहीं मिला है। परवीन ने बताया कि उनके पिता नहीं हैं। आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से नकद पुरस्कार ही उनका सहारा था। खेलों के रहते थोड़ी बहुत आमदनी की उम्मीद रहती थी। पैसा नहीं होने की वजह से कोरोना काल में मैदान तक पहुंचना भी उनके लिए महंगा है। पूरा साल चला गया है। कोई खेल नहीं हुए हैं। अभ्यास नहीं हो पा रहा है। डाइट के नाम दिन भर का भोजन भी पूरा नहीं मिलता है। उम्मीद टूट चुकी है।
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फोटोस्टेट की दुकान चला रहे वाजिद
एक बार नेशनल और दो बार प्रदेश स्तर पर डिस्कस, शॉर्ट पुट और जेवलिन खेल चुके वाजिद अली इन दिनों फोटोस्टेट की दुकान पर बैठे नजर आते हैं। वाजिद अली भी दिव्यांग हैं। उन्होंने बताया कि घर में बैठे-बैठे फिटनेस खराब हो रही है। डाइट भी अधूरी मिलती है। खेल विभाग द्वारा खेलों का आयोजन नहीं किया जा रहा है। जिसकी वजह से उम्मीदें भी टूट चुकी है। फरवरी में वह दुबई फाजा सीरीज में खेलने वाले थे, जिससे उन्हें आर्थिक स्थिति सुधरने की उम्मीद थी। वहीं कोरोना की वजह से नहीं जा सके। अब अभ्यास नहीं होने की वजह से निराशा हाथ लगी है।
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खेल बिना टूटता है आत्मविश्वास
ऑनलाइन दवा उपलब्ध करा रहे पैरा एथलीट सुखचैन ने बताया कि 10 महीनों से खेलों का आयोजन नहीं हुआ है। पैरा एथलीट के लिए खेलते रहने से ही उनमें आत्मविश्वास आता है। खेल नहीं होने से उत्साह टूट रहा है। खेल नहीं हैं तो पुरस्कार राशि नहीं मिल रही है। स्टेडियम नहीं जाने से फिटनेस बिगड़ चुकी है। सुखचैन प्रदेश स्तर पर डिस्कस में अपना हुनर दिखा चुके हैं।
कोरोना काल में खिलाड़ियों के विकास और मनोस्थिति को बरकरार रखने के लिए वेबिनार का आयोजन किया जा रहा है। स्पोर्ट्स साइंस, डाइट और फिटनेस के संबंध मेें पूरी सूचनाएं दी जा रही है। खिलाड़ियों को पॉलिसी के तहत हर संभव लाभ दिया जा रहा है। खिलाड़ियों को यदि किसी मदद की आवश्यकता है तो वे विभाग से संपर्क कर सकते हैं।

- दीपा मलिक, अध्यक्ष, भारतीय पैरा ओलंपिक कमेटी
कोरोना काल में खिलाड़ियों के स्वास्थ्य के मद्देनजर खेलों का आयोजन नहीं हो सका है। यह समय है कि खिलाड़ी अपनी फिटनेस पर पूरा ध्यान दें। स्थिति सुधरते ही जल्द ही खेलों का आयोजन किया जाएगा।
- जेजी बनर्जी, जिला खेल अधिकारी
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