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लंपी वायरस का टीकाकरण शुरू, 8100 टीके लगाए
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गुरुग्राम। जिले में अब तक लंपी वायरस का कोई भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन पशुपालन विभाग ने एहतियातन टीकाकरण शुरू कर दिया है। बीते दो दिन में हुए टीकाकरण में लगभग 8100 पशुओं को गोटपॉक्स का टीका लगाया गया है। पशुपालन विभाग की उपनिदेशक डॉ. पुनीता गहलोत ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने मकडौला गांव में महिला पशुपालकों को बीमारी से आगाह किया तो बसई और कादीपुर की गोशालाओं में निरीक्षण कर साफ-सफाई का इंतजाम देखा और पशुओं की स्वास्थ्य जांच कराई। इधर, जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने धारा 144 लागू कर पशुओं के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
डॉ. पुनीता गहलोत ने बताया कि बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है। ध्यान रखने से बीमारी ठीक हो जाती है। पशु 12 से 20 दिन में पूरी तरह से स्वस्थ होकर दूध देने लगते हैं। संक्रमित पशुओं का दूध अच्छी तरह से उबाल कर ठंडा कर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें डरने की कोई बात नहीं है। ये बीमारी गायों में ज्यादा हो रही है, इसलिए गोशाला संचालक इसका विशेष ध्यान रखें। इस बीमारी में स्वस्थ पशुओं की मृत्यु दर एक और कमजोर पशुओं की मृत्युदर पांच फीसदी है।
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संक्रमण की रोकथाम
-पशुओं के हर तरह से आवागमन पर रोक, धारा 144 लागू
-पहले चरण में दिल्ली सीमा से सटते गांवों में हुआ टीकाकरण
-दूसरे चरण में जिले की सभी गोशालाओं में चलेगा अभियान
-उपनिदेशक के साथ एसडीओ भी अपने अपने क्षेत्र में सक्रिय
-जिले में अब तक लंपी संक्रमण का एक भी केस नहीं आया
-जिले में गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि मिलाकर 1.80 लाख पशु
बीमारी के लक्षण
-पशुओं को बुखार आना और मुंह और नाक से निकलती है लार
-पशु खाना कम कर देते हैं उनका दूध भी अचानक कम होता है
-त्वचा पर चकते-निशान और पूरे शरीर में गांठे पड़ने लगती हैं
-गायों में संक्रमण का डर सर्वाधिक, गोशाला वाले ज्यादा ध्यान दें
-स्वस्थ्य पशुओं में 1 से 2 और कमजोर में पांच फीसदी तक मृत्यु दर
-गुरुग्राम में अब तक कोई भी पशु इस बीमारी से संक्रमित नहीं मिला
बीमारी से बचाव
-नीम का पानी, लाल दवा या फिटकरी के पानी से पशुओं को नहलाते रहें
-बीमार पशुओं को डॉक्टर की सलाह पर बुखार और दर्द की दवाएं देते रहें
-मक्खी, मच्छर और कीचड़ से ये बीमारी फैलती है, बाड़े में साफ-सफाई रखें
-संक्रमित पशु को दूसरे स्वस्थ पशुओं से बिल्कुल अलग और थोड़ा दूर रखें
-एंटी वायरस और मच्छरोधी दवा का छिड़काव हर दिन करते रहें
-बीमार पशु की सेवा करने के बाद हाथ अच्छी तरह से साबुन से साफ करें
-नए पशुओं की खरीद-फरोख्त न करें, पशुओं को बाड़े से बाहर घूमने न दें
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डॉ. पुनीता गहलोत ने बताया कि बीमारी से डरने की जरूरत नहीं है। ध्यान रखने से बीमारी ठीक हो जाती है। पशु 12 से 20 दिन में पूरी तरह से स्वस्थ होकर दूध देने लगते हैं। संक्रमित पशुओं का दूध अच्छी तरह से उबाल कर ठंडा कर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें डरने की कोई बात नहीं है। ये बीमारी गायों में ज्यादा हो रही है, इसलिए गोशाला संचालक इसका विशेष ध्यान रखें। इस बीमारी में स्वस्थ पशुओं की मृत्यु दर एक और कमजोर पशुओं की मृत्युदर पांच फीसदी है।
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संक्रमण की रोकथाम
-पशुओं के हर तरह से आवागमन पर रोक, धारा 144 लागू
-पहले चरण में दिल्ली सीमा से सटते गांवों में हुआ टीकाकरण
-दूसरे चरण में जिले की सभी गोशालाओं में चलेगा अभियान
-उपनिदेशक के साथ एसडीओ भी अपने अपने क्षेत्र में सक्रिय
-जिले में अब तक लंपी संक्रमण का एक भी केस नहीं आया
-जिले में गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि मिलाकर 1.80 लाख पशु
बीमारी के लक्षण
-पशुओं को बुखार आना और मुंह और नाक से निकलती है लार
-पशु खाना कम कर देते हैं उनका दूध भी अचानक कम होता है
-त्वचा पर चकते-निशान और पूरे शरीर में गांठे पड़ने लगती हैं
-गायों में संक्रमण का डर सर्वाधिक, गोशाला वाले ज्यादा ध्यान दें
-स्वस्थ्य पशुओं में 1 से 2 और कमजोर में पांच फीसदी तक मृत्यु दर
-गुरुग्राम में अब तक कोई भी पशु इस बीमारी से संक्रमित नहीं मिला
बीमारी से बचाव
-नीम का पानी, लाल दवा या फिटकरी के पानी से पशुओं को नहलाते रहें
-बीमार पशुओं को डॉक्टर की सलाह पर बुखार और दर्द की दवाएं देते रहें
-मक्खी, मच्छर और कीचड़ से ये बीमारी फैलती है, बाड़े में साफ-सफाई रखें
-संक्रमित पशु को दूसरे स्वस्थ पशुओं से बिल्कुल अलग और थोड़ा दूर रखें
-एंटी वायरस और मच्छरोधी दवा का छिड़काव हर दिन करते रहें
-बीमार पशु की सेवा करने के बाद हाथ अच्छी तरह से साबुन से साफ करें
-नए पशुओं की खरीद-फरोख्त न करें, पशुओं को बाड़े से बाहर घूमने न दें