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Gurugram News: विकास तो दूर जिले का नाम भी तय नहीं कर पा रही सरकार व प्रशासन

Mon, 07 Apr 2025 12:38 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 07 Apr 2025 12:38 AM IST
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Leave aside development, the government and administration are not even able to decide the name of the district
20 बरस का हुआ जिला, आज भी लोगों को नहीं मिल रही शिक्षा, स्वास्थ्य, हुडा सेक्टर जैसी बुनियादी सुविधाएं
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दिनेश देशवाल
नूंह। जिला नूंह ने अपनी स्थापना के बीस बरस पूरे कर लिए हैंं। इस दौरान अलग-अलग सरकारों ने जिले के तीन नाम रखे, लेकिन अभी तक भी जिले के नाम को लेकर अस्पष्टता लोगों को भ्रमित कर रही है। प्रशासन द्वारा कहीं पर जिले का नाम मेवात लिखा है तो कहीं पर नूंह। जो सरकार व प्रशासन की गंभीर लापरवाही को तो दर्शाता ही है। साथ ही जिले के प्रति सरकार की गंभीरता को भी जगजाहिर करती है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय ओमप्रकाश चौटाला ने 2004 में गुरुग्राम व फरीदाबाद जिले के कुछ हिस्से को अलग कर सत्यमेव पुरम नाम से नए जिले की घोषणा की। लेकिन वे इसकी गजट नोटिफिकेशन नहीं करा पाएं और 2005 के विधानसभा चुनावों में मिली हार से वे सत्ता से बाहर हो गए। इसके बाद भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी और मुख्यमंत्री हुड्डा ने चार अप्रैल 2005 को मेवात के नाम से प्रदेश का 22वां जिला बना दिया। इसमें गुरुग्राम जिले के नूंह, तावडू, फिरोजपुर झिरका, नगीना व पुन्हाना व फरीदाबाद जिले के हथीन खंड को शामिल किया गया। हालांकि, बाद में हथीन क्षेत्र को पलवल जिले में शामिल किया गया। इस दौरान जिले के विकास के लिए अनेक योजनाएं सिरे चढ़ीं। वहीं, लोगों में चर्चाएं शुरू हो गई कि मेवात तो एक क्षेत्र है, जिसमें हरियाणा का मेवात जिला, राजस्थान का अलवर व भरतपुर जिला और उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का कुछ हिस्सा आता है। जबकि जिले का नाम जिला मुख्यालय के शहर पर होता है। जिले का मुख्यालय नूंह में स्थापित है, लेकिन जिले का नाम मेवात तय किया गया।
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मेवात के अपराधियों को नए जिले से जोड़ा गया : मेवात क्षेत्र के अपराधी कोई अपराध करते तो उनका नाम मेवात से जुड़ता, जबकि अपराध करने वाला कोई भरतपुर का होता तो कोई कोसी, मथुरा का। इस कारण हरियाणा के मेवात जिले की छवि धूमिल होने लगी और यहां के लोगों को कई प्रकार की समस्याएं आने लगीं। इसके बाद लोगों ने मांग शुरू की कि मेवात जिले का नाम बदलकर नूंह रखा जाए।
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भाजपा सरकार ने बदला नाम : 2014 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और यहां के लोगों ने उसके सामने जिले का नाम मेवात से बदलकर नूंह रखने की मांग की, जिस पर भाजपा सरकार ने 11 अप्रैल 2016 को जिले का नाम बदलकर नूंह कर दिया, जिसका लोगों ने स्वागत किया।
जिले के नाम को लेकर असमंजस : जिले का नाम नूंह होने के लगभग 10 बरस बाद भी अधिकांश लोग जिले को मेवात के नाम से ही जानते हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने भी इस पर अपनी स्पष्टता नहीं की हुई है। जिला सचिवालय पर नूंह है तो जिला सचिवालय के लिए प्रमुख रूप से लगे साइन बोर्ड आज भी मेवात के नाम से हैं। इस कारण बाहरी लोगों के साथ स्थानीय लोगों को भी जिले के नाम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रहती है।

विकास पर नहीं ध्यान : जिले की स्थापना को 20 बरस बीत गए हैं, लेकिन यहां आज भी मूलभूत सुविधाएं लोगों को उपलब्ध नहीं हैं। खिलाड़ियों के लिए खेल स्टेडियम, शहर के विकास के अहम हिस्सा हुड्डा सेक्टर, नूंह से अलवर बॉर्डर तक की रोड को फोरलेन रोड करने, नूंह जिला मुख्यालय से पलवल जिला मुख्यालय को जाने वाली रोड को फोरलेन करने, लोगों की मुख्य मांगों में शामिल मेवात केनाल, कोटला झील का विकास, जिले में पैसेंजर रेलवे लाइन, विश्वविद्यालय, अस्पतालों में पर्याप्त डाक्टर, स्कूलों में अध्यापकों की कमी, जिला प्रशासन के कार्यालयों में स्टाफ की कमी जैसी अनेक बुनियादी सुविधाओं से आज भी जिलेवासी वंचित हैं।
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